*अशोक वाटिका उजाड़ हनुमान ने रावण को ललकारा, रामनाम की शक्ति से राक्षस दल को पछाड़ा*
*मुख्य रामलीला में संपाती संवाद से लंका दहन तक की लीला का भव्य मंचन, हनुमान बने सुशील गाबा के अभिनय ने मोहा मन*
रुद्रपुर। प्राचीन मुख्य बस स्टैंड स्थित श्रीरामलीला मंच पर आयोजित रामलीला में विगत रात्रि संपाती संवाद से लेकर लंका दहन तक की लीला का भव्य मंचन किया गया। भक्ति, साहस और रोमांच से भरपूर दृश्यों ने हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय और सजीव संवाद अदायगी से रामलीला परिसर बार-बार ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ के जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षाविद् सुरजीत सिंह ग्रोवर, हरमन सिंह ग्रोवर और डॉ. रणजीत सिंह गिल ने अपने परिवारों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे इन शिक्षाविदों की उपस्थिति में मंचन का आगाज हुआ।
लीला की शुरुआत माता सीता की खोज में निकले वानर दल की संपाती से भेंट के साथ हुई। संपाती ने माता सीता के लंका स्थित अशोक वाटिका में होने की जानकारी दी। समुद्र पार करने की चुनौती सामने आने पर जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्तियों का स्मरण कराया। इसके बाद प्रभु श्रीराम का स्मरण करते हुए हनुमान जी समुद्र लांघकर लंका पहुंच गए।
अशोक वाटिका में रावण और माता सीता के बीच हुए संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। रावण के प्रलोभनों और धमकियों के बावजूद माता सीता की अटूट रामभक्ति और निर्भीकता ने दर्शकों को प्रभावित किया। इसके बाद हनुमान जी ने माता सीता को प्रभु श्रीराम की मुद्रिका देकर अपना परिचय दिया। रामदूत को सामने पाकर माता सीता भावविभोर हो उठीं। हनुमान-सीता संवाद में विरह, विश्वास और भक्ति का भावपूर्ण चित्रण देखने को मिला।
माता सीता से अनुमति मिलने के बाद हनुमान जी अशोक वाटिका में फल खाने पहुंचे और देखते ही देखते वाटिका उजाड़ दी। वृक्षों को उखाड़ते और राक्षसों को परास्त करते हनुमान जी के पराक्रमी स्वरूप ने दर्शकों में रोमांच भर दिया। रावण के पुत्र अक्षय कुमार को युद्ध में परास्त करने के बाद हनुमान जी और मेघनाद के बीच भीषण युद्ध का मंचन हुआ। मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, जिसकी मर्यादा रखते हुए हनुमान जी बंधन में बंध गए।
इसके बाद हनुमान जी को रावण के दरबार में प्रस्तुत किया गया। यहां रामदूत ने निर्भीकता के साथ रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाने और प्रभु श्रीराम की शरण में आने की सलाह दी। अहंकार में डूबे रावण ने उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दे दिया। इसके बाद जलती पूंछ के साथ हनुमान जी ने लंका में आग लगा दी। स्वर्णनगरी लंका के दहन का दृश्य देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे और पूरा परिसर जयकारों से गूंजने लगा। लीला के माध्यम से रामभक्ति की शक्ति और अहंकार के विनाश का संदेश दिया गया।
हनुमान के स्वरूप में सुशील गाबा ने मोहा मन
हनुमान जी की भूमिका में रामभक्त सुशील गाबा ने अपने ऊर्जावान अभिनय और प्रभावशाली संवाद अदायगी से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। माता सीता के समक्ष विनम्रता, रावण के दरबार में निर्भीकता और लंका दहन के दौरान पराक्रम का उनका चित्रण सराहनीय रहा। उनके अभिनय पर दर्शकों ने जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारों के साथ उत्साह व्यक्त किया।
रावण की भूमिका विशाल भुड्डी, माता सीता की भूमिका गौरव जग्गा, मेघनाद की भूमिका रमन अरोरा, अक्षय कुमार की भूमिका अभय भुड्डी, विभीषण की भूमिका सचिन आनंद और जामवंत की भूमिका रोहित खुराना ने निभाई। इसके अलावा ऋषि के रूप में सचिन मुजाल, गणेश भगवान के रूप में आशीष ग्रोवर, अंगद के रूप में आशमन अरोरा, नल के रूप में पाररा अरोरा, नील के रूप में कनव गंभीर, बाल हनुमान के रूप में आयुष्मान सुशील गाबा और संपाती के रूप में गोला इदरीसी सहित अन्य कलाकारों ने शानदार अभिनय किया।
बाल कलाकारों पुरुराज बेहड़, अग्रिम सचदेवा, सक्षम दुआ, अविश तनेजा, हर्षित अरोरा, आयुष धमीजा, युवी भुड्डी, निर्वाण जग्गा, मनकरन रंधावा और शिवाय मुंजाल ने भी अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। मंच संचालन मंच सचिव संदीप धीर और विजय जग्गा ने किया।
रामलीला मंच आस्था और संघर्ष की धरोहर : तिलक राज बेहड़
रामलीला मंचन देखने पहुंचे हजारों लोगों को संबोधित करते हुए कमेटी के संरक्षक एवं विधायक तिलक राज बेहड़ ने कहा कि प्राचीन श्रीरामलीला मंच प्रभु श्रीराम की कृपा, जनता की आस्था, आपसी एकता और कमेटी के लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने वर्ष 1992 के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक मंच को बचाने और संवारने के लिए कमेटी के सदस्यों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। उनके अनुसार, उस दौरान सदस्यों पर गोलीबारी तक हुई, लेकिन रामभक्तों का हौसला नहीं टूटा।
बेहड़ ने कहा कि आज निर्वाचित कमेटी द्वारा इस परंपरा को आगे बढ़ाना गर्व की बात है। उन्होंने लोगों से रामलीला मंच की गरिमा बनाए रखने, आपसी भाईचारे को मजबूत करने और प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर कमेटी के सरपरस्त पवन अग्रवाल, अध्यक्ष मनोज गाबा, महामंत्री सुशील गाबा, कोषाध्यक्ष सीए अमित गंभीर, समन्वयक राजेश छाबड़ा, व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा, अमित साहनी, नरेश शर्मा, देवी शंकर अग्रवाल, विजय अरोरा, हरीश अरोरा, महावीर आजाद, अमित अरोरा बोबी, विजय विरमानी, सुभाष खंडेलवाल, राकेश सुखीजा, अशोक गुम्बर, अमित चावला, जगदीश टंडन, रघुवीर अरोरा, राज घई, बिट्टू ग्रोवर, डॉ. धनंजय सिंह, राजकुमार सीकरी, पत्रकार परम पाल सुखीजा, भूपेश छिमवाल, पूरन रावत, नरेंद्र राठौर, गगन वाधवा, शक्ति बठला, अनिल जल्होत्रा, जतिन नागपाल और सोनू वर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
श्री रामनाटक क्लब की कार्यकारिणी से संरक्षक मोहन लाल भुड्डी, अध्यक्ष विशाल भुड्डी, सरपरस्त प्रेम खुराना, संजीव आनंद, राम कृष्ण कन्नौजिया, अनिल तनेजा, डायरेक्टर गौरव राज बेहड़, मनोज मुंजाल, आशीष ग्रोवर आशू, महामंत्री गौरव तनेजा, कोषाध्यक्ष सचिन मुजाल, गुरशरण बब्बर शरणी, सुभाष तनेजा, राजकुमार कक्कड़, अमन गुम्बर और रान्नी आहूजा समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहे।


