*_आतंकी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर खेल रहा था धर्मांतरण का खेल! यूपी से उत्तराखंड तक अयान जावेद का जाल_*
रांची: प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) के झारखंड मॉड्यूल से जुड़े मुख्य संदिग्ध अयान जावेद को बड़े पैमाने पर धर्मांतरण की साजिश में लिप्त पाया गया है. अयान जावेद को उसके पांच साथियों के साथ झारखंड एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने गिरफ्तार किया था. अब यह खुलासा हुआ है कि अयान पर न केवल आगरा में, बल्कि देहरादून में भी उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज है. जांच एजेंसियां अब उसकी पत्नी शबनम परवीन से भी पूछताछ कर सकती हैं.
यह पूरी घटनाक्रम सबसे पहले आगरा से जुड़ा हुआ है. आगरा में सगी बहनों के धर्मांतरण के चर्चित मामले की जांच के दौरान एजेंसियों को पता चला कि इसके पीछे अयान जावेद नाम का व्यक्ति मुख्य साजिशकर्ता है. उत्तर प्रदेश पुलिस और अन्य जांच टीमों ने सक्रियता दिखाई तो उन्हें जानकारी मिली कि अयान जावेद को झारखंड एटीएस ने 2025 में ही धनबाद के वासेपुर इलाके से आतंकी कनेक्शन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद यूपी पुलिस की एक टीम रांची पहुंची और अयान जावेद को रिमांड पर लेकर पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई.
झारखंड एटीएस को देहरादून पुलिस का मिला पत्र
आगरा में अयान से पूछताछ चल ही रही थी कि झारखंड एटीएस को देहरादून पुलिस का एक पत्र मिला. इस पत्र में बताया गया कि देहरादून के रानी पोखरी थाने में कांड संख्या 58/2025 के तहत उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2018 की धारा 3/5 तथा बीएनएस की धारा 111(3), 114(4), 61(2) के तहत अयान जावेद वांछित है. पत्र में अनुरोध किया गया था कि देहरादून से भेजे गए विशेष वाहक एएसआई विजेंद्र सिंह को अयान से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं. इस पत्र के बाद झारखंड एटीएस ने देहरादून पुलिस को सभी आवश्यक जानकारियां और दस्तावेज उपलब्ध करा दिए.
झारखंड एटीएस के एसपी ऋषभ झा ने बताया कि अयान जावेद को आगरा पुलिस रिमांड पर ले चुकी है और देहरादून पुलिस ने भी उसके संबंध में जानकारी मांगी थी, जिसे उपलब्ध करवा दिया गया है. सूत्रों के अनुसार, देहरादून पुलिस भी जल्द ही अयान को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी.
गजवा-ए-हिंद और धर्मांतरण गिरोह से जुड़ाव
धनबाद के वासेपुर इलाके के रहने वाले अयान जावेद और उसकी पत्नी शबनम परवीन सहित पांच लोगों को झारखंड एटीएस ने हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल के संचालन के आरोप में गिरफ्तार किया था. लेकिन जांच में पता चला कि अयान कम उम्र से ही ‘गजवा-ए-हिंद’ और धर्मांतरण गिरोह से जुड़ा हुआ था. केंद्रीय एजेंसियों के अनुसार, आगरा और देहरादून के धर्मांतरण मामलों में अयान की संलिप्तता सामने आई है. पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस गिरोह में 200 से अधिक लोग सक्रिय हैं, जो विशेष रूप से लड़कियों को निशाना बनाकर धर्मांतरण कराने में लगे हुए हैं.
कट्टरता से भरी महिला शबनम परवीन संदिग्ध
झारखंड में हिज्ब-उत-तहरीर के मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद वासेपुर में हड़कंप मच गया था. एटीएस ने पहली बार झारखंड से एक महिला संदिग्ध शबनम परवीन (20 वर्ष) को गिरफ्तार किया. शबनम अयान जावेद की पत्नी है और जांच में पता चला कि धर्मांतरण को लेकर वह सबसे अधिक सक्रिय थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार, शबनम के मोबाइल की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.
शबनम के मोबाइल में कई ऐसे तथ्य पाए गए हैं जो बेहद आपत्तिजनक थे. शबनम के मोबाइल से यह जानकारी मिली थी कि वह लगातार अपने आसपास के लोगों को भी जिहाद के लिए भड़का रही थी यहां तक की अपने पति और बाकी गिरफ्तार संदिग्धों को उसी ने भड़काया था. शबनम के मोबाइल पर देश विरोध मैसेज भी मिले थे. एटीएस शबनम के मोबाइल पर मैसेज भेजने वालों के बारे में जानकारी इक्ट्ठा कर ही रही थी ,साथ ही उसके दूसरे राज्यों या फिर विरोधी कनेक्शन के बारे में भी जानकारी जुटा रही थी तभी गजवा हिन्द धर्मातंरण वाले मामले का खुलासा हुआ और आईबी सहित कई राज्यो की पुलिस आयान को लेकर एक्टिव हो गई.
