मजदूरों की उपेक्षा पर भड़का ऐक्टू, 42 हजार न्यूनतम वेतन की मांग

मजदूरों की उपेक्षा पर भड़का ऐक्टू, 42 हजार न्यूनतम वेतन की मांग

रुद्रपुर, 12 अप्रैल। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) की जिला काउंसिल की बैठक रविवार को हेड मास्टर निशान सिंह भवन स्थित कार्यालय में आयोजित हुई। बैठक में मजदूरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री के.के. बोरा ने कहा कि मजदूर वर्ग को केंद्र सरकार से वेतन वृद्धि की उम्मीद थी, लेकिन सरकार लगातार उनकी उपेक्षा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरों के शोषण को बढ़ावा देने वाले चार लेबर कोड लागू किए जा रहे हैं, जिससे पूंजीपतियों को लाभ पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि महंगाई और गैस संकट के बीच देशभर में मजदूरों में रोष बढ़ रहा है, जबकि सरकार उनकी मांगों को मानने के बजाय दमनात्मक कार्रवाई कर रही है। मानेसर, गुरुग्राम और नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों पर लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों की उन्होंने निंदा की।

बोरा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सरकार के वेतन निर्धारण फार्मूले के अनुसार न्यूनतम वेतन 42 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए।

जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी ने कहा कि हर छह माह में बढ़ने वाला महंगाई भत्ता (वीडीए) जनवरी से लागू होना चाहिए था, लेकिन अब तक जारी नहीं किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द वीडीए लागू नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन करेगा।

जिला सचिव अनिता अन्ना ने बताया कि संगठन जल्द ही रुद्रपुर और सितारगंज में नगर सम्मेलन आयोजित कर मजदूर आंदोलन को और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि आशा, आंगनबाड़ी और भोजनमाता सहित विभिन्न स्कीम वर्कर्स पर काम का बोझ बढ़ाया जा रहा है, लेकिन उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से उनके वेतन में वृद्धि की मांग की।

बैठक में ललित मटियाली, रीता कश्यप, मोहन बिष्ट, हीरा सिंह राठौर, रुदल प्रसाद, प्रकाश नेगी, उत्तम दास और धीरज कुमार समेत अन्य काउंसिल सदस्य उपस्थित रहे।

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