रुद्रपुर में आशा वर्कर्स का जोरदार प्रदर्शन, चार श्रम संहिताएं वापस लेने की मांग

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मजदूर अधिकारों पर हमले का आरोप, आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन सड़कों पर उतरी

विभिन्न ब्लॉकों से पहुंचीं आशा कार्यकर्ता, श्रम कोड वापसी को लेकर एकजुटता दिखाई

सरकारी कर्मचारी का दर्जा व न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर आशाओं का जुलूस

रुद्रपुर, 12 फरवरी। राष्ट्रव्यापी श्रमिक हड़ताल के आह्वान पर ट्रेड यूनियन ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने मजदूर अधिकारों पर हमले का आरोप लगाते हुए चार श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। आशा कार्यकर्ता गल्ला मंडी में एकत्र हुईं, जहां संक्षिप्त सभा के बाद गांधी पार्क तक जुलूस निकालकर सामूहिक प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित करने, नियमित वेतन देने तथा न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग जोरदार ढंग से उठाई। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि आशाओं का शोषण बंद कर उन्हें पक्की नौकरी, सम्मानजनक व्यवहार और सामाजिक सुरक्षा दी जानी चाहिए।

सभा को संबोधित करते हुए ऐक्टू की जिला सचिव अनीता अन्ना ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूरों और महिला कामगारों के अधिकारों पर हमला हैं। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर्स की स्थिति सबसे अधिक खराब है, उन्हें श्रमिक का दर्जा तक नहीं दिया जाता, जबकि उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जाता है। उन्होंने बताया कि शिशु मृत्यु दर कम करने और गर्भवती महिलाओं की देखभाल में आशाओं की अहम भूमिका है, इसके बावजूद उन्हें केवल नाममात्र की प्रोत्साहन राशि और योजनाओं का कमीशन मिलता है।

प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप ने चार श्रम कोड वापस लेने, आशा वर्कर्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन 35 हजार रुपये निर्धारित करने, सेवानिवृत्ति पर पेंशन, अस्पतालों में सम्मानजनक व्यवहार, प्रशिक्षण स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराए जाने तथा प्रशिक्षण अवधि में प्रतिदिन न्यूनतम 500 रुपये भुगतान की मांग की। उन्होंने सभी बकाया राशि का भुगतान और हर माह समय पर मानदेय खाते में भेजने की मांग भी रखी।

यूनियन की जिला अध्यक्ष ममता पानू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार आशा वर्कर्स को कर्मचारी का दर्जा और न्यूनतम वेतन न देकर उनका आर्थिक शोषण कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट घटने से आशाओं की स्थिति और खराब हुई है। उन्होंने कहा कि खटीमा में आशा यूनियन से किए गए वादों को लागू किया जाए तथा नियमित वेतन, पक्की नौकरी और सम्मान से कम कुछ भी स्वीकार नहीं होगा।

प्रदर्शन में गदरपुर, काशीपुर, जसपुर, सितारगंज, किच्छा, बाजपुर और खटीमा ब्लॉकों से बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता शामिल हुईं। इस दौरान विभिन्न ब्लॉकों की पदाधिकारियों सहित सैकड़ों आशाओं ने भाग लेकर मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई।


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