एटीएस की जांच में शबनम के मोबाइल से देश विरोधी मैसेज और कनेक्शन मिले, जिसके बाद आईबी और अन्य राज्यों की पुलिस सक्रिय हुई. फिलहाल शबनम जेल में बंद है और उसे खतरनाक माना जा रहा है. केंद्रीय एजेंसियां जल्द ही उसे रिमांड पर ले सकती हैं.
धनबाद रेड, देश विरोधी सामग्री और डार्क नेट का इस्तेमाल
26 अप्रैल 2025 को झारखंड एटीएस ने धनबाद के वासेपुर में रेड की थी. इस रेड में भारी मात्रा में देश विरोधी आर्टिकल्स, किताबें और डिजिटल सामग्री बरामद हुई. लैपटॉप से जांच में पता चला कि आरोपी डार्क नेट के माध्यम से पिछले एक साल से देश-विदेश के एजेंटों से संपर्क में थे. बरामद किताबों में ‘इस्लामिक जिहाद कैसे करें’, ‘काफिर कौन हैं’ और ‘काफिरों पर हमला कैसे करें’ जैसे विवादित कंटेंट थे.
एटीएस ने हिज्ब उत ताहिर संगठन से जुड़े जिन संदिग्धों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, उनमें धर्म के प्रति कट्टरता भरी हुई थी. उनके घर से मिले दस्तावेज यह बता रहे हैं कि वे किसी भी मसले में वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के पक्षधर नहीं थे. धार्मिक मामले में सरकार के प्रति विरोध जताने के लिए वे लोगों को उग्र प्रदर्शन करने के लिए उकसाते थे, ताकि उनके संगठन का मकसद पूरा हो सके. एटीएस को जांच में यह पता लगा है कि धर्म के मामले में वासेपुर अली नगर निवासी गुलफाम हसन और भूली निवासी आयान जावेद में सबसे अधिक कट्टर थे. दोनों संदिग्ध 15 से 20 वर्ष के युवाओं का ब्रेनवाश करते थे.उन्हें देश की मौजूदा हालत के बारे में बताते और उन्हें देश विरोधी कार्य करने पर उकसाते थे. इस काम के लिए शबनम सबसे ज्यादा उन्हें प्रेशर देती थी.
एटीएस ने पाया कि आरोपी भारतीय संविधान में विश्वास नहीं रखते थे और धार्मिक मामलों में हिंसक प्रदर्शन को बढ़ावा देते थे. वे 15-20 वर्ष के युवाओं का ब्रेनवॉश करते थे और उन्हें देश विरोधी कार्यों के लिए उकसाते थे. शबनम इस काम में सबसे अधिक दबाव डालती थी.
अयान जावेद की शादी पर परिवार का विरोध
जांच में सामने आया कि अयान जावेद की शादी शबनम परवीन से हुई थी, लेकिन उसके परिवार वाले इस रिश्ते से खुश नहीं थे. परिवार को शबनम की देश विरोधी गतिविधियों की जानकारी थी, इसलिए वे इसका विरोध करते थे. परिवार के विरोध के बावजूद अयान ने शादी कर ली.
चार्जशीट दायर कर चुकी है एटीएस
झारखंड पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस)के द्वारा प्रतिबंधित संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) से जुड़े झारखंड मॉड्यूल के खिलाफ रांची स्थित विशेष एटीएस अदालत में विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर चुकी है. चार्जशीट में कई चौकाने वाले खुलासे हुए, जिसमे यह बताया गया कि इस मॉड्यूल का मुख्य उदेश्य देश मे धर्म के नाम पर हिंसा फैलाना ही था.
भारतीय संविधान पर भरोसा नहीं
झारखंड के धनबाद जिले में फल फूल रहे हिज्ब-उत तहरीर के पांच संदिग्ध आतंकियों को भारतीय संविधान में भरोसा नहीं था, वह सभी मिलकर भारत में धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने की साजिश रच रहे थे. इस साजिश का खुलासा झारखंड पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने अदालत में दायर अपने चार्जशीट में किया है. एटीएस ने अदालत को बताया है कि गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में युवाओं को आतंकी विचारधारा अपने के लिए प्रेरित कर रहे थे.
चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे
झारखंड एटीएस ने रांची की विशेष एटीएस अदालत में हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल के खिलाफ विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है. चार्जशीट में बताया गया कि इस मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य देश में धर्म के नाम पर हिंसा फैलाना था. गिरफ्तार संदिग्धों में भारतीय संविधान पर भरोसा नहीं था और वे युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़कर अस्थिरता फैलाने की साजिश रच रहे थे.
