*अंगद के समझाने पर भी नहीं माना रावण, युद्ध का हुआ ऐलान* *मेघनाद की शक्ति से मूर्छित हुए लक्ष्मण, संजीवनी बूटी लाकर हनुमान ने बचाए प्राण*

*अंगद के समझाने पर भी नहीं माना रावण, युद्ध का हुआ ऐलान*

 

*मेघनाद की शक्ति से मूर्छित हुए लक्ष्मण, संजीवनी बूटी लाकर हनुमान ने बचाए प्राण*

 

रुद्रपुर। श्री शिव नाटक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला के बारहवें दिन अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और संजीवनी बूटी प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से रूबरू कराया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व सांसद बलराज पासी, समाजसेवी रमेश अरोरा, राजू अरोरा, अंकित अरोरा तथा सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष महेश बब्बर, महामंत्री विजय जग्गा, ओमप्रकाश अरोरा, बोबी अरोरा, राकेश सुखीजा, दीपक अरोरा और कृष्ण लाल नारंग ने संयुक्त रूप से विधिवत पूजन एवं दीप प्रज्वलित कर किया।

 

इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी भारत भूषण चुघ ने भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपने संपूर्ण जीवन में मर्यादाओं का पालन किया और सदैव आदर्शों के अनुरूप आचरण किया। उन्होंने कहा कि रामलीला के मंचन की सार्थकता तभी है, जब हम भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही एक उत्तम जीवन जिया जा सकता है। उन्होंने श्री शिव नाटक क्लब को भव्य आयोजन के लिए बधाई दी।

 

समाजसेवी रमेश अरोरा ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि श्री शिव नाटक क्लब ने छोटे स्तर से शुरुआत कर रामलीला को भव्य स्वरूप तक पहुंचाया है। वहीं, सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष महेश बब्बर ने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों का अनुसरण कर समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है। अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखना सभी का दायित्व है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे प्रेरणा ले सकें।

 

इस दौरान क्लब के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों को अंगवस्त्र पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

 

अंगद के समझाने पर भी अहंकार में अड़ा रहा रावण

 

रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम के दूत अंगद अंतिम बार रावण को समझाने के लिए उसके दरबार में पहुंचते हैं। अंगद रावण को अहंकार त्यागकर माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाने और युद्ध टालने की सलाह देते हैं, लेकिन रावण उनकी बात मानने से इनकार कर देता है। इसके बाद अंगद दरबार में अपना पैर जमा देते हैं। रावण के दरबार में मौजूद कोई भी योद्धा उनका पैर नहीं हिला पाता। अंततः अंगद युद्ध की चुनौती देकर लौट जाते हैं।

 

इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के बीच भीषण युद्ध का मंचन किया गया। युद्ध के दौरान मेघनाद शक्ति का प्रयोग करता है, जिससे लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। लक्ष्मण की यह दशा देखकर भगवान श्रीराम व्याकुल हो उठते हैं। इसके बाद हनुमान जी सुषेण वैद्य को लेकर आते हैं। सुषेण वैद्य के निर्देश पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने गंधमादन पर्वत की ओर जाते हैं। बूटी की पहचान नहीं होने पर वे पूरा पर्वत ही उठाकर ले आते हैं। इसके बाद सुषेण वैद्य लक्ष्मण का उपचार करते हैं और उन्हें नया जीवन मिलता है। इस प्रसंग के मंचन पर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।

 

कलाकारों ने निभाईं महत्वपूर्ण भूमिकाएं

 

रामलीला में रावण की भूमिका अतुल बांगा, अंगद की दिव्यम घई, मेघनाद की गर्व गुलाटी, कुंभकरण की केशव नारंग, श्रीराम की अभिनव अनेजा, लक्ष्मण की रवि कक्कड़, सुग्रीव की विशान्त भसीन, हनुमान की सन्नी कक्कड़, विभीषण की विशाल गुंबर, सुषेण वैद्य की भारत हुडिया और मंत्री की तनीष सीकरी ने निभाई। मंच संचालन जॉली कक्कड़ ने किया।

 

आज होगा कुंभकरण और मेघनाद वध का मंचन

 

श्री शिव नाटक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला में आज मेघनाद का अभिनंदन, कुंभकरण-विभीषण संवाद, कुंभकरण वध, मेघनाद-सुलोचना संवाद, मेघनाद-रावण संवाद, अंतिम विदाई और मेघनाद वध तक की लीलाओं का मंचन किया जाएगा।

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