*विधवा-विधुर शिक्षकों के तबादलों में सरकार की संवेदनहीनता उजागर : गणेश उपाध्याय*

*विधवा-विधुर शिक्षकों के तबादलों में सरकार की संवेदनहीनता उजागर : गणेश उपाध्याय*

रुद्रपुर। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री डॉ. गणेश उपाध्याय ने शिक्षा विभाग में अनुरोध के आधार पर किए जा रहे स्थानांतरणों में विधवा-विधुर श्रेणी के शिक्षकों को बेहद कम संख्या में तबादला दिए जाने पर प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और विभाग का रवैया मानवीय संवेदनाओं के विपरीत है।

डॉ. उपाध्याय ने कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया में विधवा-विधुर श्रेणी के लिए कोई निश्चित सीमा निर्धारित नहीं होने के बावजूद इस श्रेणी में महज कुछ शिक्षकों के स्थानांतरण किया जाना सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पति या पत्नी को खो चुके शिक्षक पहले से ही विषम पारिवारिक परिस्थितियों से गुजरते हैं। ऐसे मामलों में विभाग को विशेष मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निर्णय लेना चाहिए।

उन्होंने पति-पत्नी श्रेणी को विधवा-विधुर श्रेणी से पहले प्राथमिकता दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। कहा कि पति या पत्नी से अलग रह रहे कर्मचारियों की समस्या महत्वपूर्ण है, लेकिन जीवनसाथी खो चुके कर्मचारियों की पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियां अधिक कठिन होती हैं। ऐसे में स्थानांतरण की प्राथमिकता तय करते समय मानवीय पक्ष को प्रमुखता दी जानी चाहिए।

कांग्रेस प्रदेश महामंत्री ने कहा कि सरकार को नियमों और कागजी प्रक्रियाओं तक सीमित रहने के बजाय कर्मचारियों की वास्तविक परिस्थितियों को समझकर निर्णय लेना चाहिए। विधवा-विधुर शिक्षकों के स्थानांतरण के मामले में वर्तमान रवैया सरकार के असंवेदनशील चेहरे को उजागर करता है।

उन्होंने शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की। साथ ही पात्र विधवा-विधुर शिक्षकों के प्रकरणों की दोबारा समीक्षा कर मानवीय आधार पर उनके स्थानांतरण सुनिश्चित करने की मांग की। डॉ. उपाध्याय ने कहा कि संवेदनशील सरकार का दायित्व है कि कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे कर्मचारियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाए और उनके हितों की अनदेखी न करे।

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