26 अप्रैल 2025 को दर्ज एफआईआर में पांचों अभियुक्तों के खिलाफ देश-विरोधी गतिविधियां, अवैध हथियार रखना और धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
पांचों आरोपियों की भूमिका
गुलफाम हसन: चार्जशीट में एटीएस ने बताया है कि 21 वर्षीय गुलफाम हसन ने हिज्ब-उत-तहरीर से जुड़े होने के साथ-साथ देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की बात स्वीकार की है. उसके पास से अवैध पिस्तौल बरामद की गई थी. उसके पास से बरामद दस्तावेज़ों का हिंदी अनुवाद करवाया गया, जिसमें धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने वाली भड़काऊ सामग्री तथा भारत के संविधान को न मानने वाले तथ्य पाए गए.
अयान जावेद: चार्जशीट के अनुसार, 21 वर्षीय अयान जावेद ने भी आतंकी संगठन से जुड़ाव और देश-विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता स्वीकार की है. उसके पास से भी एक पिस्तौल बरामद हुई थी. अभियुक्त के मोबाइल डिवाइस के कॉल डिटेल रिकॉर्ड से हथियार खरीदने की बात सामने आई है.
मो. शहजाद आलम: तीसरा आरोपी शहजाद आलम मात्र 20 वर्ष का है. जांच में उसके हिज्ब-उत-तहरीर से जुड़े होने की पुष्टि हुई है. उसके पास से धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने और संविधान को नकारने वाले तत्व मिले हैं.
शबनम परवीन: चौथी आरोपी शबनम परवीन ने अपने पति अयान जावेद के लिए हथियार खरीदने और एकत्रित करने में सहायता करने तथा आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने की बात स्वीकार की है. उसके पास से बरामद दस्तावेज़ों से देश-विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता की पुष्टि हुई है.
मोहम्मद अम्मार यासिर: पांचवें आरोपी मोहम्मद अम्मार यासिर की उम्र 33 वर्ष है. यासिर पूर्व में प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य रह चुका है और देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण गिरफ्तार हो चुका था. सीडीआर और टावर लोकेशन जांच से पता चला है कि घटना से पहले और बाद में वह सभी अभियुक्तों के साथ लगातार संपर्क में था.
आरोपियों में अयान जावेद, गुलफाम हसन, मो. शहजाद आलम, शबनम परवीन और अममार यासर उर्फ समीक शामिल हैं. एटीएस ने अदालत को बताया है कि सभी आरोपियों ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है. उनके पास से अवैध देशी पिस्तौल, कारतूस, मोबाइल फोन, लैपटॉप एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं. जांच में पाया गया है कि ये लोग प्रतिबंधित संगठन “हिज्ब-उत-तहरीर” (HuT) से जुड़े थे और देश की शांति-व्यवस्था भंग करने की साजिश रच रहे थे. कॉल रिकॉर्ड, लिंग्विस्टिक विश्लेषण और अन्य रिपोर्टों से भी उनकी संलिप्तता की पुष्टि हुई है. सीडीआर से पता चला है कि अभियुक्त एक-दूसरे से लगातार संपर्क में थे तथा हथियार खरीदने और बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे. एटीएस ने अपनी चार्जशीट में पाँचों आरोपियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी है.
अम्मार यासिर सबसे खतरनाक संदिग्ध
धनबाद के वासेपुर से गिरफ्तार हिज्ब-उत-तहरीर के पांच संदिग्धों में अम्मार यासिर की गिरफ्तारी सबसे महत्वपूर्ण है. उसका इंडियन मुजाहिदीन से गहरा संबंध रहा है. साल 2014 में राजस्थान के जोधपुर से उसे इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकी के रूप में गिरफ्तार किया गया था. वह लगभग 10 वर्ष जेल में रहा और मई 2024 में जमानत पर बाहर आया. जेल से रिहा होने के बाद वह फिर से आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया और हिज्ब-उत-तहरीर से जुड़ गया. इस बार उसे धनबाद के वासेपुर से ही गिरफ्तार किया गया, जिसमें महिला संदिग्ध शबनम परवीन की निशानदेही महत्वपूर्ण रही. जेल से निकलने के बाद वह अपने गृह क्षेत्र में आकर शबनम से जुड़ा.
हिज्ब-उत-तहरीर संगठन का इतिहास
हिज्ब-उत-तहरीर का गठन 1953 में यरुशलम में हुआ था. इसका मकसद विश्व में खलीफा (इस्लामिक स्टेट) की स्थापना करना है. 2010 में भारत सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया. संगठन युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर विभिन्न आतंकी समूहों में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है. यह लोकतांत्रिक सरकारों को उखाड़ फेंककर इस्लामी राष्ट्र स्थापित करने का लक्ष्य रखता है.







