*साधु वेश में रावण ने किया सीता हरण, राम विरह में हुए व्याकुल* *श्री राम की शबरी से हुई भेंट, हनुमान ने सुग्रीव से कराई मित्रता*

*साधु वेश में रावण ने किया सीता हरण, राम विरह में हुए व्याकुल*

 

*श्री राम की शबरी से हुई भेंट, हनुमान ने सुग्रीव से कराई मित्रता*

 

रुद्रपुर। श्री शिव नाटक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला मंचन के नौवें दिन रावण द्वारा साधु का वेश धारण कर माता सीता का हरण करने, श्रीराम के विरह में व्याकुल होने और शबरी से भेंट के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। इसके साथ ही हनुमान जी के माध्यम से श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ अमर योग क्लब के संस्थापक एवं समाजसेवी अशोक अदलखा, अदलखा ग्लास स्टोर के स्वामी भूषण अदलखा, योग गुरु अशोक कालरा और गुरु मां एंटरप्राइज के स्वामी रमेश ढींगड़ा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर अमर योग क्लब से जुड़े सुरेंद्र मिद्धा, सतीश मिद्धा, मदन लाल मक्कड़, प्रभास स्वर्णकार, जुगनू अरोरा, रवि काकरान, सुनील आनंद, सनी अरोरा, पवन डाबरा, राजीव अनेजा, विजय फुटेला, जतिन नागपाल, हरीश गुंबर, विजय अग्रवाल, सुषमा अग्रवाल, राजकुमार सीकरी, विजय राणा, सोनू कपूर, आकाश भुसरी और हरीश गाबा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

 

इस दौरान योग गुरु अशोक कालरा ने भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामलीला हमें जीवन जीने की सही राह दिखाती है। विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य को प्रसन्नता, धैर्य और सहनशीलता बनाए रखनी चाहिए। भगवान श्रीराम का स्मरण व्यक्ति को मानसिक शांति और कठिनाइयों से जूझने की शक्ति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए। उन्होंने अंगद और अक्षय कुमार के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए रामभक्तों को प्रेरित किया। साथ ही श्री शिव नाटक क्लब के आयोजन की सराहना करते हुए पदाधिकारियों को बधाई दी और भविष्य के आयोजनों के लिए शुभकामनाएं दीं।

 

श्री शिव नाटक क्लब के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र और माला पहनाकर स्वागत किया। साथ ही स्मृति चिह्न भेंट कर उन्हें सम्मानित किया।

 

रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि रावण रथ पर सवार होकर पंचवटी पहुंचता है। वहां माता सीता का हरण करने के लिए वह साधु का वेश धारण करता है और भिक्षा मांगने के बहाने कुटिया के पास पहुंचता है। लक्ष्मण रेखा के कारण वह कुटिया के भीतर प्रवेश नहीं कर पाता, जिसके बाद वह माता सीता को बाहर आकर भिक्षा देने के लिए कहता है। जैसे ही माता सीता लक्ष्मण रेखा पार कर बाहर आती हैं, रावण अपने वास्तविक रूप में आकर उनका हरण कर लेता है।

 

इसके बाद माता सीता को कुटिया में न पाकर भगवान श्रीराम व्याकुल हो उठते हैं और वन-वन भटककर उनकी तलाश करते हैं। इसी दौरान उनकी भेंट शबरी से होती है। शबरी प्रभु श्रीराम को बेर अर्पित करती हैं और उन्हें सुग्रीव से मिलने का मार्ग बताती हैं। आगे हनुमान जी की श्रीराम से भेंट होती है और वे दोनों के बीच मित्रता कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

मंचन में रावण की भूमिका अंशुल गुलाटी, साधु रावण की भूमिका नरेश घई, श्रीराम की भूमिका अभिनव अनेजा, लक्ष्मण की भूमिका रवि कक्कड़, सीता की भूमिका नैतिक तनेजा, जटायु की भूमिका दीपांशु धानिक, शबरी की भूमिका सन्नी घई, सुग्रीव की भूमिका विशांत भसीन और हनुमान की भूमिका सन्नी कक्कड़ ने निभाई। मंच संचालन जॉली कक्कड़ ने किया।

 

आज होगा बाली वध और अशोक वाटिका प्रसंग का मंचन

 

श्री शिव नाटक क्लब की ओर से आज रात होने वाले रामलीला मंचन में बाली वध, सीता की खोज, अशोक वाटिका, रावण-सीता संवाद, हनुमान जी द्वारा अशोक वाटिका उजाड़ने, अक्षय कुमार वध तथा मेघनाद द्वारा हनुमान जी को ब्रह्मपाश में बांधने तक के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

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