पूर्व प्रधानमंत्रियों के साहसिक निर्णयों से लेनी चाहिए प्रेरणा : डॉ. गणेश उपाध्याय
देहरादून। डॉ. गणेश उपाध्याय ने कहा है कि भारत का इतिहास स्वतंत्र और निडर निर्णयों की परंपरा से भरा रहा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत ने अपने पड़ोसी देश की आजादी के लिए निर्णायक भूमिका निभाई थी। उस समय अमेरिका द्वारा सातवां बेड़ा को पाकिस्तान के समर्थन में भेजे जाने के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकना देश को स्वीकार नहीं है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि इसी प्रकार पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी दृढ़ नेतृत्व का परिचय दिया था। उन्होंने एक अमेरिकी विमान के बिना अनुमति भारतीय सीमा में प्रवेश करने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उसे मुंबई एयरपोर्ट पर उतरने की अनुमति दी और स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपने फैसले स्वयं लेने में सक्षम है।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को “विश्व गुरु” बनाने की बात करते हैं और वैश्विक मंचों पर देश की आवाज बुलंद कर रहे हैं, तब यह आवश्यक है कि हम अपने पूर्व प्रधानमंत्रियों की तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और साहसिक निर्णय लेने की परंपरा को मजबूत बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता सर्वोपरि है और किसी भी परिस्थिति में देश को अपने राष्ट्रीय हितों के निर्णय लेने में अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।







