*_’अबू सलेम को ज्यादा समय तक जेल से बाहर रखना ठीक नहीं’: CBI ने 14 दिन की पैरोल का किया विरोध_*
मुंबई: ‘अबू सलेम की पिछली हिस्ट्री को देखते हुए उसे ज़्यादा समय तक जेल से बाहर रखना ठीक नहीं है. इसलिए, उसे बाहर भेजने से पहले हमारी बात सुन लें.’ जांच एजेंसी CBI ने मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में अबू सलेम के द्वारा दायर पैरोल याचिका का विरोध किया. जिसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने अबू सलेम की पिटीशन पर सुनवाई 28 जनवरी तक टाल दी है.
इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार 20 जनवरी को बॉम्बे हाई कोर्ट को सूचित किया कि गैंगस्टर अबू सालेम को उसके भाई की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करने के लिए पुलिस सुरक्षा में केवल दो दिनों की सशर्त पैरोल दी जा सकती है. जेल अधिकारियों ने हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि सालेम को उन पुलिस अधिकारियों का खर्च उठाने के लिए कहा जाए जो सुरक्षा के लिए उसके साथ रहेंगे.
सरकार ने अदालत को बताया कि सलेम एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी है, जो 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के तुरंत बाद देश छोड़कर भाग गया था. 12 साल की कड़ी मेहनत के बाद, जांच एजेंसियां प्रत्यर्पण संधि की मदद से उसे वापस ला सकी थीं. सरकार ने कहा, “इसलिए, उसे बहुत लंबे समय तक जेल से बाहर नहीं रखा जा सकता है.”
सलेम नवंबर 2005 से जेल में बंद है. उसके सौतेले भाई, अबू हाकिम अंसारी की मृत्यु 15 नवंबर 2025 को हुई थी. अबू सलेम ने अपने भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए जेल अधिकारियों से 14 दिनों की आपातकालीन पैरोल मांगी थी. हालांकि, जेल प्रशासन ने उसके अनुरोध को ठुकरा दिया था. इसके बाद सलेम ने अपनी वकील फरहाना शाह के माध्यम से हाई कोर्ट में अपील दायर कर इस फैसले को चुनौती दी.
सलेम को 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में दोषी पाया गया था और अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. नवंबर 2005 में, पुर्तगाल सरकार के साथ एक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर होने के बाद सालेम को भारत वापस लाया गया था, जहां वह वर्तमान में नवी मुंबई की तलोजा जेल में अपनी सजा काट रहा है. यह संधि भारत सरकार को उसे 25 साल से अधिक की जेल की सजा देने से रोकती है.






