*_महाराष्ट्र विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी विधेयक पास, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने किया समर्थन_*

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*_महाराष्ट्र विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी विधेयक पास, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने किया समर्थन_*
मुंबई: महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक, 2026 (धर्मांतरण विरोधी कानून) सोमवार को विधानसभा में पास हो गया. सत्ताधारी महायुति के साथ विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाड़ी (MVA) में शामिल शिवसेना (UBT) ने भी विधेयक का समर्थन किया. कांग्रेस, एनसीपी (SP), समाजवादी पार्टी और CPI (M) ने विधेयक का विरोध किया. अब यह विधेयक विधान परिषद में पेश किया जाएगा.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को विधानसभा में बिल पेश करते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून किसी खास धर्म के खिलाफ नहीं है. इसका उद्देश्य जबरन, लालच, धोखाधड़ी या धोखे से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है.
फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र ऐसा कानून बनाने वाला पहला राज्य नहीं है. ओडिशा, कर्नाटक, हरियाणा, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश समेत 12 राज्यों में पहले से ही ऐसे कानून लागू हैं. उन्होंने कहा, “यह विधेयक किसी खास धर्म के खिलाफ नहीं है. यह सभी धर्मों पर लागू होता है. इसका उद्देश्य जबरन, लालच, धोखाधड़ी या धोखे से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है.”
फडणवीस ने समझाया कि धर्म परिवर्तन से जुड़े विवाद – खासकर दूसरे धर्मों में शादी से जुड़े विवाद – अक्सर कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा करते हैं. उन्होंने कहा, “अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच होने वाले विवाद के मामलों में अक्सर झगड़े होते हैं और कभी-कभी कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बन जाती है. जब ऐसी स्थिति पैदा हो, तो उसे ठीक करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए.”
उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) जैसे मौजूदा क्रिमिनल कानूनों में गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन से निपटने के लिए खास नियम नहीं हैं. उन्होंने कहा, “अभी जो स्थिति है, उनमें मौजूदा कानूनों – चाहे वह BNS हो या दूसरे कानून – में इस मामले से निपटने के लिए स्पष्ट नियम नहीं हैं. इसलिए, हम धोखाधड़ी जैसे मौजूदा नियमों पर भरोसा करते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर विशेष नियम होंगे, तो गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन या दूसरे धर्मों में शादी से जुड़े विवाद नहीं होंगे. स्पष्टता सुनिश्चित करने और बार-बार कानून-व्यवस्था की दिक्कतों को रोकने के लिए यह विधेयक लाया गया है.”
मुख्यमंत्री फडवीस ने कहा कि यह कानून गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन को साफ तौर पर बताता है, जिसमें लालच, दबाव, धोखाधड़ी, गलत जानकारी या गलत प्रभाव डालकर किए गए धर्म परिवर्तन, साथ ही नाबालिगों से जुड़े मामले शामिल हैं.
ऐसे धर्म परिवर्तन में मदद करने वाले लोग या संगठन इस प्रस्तावित कानून के तहत सजा के हकदार होंगे. यह विधायक पुलिस को कथित गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के मामलों में खुद से कार्रवाई करने का भी अधिकार देता है.
वहीं, सदन में चर्चा के दौरान, शिवसेना (UBT) के विधायक भास्कर जाधव ने विधेयक का समर्थन किया और उसका स्वागत किया. साथ ही नोटिस से जुड़े इसके एक क्लॉज में सुधार का सुझाव दिया.
सदन के बाहर, शिवसेना (UBT) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि धर्म की आजादी सभी को मिलनी चाहिए, लेकिन जबरन या शोषण से किए गए धर्मांतरण का विरोध होना चाहिए. ठाकरे ने कहा, “अगर कोई जबरदस्ती या किसी की मजबूरी का फायदा उठाकर और उन्हें झूठा लालच देकर धर्मांतरण करा रहा है, तो हम इसके खिलाफ हैं. हम उस विधेयक का पूरा समर्थन करते हैं.”
विपक्ष ने की प्रस्तावित कानून की आलोचना
हालांकि, कांग्रेस, एनसीपी (SP) और समाजवादी पार्टी ने इस कानून का विरोध किया और मांग की कि इसे आगे की जांच और सार्वजनिक परामर्श के लिए दोनों सदनों की संयुक्त प्रवर समिति को भेजा जाए.
कई विपक्षी विधायकों ने विधेयक को असंवैधानिक बताया और सरकार पर एक खास समुदाय को निशाना बनाने और समाज में फूट डालने का आरोप लगाया. एनसीपी (SP) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि कानून का नाम ही गुमराह करने वाला है. उन्होंने कहा, “यह धर्म स्वतंत्रता (धर्म की आजादी) नहीं है; यह धर्म नियंत्रण है – धर्म को कंट्रोल करना है.”
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल और सपा विधायक अबू आजमी ने भी विधेयक को असंवैधानिक बताया, और धर्म बदलने की चाहत रखने वाले लोगों की सुरक्षा और निजता पर इसके असर को लेकर चिंता जताई.


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