*_गुजरात के 20 जिलों में 4 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित, आदिवासी जिलों में स्थिति गंभीर_*
गांधीनगर: गुजरात में बच्चों में कुपोषण को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सरकार द्वारा दिए गए एक लिखित जवाब में यह खुलासा हुआ है कि गुजरात के 20 जिलों में कुल 4 लाख 3,051 बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं. कांग्रेस विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में, सरकार ने सदन में कुपोषित, कम वज़न वाले और बहुत कम वज़न वाले बच्चों के आंकड़े पेश किए.
आदिवासी जिलों में स्थिति गंभीर
इन आंकड़ों के मुताबिक, कुपोषण की समस्या विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा गंभीर दिखाई देती है. छोटा उदेपुर और नर्मदा जैसे आदिवासी जिलों में कुपोषित बच्चों की संख्या चिंताजनक है. सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, तापी में 8,848, नर्मदा में 8,881, छोटा उदेपुर में 32,644, पंचमहाल में 41,524, आनंद में 12,704, खेड़ा में 37,180, वलसाड में 14,974, डांग में 6,440, महिसागर में 15,676, दाहोद में 32,776, गिर सोमनाथ में 10,378, जूनागढ़ में 10,204, पाटन में 14,280, भरूच में 22,906, अहमदाबाद में 12,822, गांधीनगर में 12,934, बनासकांठा में 38,782, कच्छ में 23,093, अरावली में 12,824 और साबरकांठा में 33,176 बच्चों के कुपोषण से पीड़ित होने की सूचना मिली है.
इस मुद्दे पर, कांग्रेस विधायक विमल चूड़ासमा ने कहा कि गिर सोमनाथ और जूनागढ़ जैसे सिर्फ दो जिलों में ही हजारों बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं. उन्होंने कहा कि गिर सोमनाथ जिले में 5,189 बच्चे और जूनागढ़ जिले में 5,102 बच्चे कुपोषण का शिकार हो गए हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हाल के समय में, गिर सोमनाथ में 1,952 और जूनागढ़ में 555 की कमी आई है. विमल चूड़ासमा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है और सरकार के उपाय खोखले साबित हो रहे हैं.
सरकार को कुपोषण खत्म करने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए
कांग्रेस के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि गुजरात में अभी तक बच्चों का कुपोषण खत्म क्यों नहीं हुआ है।.उन्होंने कहा कि 20 जिलों में लगभग 4 लाख बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं, फिर भी सरकार इसका कोई उचित जवाब नहीं दे पा रही है.
सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि सरकार कुपोषण के लिए सिर्फ भोजन को दोषी ठहरा रही है, जो कि अनुचित है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को कुपोषण के खिलाफ कड़े कदम उठाने चाहिए और इस समस्या को खत्म करने का संकल्प लेना चाहिए.
इस बीच, मेवाणी ने सदन में सामाजिक मुद्दे भी उठाए. उन्होंने कहा कि आज भी राज्य में छुआछूत पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. भारत के संविधान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि छुआछूत को खत्म करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है.
दलितों और आदिवासियों के साथ अन्याय के आरोप
उन्होंने आगे कहा कि ऊना घटना के दस साल बाद भी पीड़ितों को उचित न्याय नहीं मिला है. उन्होंने तीन दलित युवकों की थांगढ़ गोलीबारी की घटना का भी जिक्र किया और पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की.
इसके अलावा, उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा पर सार्वजनिक अवकाश की मांग की और यह भी आरोप लगाया कि GPSC में दलित और आदिवासी छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है. विधानसभा में कुपोषण के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनके बाद राज्य में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के मुद्दे पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है.







