*बाली वध के बाद सीता की खोज में अशोक वाटिका पहुंचे हनुमान* *रावण-सीता संवाद और अशोक वाटिका उजाड़ने की लीला का हुआ मंचन, हनुमान ने किया अक्षय कुमार का वध*

*बाली वध के बाद सीता की खोज में अशोक वाटिका पहुंचे हनुमान*

 

*रावण-सीता संवाद और अशोक वाटिका उजाड़ने की लीला का हुआ मंचन, हनुमान ने किया अक्षय कुमार का वध*

 

रुद्रपुर। श्री शिव नाटक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला मंचन के दसवें दिन बाली वध से लेकर हनुमान जी के रावण दरबार पहुंचने तक की लीलाओं का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों की सजीव प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

 

रामलीला का शुभारंभ ड्रोन कॉलेज के चेयरमैन विजय भूषण गर्ग, अलायंस सोसाइटी के उपाध्यक्ष सीए हरनाम चौधरी, भारत अरोरा, राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राजकुमार चौधरी और सरदार जोगिंदर सिंह ने संयुक्त रूप से विधिवत पूजन और दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान अलायंस दशहरा कमेटी से परनीत बांगा, साक्षी गाबा, शिल्पा चौहान, अधिवक्ता तान्या अरोरा, व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा, राजकुमार सीकरी, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, संजय ठुकराल और सरदार मंगत सिंह खुराना भी उपस्थित रहे।

 

मुख्य अतिथि विजय भूषण गर्ग ने कहा कि सनातन धर्म की विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने के लिए रामलीलाओं का मंचन बेहद आवश्यक है। रामलीला हमें आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि लोगों को रामलीला देखने के लिए अवश्य पहुंचना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी तक अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को पहुंचाया जा सके।

 

राजकुमार चौधरी और हरनाम चौधरी ने श्री शिव नाटक क्लब को भव्य आयोजन के लिए बधाई दी और आतिथ्य सत्कार के लिए आयोजकों का आभार जताया। क्लब के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों को अंगवस्त्र पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

 

बाली वध से अशोक वाटिका तक की लीला ने मोहा मन

 

मंचन के दौरान दिखाया गया कि सुग्रीव की मित्रता प्रभु श्रीराम से होने के बाद वह अपने भाई बाली को युद्ध के लिए ललकारता है। दोनों भाइयों के बीच भीषण युद्ध होता है, जिसमें श्रीराम बाली का वध कर देते हैं। बाली की मृत्यु पर तारा और अंगद का विलाप दर्शकों को भावुक कर गया।

 

इसके बाद माता सीता की खोज शुरू होती है। हनुमान जी, अंगद और जामवंत सहित वानर दल सीता की तलाश में निकलता है। समुद्र लांघकर हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचते हैं, जहां उनकी माता सीता से भेंट होती है। वह माता सीता को प्रभु श्रीराम की मुद्रिका देकर उन्हें उनके कुशलक्षेम का संदेश देते हैं।

 

उधर, रावण माता सीता को मनाने का प्रयास करता है और उन्हें एक माह का समय देता है। इसके बाद भूख लगने पर हनुमान जी अशोक वाटिका के फलों को खाने के साथ वहां उत्पात मचाते हुए वाटिका उजाड़ देते हैं। रावण का पुत्र अक्षय कुमार उन्हें पकड़ने पहुंचता है, लेकिन हनुमान जी उसका वध कर देते हैं। इसके बाद मेघनाद ब्रह्मपाश में बांधकर हनुमान जी को रावण के दरबार में ले जाता है। इसी प्रसंग के साथ उस दिन की लीला का समापन हुआ।

 

इन कलाकारों ने निभाई भूमिकाएं

 

बाली की भूमिका तनिश सीकरी, सुग्रीव की विशान्त भसीन, तारा की आदित्य कुमार, अंगद की आर्यन ग्रोवर, श्रीराम की अभिनव अनेजा, लक्ष्मण की रवि कक्कड़, सीता की नैतिक तनेजा, रावण की हिमांशु पारिक, हनुमान की सन्नी कक्कड़ और त्रिजटा की भूमिका केशव नारंग ने निभाई। मंच संचालन जॉली कक्कड़ ने किया।

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