अमेरिका-ईरान वार्ता विफल, कच्चे तेल में उथल-पुथल; भारत की बढ़ीं चिंताएं
नई दिल्ली, 12 अप्रैल। अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे चली बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, जिससे मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
वार्ता विफल होने की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। फिलहाल डब्ल्यूटीआई क्रूड 96.57 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 95.20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर भी पड़ेगा।
भारत पर बढ़ेगा दबाव
दुनिया के प्रमुख तेल आयातकों में शामिल भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। देश अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल पर सीधा असर पड़ेगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि होने पर भारत का सालाना आयात बिल 13 से 14 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 1.30 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित तनाव से आपूर्ति बाधित होने का खतरा भी बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहने पर महंगाई, परिवहन लागत और घरेलू बाजार पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।







