भानु प्रताप पब्लिक स्कूल में सीबीएसई क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित
‘हैप्पी क्लासरूम’ विषय पर शिक्षकों को दिए प्रभावी शिक्षण के गुर
आनंदमय शिक्षण के गुर सीखकर लौटे 78 शिक्षक
सीबीएसई क्षमता निर्माण कार्यक्रम में शिक्षकों ने बढ़ाई दक्षता
‘हैप्पी क्लासरूम’ कार्यशाला में प्रभावी शिक्षण की तकनीकें साझा
दिबदिबा में सीबीएसई प्रशिक्षण, शिक्षकों ने सीखे नवाचार आधारित शिक्षण तरीके
रोल प्ले और समूह गतिविधियों से शिक्षकों ने समझे आधुनिक शिक्षण के आयाम
भानु प्रताप पब्लिक स्कूल बना शिक्षक सशक्तीकरण का केंद्र
अनुभवात्मक अधिगम और भावनात्मक बुद्धिमत्ता पर केंद्रित रही कार्यशाला
दिबदिबा (रामपुर)। भानु प्रताप पब्लिक स्कूल, दिबदिबा में सीबीएसई क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत ‘हैप्पी क्लासरूम’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के 78 शिक्षकों ने प्रतिभाग कर छात्र-केंद्रित एवं आनंदमय शिक्षण पद्धतियों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य महेश चंद्रा तथा सीबीएसई रिसोर्स पर्सन गरिमा भारतीय और रिया चंडोक अरोड़ा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य ने दोनों अतिथियों का पौधा भेंट कर स्वागत किया।
कार्यशाला में ब्लू बर्ड पब्लिक स्कूल, बरेली की प्रधानाचार्या गरिमा भारतीय एवं सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, बरेली की रिया चंडोक अरोड़ा ने शिक्षकों को भावनात्मक रूप से सुरक्षित, समावेशी और छात्र-अनुकूल कक्षा वातावरण विकसित करने के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने अनुभवात्मक अधिगम, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, विकासशील मानसिकता तथा सकारात्मक शिक्षक-छात्र संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण के दौरान रोल प्ले, समूह गतिविधियों, विचार-विमर्श और चिंतनशील अभ्यासों के माध्यम से शिक्षकों को कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के व्यावहारिक तरीके बताए गए। प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से गतिविधियों में भाग लेकर सीखने की प्रक्रिया को आनंदमय बनाने के उपायों पर चर्चा की।
कार्यशाला का संचालन विद्यालय के पीजीटी गणित अक्षय शर्मा ने किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने प्रधानाचार्य महेश चंद्रा के नेतृत्व और शिक्षक सशक्तीकरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। शिक्षकों ने कहा कि विद्यालय में निरंतर आयोजित होने वाले ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के पेशेवर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें अपनी कक्षाओं को अधिक आकर्षक, रचनात्मक और छात्र-अनुकूल बनाने के लिए नई सोच और व्यावहारिक सुझाव प्राप्त हुए। कार्यक्रम का समापन शिक्षकों में शिक्षा को आनंदमय बनाने के संकल्प के साथ







