*_संसद बजट सत्र: भाजपा और कांग्रेस ने जारी किया व्हिप, स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने के आसार_*
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च सोमवार से शुरू हो रहा है, जो 2 अप्रैल तक चलेगा. पहले चरण में राहुल गांधी के पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’ पर दिए गए बयानों से भारी हंगामा हुआ था.
विपक्षी सांसदों ने कागज फाड़कर स्पीकर की कुर्सी की ओर फेंके, जिसके बाद 8 विपक्षी सांसदों (7 कांग्रेस, 1 सीपीआई(एम)) को बाकी सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था. अब दूसरे चरण में भी विपक्ष सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है,जिसमें मुख्य एजेंडा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव यानी नो-कॉन्फिडेंस मोशन है जिस पर विपक्ष सभी विपक्षी पार्टियों को एकसाथ लाने की कोशिश कर रही है.
जबकि सरकार इस कोशिश में है कि नो कॉन्फिडेंस मोशन पर विपक्ष को कम से कम पार्टियों का साथ मिल पाए. सोमवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे भाग में भी विपक्ष का हंगामा बरकरार रहने की उम्मीद है. वहीं कांग्रेस की तरफ से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए नो कॉन्फिडेंस मोशन पर पर भी सोमवार को चर्चा होने की संभावना है. यदि देखें तो इस बार के सत्र में मुख्य एजेंडा कुछ इस तरह हैं:
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव जिसे 9 मार्च को लोकसभा में सबसे पहले यह प्रस्ताव पेश किया जाना है विपक्ष जिसमें मुख्य रूप से कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने ने 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर के साथ ये नोटिस दिया है. जिसमें लगाए गए आरोप कुछ इस तरह है:
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जाना
महिला विपक्षी सांसदों पर ट्रेजरी बेंच से आधारहीन आरोप लगाना
सत्ता पक्ष के सांसदों को आपत्तिजनक व्यवहार के लिए नहीं टोकना
8 सांसदों का अनुचित और पूरे सत्र का निलंबन
स्पीकर का पक्षपातपूर्ण रवैया और सरकार के इशारे पर काम करना
ये प्रस्ताव कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और डॉ. मल्लू रवि जैसे नेताओं द्वारा लाया जा रहा है. जहां कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने 9 से 11 मार्च तक तीन-लाइन व्हिप जारी किया है, यानी सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहना अनिवार्य है.
वहीं भाजपा ने भी लोकसभा के अपने सांसदों के लिए 9 और 10 मार्च के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है. जबकि विपक्ष की पार्टी तृणमूल कांग्रेस जिसके 29 सांसद हैं, ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिससे विपक्ष में इस प्रस्ताव को लेकर मतभेद दिख रहा हैं.
इसके अलावा भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही आमने सामने आ सकते हैं जहां एनडीए पिछले दिनों दिल्ली में हुए इंडिया AI समिट में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस को घेरेगी. वहीं काउंटर अटैक के तौर पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले ही कहा था कि सरकार राहुल गांधी के भाषण पर मोशन लाएगी.
मगर बाद में निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव दायर किया था, जिसमें उन पर “तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने” और अपने भाषण में देश की प्रतिष्ठा को कम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया था, जिसमें अप्रकाशित किताब का जिक्र और नियम उल्लंघन का भी आरोप है. इसे प्रिविलेज या एथिक्स कमिटी को भेजा जा सकता है.
वहीं स्पीकर के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव के जवाब स्वरूप सरकार इस प्रस्ताव को खारिज करने के लिए तैयारियां कर रही है। स्पीकर ओम बिरला पहले चरण में अविश्वास नोटिस पर दूर रहे थे, लेकिन अब सदन में चर्चा होने की संभावना है। सरकार विपक्ष के मतभेदों (जैसे टीएमसी का अलग रुख) को उजागर करेगी और सदन में सामान्य कार्यवाही बहाल करने पर जोर देगी.
अगर हंगामा बढ़ा तो और सस्पेंशन या अन्य कार्रवाई तो हो सकती है साथ ही निलंबित आठों सांसदों का निलंबन भी पूरे सत्र से पहले खत्म होने की संभावना खत्म हो जाएगी. सरकार का फोकस बजट चर्चा को सुचारू रूप से चलाने पर है. इसके अलावा ऐसे मुद्दे जिन पर विपक्ष हमला बोले सकता है वो हैं,
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को देश-विरोधी बताना
चीन सीमा विवाद और नरवणे की किताब में उठाए गए दावों पर सरकार से जवाब मांगना
बजट चर्चा में आर्थिक असमानता, बेरोजगारी, महंगाई और किसान मुद्दों पर सरकार को घेरना
महिला सांसदों पर लगे आरोपों को आधारहीन बताना
विपक्ष का रुख आक्रामक रहेगा, और अगर हंगामा जारी रहा तो 8 निलंबित सांसदों (मणिक्कम टैगोर, हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, गुरजीत सिंह औजला, किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत यादोराव पडोले, डीन कुरियाकोस और एस. वेंकटेशन) का निलंबन रद्द होने की संभावना भी न के बराबर हो सकती है. सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट कहा है कि,अगर विपक्ष हमलावर रहा तो निलंबन वापस नहीं लिया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, यह चरण पहले से ज्यादा तनावपूर्ण होगा. विपक्ष एकजुट होकर स्पीकर प्रस्ताव पर दबाव बनाएगा, जबकि सरकार अनुशासन और काउंटर मोशन से मुकाबला करेगी. अगर विपक्ष आक्रामक रहा तो निलंबन रद्द नहीं होगा, और संसद में गतिरोध जारी रह सकता है.







