*_राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लोग अंधकार की तरफ बढ़ रहे हैं : राहुल_*

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*_राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लोग अंधकार की तरफ बढ़ रहे हैं : राहुल_*
कोल्लम : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा समय में राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लोग अंधकार की ओर बढ़ रहे हैं और ज्ञान से दूर हो रहे हैं. लोकसभा में विपक्ष के नेता यह भी कहा कि चाहे राजनीति हो या अंतरराष्ट्रीय संबंध, दूसरे व्यक्ति को समझने की कोई कोशिश नहीं की जा रही और असहमति से मुकाबला करने के लिए हिंसा का सहारा लिया जा रहा है.
राहुल गांधी ने कहा, “आज हम अपनी राजनीति में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में देखते हैं कि हर कोई अंधकार की ओर भाग रहा है और ज्ञान से दूर जा रहा है. दूसरे व्यक्ति को समझने की कोई कोशिश नहीं की जाती है, आप बस उन्हें बम से उड़ा देते हैं और मार देते हैं.” उन्होंने आरोप लगाया, “हमारी राजनीति में भी ऐसा ही है. आप किसी से सहमत नहीं हैं, आप उस व्यक्ति पर हमला करते हैं या उनके प्रति हिंसक हो जाते हैं.”

राहुल गांधी यहां महात्मा गांधी और सुधारवादी संत श्रीनारायण गुरु के बीच हुई मुलाकात के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और नारायण गुरु दोनों ऐसी हिंसा के खिलाफ थे और लोगों के बीच प्यार, सम्मान, क्षमा और समझ की पैरोकारी करते थे.प्रतिपक्ष के नेता राहुल ने कहा, “महात्मा गांधी के अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष से मुझे शक्ति और बल में अंतर का एहसास हुआ.ब्रिटिश साम्राज्य के पास बल था, लेकिन शक्ति नहीं. गांधीजी के पास बल नहीं था, लेकिन उनके पास सत्य था, इसलिए उनके पास शक्ति थी. उसी तरह, नारायण गुरुजी के पास बल नहीं था, उनके पास अपार धन-दौलत नहीं थी, वे आलीशान गाड़ी में नहीं घूमते थे, फिर भी वे अपने समय में केरल के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति थे.”
राहुल ने कहा, “कल्पना कीजिए कि सौ साल बाद केरल का पूरा राजनीतिक वर्ग उन्हें श्रद्धांजलि देने आया है.” उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी और नारायण गुरु ने हिंसा और घृणा का प्रयोग करने वालों को यह संदेश दिया है कि इससे कुछ भी हासिल नहीं होता, केवल हानि ही होती है.उन्होंने कहा, “भारत में राजनीतिक लड़ाई भी बहुत समान है. एक तरफ सत्य, अहिंसा, विनम्रता है और दूसरी तरफ क्रोध, हिंसा, घृणा और अहंकार है. हिंसा और क्रोध वाले लोगों के पास बल हो सकता है, लेकिन उनके पास कोई शक्ति नहीं है क्योंकि नारायण गुरुजी और महात्मा गांधी जी जैसे लोगों की भावना और वास्तव में, भारत की भावना मूल रूप से सत्य और अहिंसा के विचार पर आधारित है.’’


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