होली चाइल्ड स्कूल में स्टीम शिक्षा व बाल व्यवहार प्रबंधन पर कार्यशाला
आधुनिक शिक्षण तकनीकों से रूबरू हुए होली चाइल्ड स्कूल के शिक्षक
स्टीम शिक्षा से विद्यार्थियों में बढ़ेगी रचनात्मकता और तार्किक सोच
बाल व्यवहार प्रबंधन की प्रभावी तकनीकों से शिक्षकों को किया गया प्रशिक्षित
स्टीम शिक्षा के एकीकरण पर रिसोर्स पर्सन अविनाश कुमार ने साझा किए अनुभव
आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने पर होली चाइल्ड स्कूल में मंथन
शिक्षकों को गतिविधि पत्रक और व्यवहार प्रबंधन चेकलिस्ट भी की गई उपलब्ध
प्रशिक्षण कार्यक्रमों से शिक्षण गुणवत्ता और विद्यार्थियों का सीखने का स्तर होगा बेहतर
रुद्रपुर। होली चाइल्ड स्कूल में शिक्षकों के शिक्षण कौशल को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से “स्टीम (S.T.E.A.M.) शिक्षा का एकीकरण एवं बाल व्यवहार प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का संचालन गुडलक पब्लिशर्स के रिसोर्स पर्सन अविनाश कुमार (एमए मनोविज्ञान, बीई मैकेनिकल इंजीनियरिंग) ने किया। इस दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य मिंटू दुबे, उप-प्रधानाचार्य (प्रशासन) प्रदीप जोशी, उप-प्रधानाचार्य (शैक्षणिक) मंजू अधिकारी सहित सभी शिक्षक उपस्थित रहे।
कार्यशाला में अविनाश कुमार ने स्टीम शिक्षा की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला और गणित का समन्वय विद्यार्थियों में रचनात्मकता, तार्किक सोच, सहयोग की भावना तथा समस्या समाधान क्षमता विकसित करता है। उन्होंने गतिविधि-आधारित शिक्षण, कम लागत वाले प्रयोगों और वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से कक्षा शिक्षण को अधिक रोचक एवं प्रभावी बनाने के उपाय बताए।
उन्होंने बाल व्यवहार प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए सकारात्मक सुदृढ़ीकरण, बाल मनोविज्ञान और छात्र सहभागिता पर आधारित व्यवहारिक तकनीकों की जानकारी दी। कार्यशाला के अंत में शिक्षकों को गतिविधि पत्रक एवं व्यवहार प्रबंधन चेकलिस्ट भी उपलब्ध कराई गई।
प्रधानाचार्य मिंटू दुबे ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने के साथ-साथ विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और कक्षा अनुशासन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने रिसोर्स पर्सन अविनाश कुमार का आभार व्यक्त किया।







