सांसद अजय भट्ट ने संसद में उठाया साइबर अपराध का मुद्दा, केंद्र सरकार ने बताए ठोस कदम
केंद्र सरकार ने साइबर सुरक्षा पर गिनाए ठोस कदम
राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल से शिकायत दर्ज करना आसान
24.65 लाख शिकायतों में 8690 करोड़ रुपये बचाए गए
1930 हेल्पलाइन से मिल रही त्वरित सहायता
साइबर धोखाधड़ी रोकने को CFCFRMS प्रणाली कारगर
नई दिल्ली। नैनीताल-उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद अजय भट्ट ने संसद में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से देश में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री से पिछले तीन वर्षों में साइबर अपराधों का राज्यवार ब्यौरा, प्रतिशत वृद्धि तथा ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित बनाने और साइबर अपराध से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी।
सांसद के प्रश्न के उत्तर में गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने बताया कि देश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने साइबर अपराधों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) की स्थापना की गई है, जो देशभर में साइबर अपराधों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करता है।
जनता को साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने के लिए ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (https://cybercrime.gov.in�) शुरू किया गया है। इस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों पर संबंधित राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां कार्रवाई करती हैं।
वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए वर्ष 2021 में ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली’ (CFCFRMS) शुरू की गई। 31 जनवरी 2026 तक इस प्रणाली के माध्यम से 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में 8,690 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को बचाया जा चुका है। साथ ही, शिकायत दर्ज कराने में सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 भी शुरू किया गया है।
सरकार ने 2 जनवरी 2026 को एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की है, जिससे शिकायतों के निपटान में एकरूपता और पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
साइबर जागरूकता के क्षेत्र में भी केंद्र सरकार ने व्यापक अभियान चलाए हैं। प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में डिजिटल गिरफ्तारी जैसे मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के साथ ही आकाशवाणी, दूरदर्शन, सोशल मीडिया, कॉलर ट्यून, टीवी, रेडियो, स्कूल और सिनेमा हॉल के माध्यम से अभियान चलाए गए हैं।
इसके अलावा ‘साइबर दोस्त’ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, आईपीएल, कुंभ मेला 2025, सूरजकुंड मेला 2025, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों और विभिन्न जनसंचार माध्यमों के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
केंद्र सरकार का कहना है कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ आम जनता में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक







