*_बनभूलपुरा हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को नहीं मिली जमानत, HC की डिवीजन बेंच ने सुनवाई से किया इन्कार_*

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*_बनभूलपुरा हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को नहीं मिली जमानत, HC की डिवीजन बेंच ने सुनवाई से किया इन्कार_*

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को नैनीताल जिले के मुख्य शहर हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा कांड के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की. इस मामले में कई समय से सुनवाई चल रही थी. पूर्व में कोर्ट ने नामजद कई आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी किए थे. लेकिन पुलिस द्वारा मुख्य साजिशकर्ता बताए गए अब्दुल मलिक को कोई राहत नहीं दी.

अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई से इन्कार: मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए गठित उत्तराखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया है. अब ये प्रकरण नई डिवीजन बेंच के सामने रखा जाएगा, जिसका गठन नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे. पूर्व में इसी खंडपीठ ने मामले में शामिल सह अभियुक्त मोकिन सैफी, जियाउर रहमान और रईस अहमद की जमानत मंजूर कर दी थी.

बनभूलपुरा उपद्रव में 86 आरोपियों को मिल चुकी जमानत: कोर्ट ने मुख्य आरोपी को कोई जमानत न देते हुए अगली सुनवाई 18 फरवरी की तिथि नियत की थी. 18 फरवरी को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास गुगलानी और सीके शर्मा की तरफ से कहा गया कि जिस दिन आगजनी हुई थी, उस वक्त उनका मुवक्किल घटना के समय मौजूद नहीं था. जब वे घटना में शामिल नहीं थे तो पुलिस ने किस आधार पर मुकदमा दर्ज किया. उच्च न्यायालय ने सबको जमानत पर रिहा कर दिया है, उसी के आधार पर अब्दुल मलिक को भी रिहा किया जाए.

 

अब्दुल मलिक के वकीलों ने कहा कि कुछ कारणों की वजह से उनके मुकदमे की सुनवाई कर रही कोर्ट ने उनके मुकदमे को सुनने से इन्कार करते हुए अन्य पीठ को इसकी सुनवाई हेतु रेफर कर दिया है. पिछली तिथि को इसी कोर्ट ने मोकिन सैफी और अन्य को इस संदेह के आधार पर रिहा करने को कहा था.

अब्दुल मलिक पर बनभूलपुरा उपद्रव मामले में चार मुकदमे दर्ज हैं: मामले के अनुसार अब्दुल मलिक सहित अन्य के खिलाफ बनभूलपुरा दंगे के समय चार मुकदमे दर्ज हुए थे. इसमें से एक मामला ये भी था कि मलिक ने कूटरचित, झूठे शपथ पत्र के आधार पर राजकीय भूमि को हड़पने का कार्य किया. यही नहीं उसके द्वारा नजूल भूमि पर कब्जा करके प्लॉटिंग, अवैध निर्माण करके उसे बेचा गया. जब जिला प्रशासन इस अतिक्रमण को हटाने पहुंचा तो उन पर पथराव किया गया.

8 फरवरी 2024 को हुई थी बनभूलपुरा में हिंसा: बाद में इसने दंगे का रूप ले लिया. इसी दंगे में सरकारी कर्मचारी, पुलिसकर्मी और अन्य लोग घायल हो गए. कई लोगों की जान तक चली गयी. आरोपियों का कहना है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है. एफआईआर में उनका नाम नहीं है. पुलिस ने उन्हें जबरन इस मामले में फंसाया है. इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए. दंगे में शामिल कई लोगों को पूर्व में कोर्ट से जमानत मिल चुकी है. बनभूलपुरा में 8 फरवरी 2024 को हिंसा हुई थी.


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