*हनुमान ने जलाई सोने की लंका, रावण ने विभीषण को किया निष्कासित*
*रावण-हनुमान के बीच हुआ तीखा संवाद, श्रीराम की शरण में पहुंचे विभीषण*
रुद्रपुर। श्री शिव नाटक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला मंचन के 11वें दिन अशोक वाटिका उजाड़ने के बाद हनुमान और रावण के बीच तीखे संवाद, सोने की लंका दहन तथा विभीषण के निष्कासन की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ टाटा स्टील्स के उत्तराखंड हेड बीएस चोमवाल और समाजसेवी एवं गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा के पूर्व प्रधान सरदार जसविंदर सिंह खरबंदा ‘लकी’ ने संयुक्त रूप से पूजन एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर आशू मिद्धा, शेखर जुयाल, सौरभ सिंह और टीवी-100 के चीफ एडिटर संदीप कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस दौरान सरदार जसविंदर सिंह खरबंदा ने कहा कि प्रभु श्रीराम के नाम से जीवन की सभी बाधाएं दूर करने की प्रेरणा मिलती है। रामलीला का अवलोकन व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और श्रेष्ठ आचरण अपनाने का संदेश देता है। उन्होंने सभी से प्रभु का सिमरन करने और उनकी इच्छा में प्रसन्न रहने का आह्वान किया।
वहीं, बीएस चोमवाल ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने संपूर्ण जीवन में मर्यादा और आदर्शों का पालन किया, इसी कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनके आदर्शों को अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।
श्री शिव नाटक क्लब के पदाधिकारियों ने अतिथियों को अंगवस्त्र पहनाकर तथा स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
हनुमान-रावण संवाद ने बांधा समां
रामलीला के मंचन में मेघनाद हनुमान को ब्रह्मास्त्र के बंधन में बांधकर रावण के दरबार में लेकर पहुंचता है। यहां रावण और हनुमान के बीच तीखा संवाद होता है। रावण हनुमान को दंडित करने के लिए उनके वध का प्रयास करता है, लेकिन विभीषण इसका विरोध करते हुए कहते हैं कि दूत का वध करना राजनीति और धर्म की मर्यादा के विरुद्ध है।
इसके बाद रावण के आदेश पर हनुमान की पूंछ में आग लगा दी जाती है। हनुमान अपनी बुद्धिमत्ता और पराक्रम से पूरी लंका में आग लगा देते हैं। लंका दहन से क्रोधित रावण अपने भाई विभीषण को राज्य से निष्कासित कर देता है। इसके बाद विभीषण भगवान श्रीराम की शरण में पहुंचते हैं, जहां श्रीराम उन्हें शरण देकर लंका का राजा घोषित करते हैं। उधर, रावण अपने भाई कुंभकरण के पास पहुंचकर उसे युद्ध की परिस्थितियों से अवगत कराता है।
रामलीला में रावण की भूमिका अतुल बांगा, हनुमान की सन्नी कक्कड़, मेघनाद की चेतन खनिजो, विभीषण की विशाल गुंबर और कुंभकरण की भूमिका केशव नारंग ने निभाई। मंत्री की भूमिका में भारत हुड़िया और पंकज कालरा रहे। मंच संचालन जॉली कक्कड़ ने किया।
आज होगा लक्ष्मण शक्ति और संजीवनी बूटी का मंचन
श्री शिव नाटक क्लब की ओर से आगामी मंचन में रावण-अंगद संवाद, युद्ध की घोषणा, मेघनाद-लक्ष्मण युद्ध, मेघनाद द्वारा शक्ति प्रयोग, लक्ष्मण के मूर्छित होने तथा हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी लाने की लीला का मंचन किया जाएगा।


