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उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ का द्वादश द्विवार्षिक महाधिवेशन सम्पन्न
मुख्यमंत्री के समक्ष 27 सूत्रीय मांग-पत्र प्रस्तुत
देहरादून।
उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ का द्वादश द्विवार्षिक महाधिवेशन भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। महाधिवेशन के खुले सत्र की अध्यक्षता महासंघ के प्रान्तीय अध्यक्ष इं० एस.एस. चौहान ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, अति विशिष्ट अतिथि मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन तथा विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री के सचिव श्री शैलेश बगोली उपस्थित रहे।
महाधिवेशन में प्रदेशभर से आए डिप्लोमा इंजीनियर्स, विभिन्न घटक संघों के पदाधिकारी, कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि एवं पत्रकार मौजूद रहे। महासंघ की ओर से सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर महासंघ ने मुख्यमंत्री के समक्ष डिप्लोमा इंजीनियर्स से जुड़ी समस्याओं और मांगों को लेकर 27 सूत्रीय मांग-पत्र प्रस्तुत किया। महासंघ ने कहा कि डिप्लोमा इंजीनियर्स राज्य के विकास में रीढ़ की भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन वेतन विसंगतियों, पदोन्नति में ठहराव और सेवा शर्तों की समस्याओं के कारण उन्हें लंबे समय से संघर्ष करना पड़ रहा है।
महासंघ ने प्रमुख रूप से कनिष्ठ अभियन्ताओं की वेतन विसंगति दूर करने, न्यूनतम तीन पदोन्नति अथवा एसीपी/एमएसीपी लाभ, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, पेयजल निगम व जल संस्थान के एकीकरण, ऊर्जा निगमों में पदोन्नति प्रतिशत बढ़ाने, प्रभारी सहायक अभियन्ताओं को सेवानिवृत्ति से पूर्व एकमुश्त पदोन्नति, तथा अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों व आपदा कार्यों में लगे अभियन्ताओं के लिए 2 करोड़ रुपये तक की सामूहिक दुर्घटना बीमा सुविधा की मांग की।
इसके साथ ही ई-एस्टिमेट व ई-फाइलिंग के लिए लैपटॉप/कम्प्यूटर उपलब्ध कराने, गुणवत्ता नियंत्रण हेतु प्रयोगशालाओं व प्रशिक्षण, गैर-तकनीकी कार्यों में अभियन्ताओं की ड्यूटी न लगाने, स्थानान्तरण अधिनियम में संशोधन, फील्ड स्टाफ की नियुक्ति, तथा तकनीकी कार्यों में राजनीतिक व प्रशासनिक हस्तक्षेप रोकने की भी मांग उठाई गई।
महाधिवेशन के दौरान संघर्ष समिति एवं अनुशासन समिति का गठन भी किया गया। संघर्ष समिति का अध्यक्ष इं० गोविन्द बल्लभ भट्ट (लोक निर्माण विभाग) को बनाया गया।
महासंघ ने मुख्यमंत्री से सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया।






