*_पंजाब पुलिस के खिलाफ दिल्ली विधानसभा का कड़ा रुख, स्पीकर ने मामला विशेषाधिकार समिति को सौंपा_*

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*_पंजाब पुलिस के खिलाफ दिल्ली विधानसभा का कड़ा रुख, स्पीकर ने मामला विशेषाधिकार समिति को सौंपा_*

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा और पंजाब पुलिस के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है. विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने बुधवार को नेता प्रतिपक्ष आतिशी के सदन में दिए गए भाषण पर पंजाब पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को बेहद गंभीरता से लिया है.

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह सदन के विशेषाधिकार के उल्लंघन और अवमानना का मामला प्रतीत होता है. अब इस मामले में पंजाब के डीजीपी, जालंधर के पुलिस आयुक्त और पंजाब सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की भूमिका की जांच की जाएगी. विवाद की शुरुआत 6 जनवरी 2026 को हुई थी, जब सदन के पटल पर नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने एक बयान दिया था. इस बयान से संबंधित वीडियो क्लिप को लेकर पंजाब पुलिस ने इकबाल सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी. पंजाब पुलिस का दावा था कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है.

 

मंत्री कपिल मिश्रा की शिकायत पर संज्ञान

 

इस मामले में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने भी शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 361A का उल्लंघन है. यह अनुच्छेद विधानसभा की कार्यवाही की सत्य रिपोर्ट प्रकाशित करने वालों को आपराधिक कार्यवाही से सुरक्षा प्रदान करता है.

पंजाब पुलिस के तर्कों को स्पीकर ने किया खारिज

पंजाब के डीजीपी और जालंधर पुलिस कमिश्नर ने लिखित जवाब में कहा था कि पुलिस ने कानून के दायरे में काम किया है और यह मामला विधायी विशेषाधिकार के अंतर्गत नहीं आता क्योंकि कार्रवाई विधानसभा के बाहर के व्यक्तियों पर हुई है. उन्होंने यह भी दलील दी कि मामला ‘सब ज्यूडिस’ है, इसलिए विधानसभा इस पर विचार नहीं कर सकती. अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने इन तर्कों को असंतोषजनक बताते हुए खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, “विशेषाधिकार के मामलों पर सब ज्यूडिस होने का प्रतिबंध लागू नहीं होता. पंजाब पुलिस चाहती तो एफआईआर दर्ज करने से पहले तथ्यों का सत्यापन दिल्ली विधानसभा सचिवालय से कर सकती थी, लेकिन ऐसा न करना दुर्भाग्यपूर्ण है.”

 

मुख्य बिंदु जिन पर फंसा है पेंच

सदन की गरिमा: विधानसभा सचिवालय का तर्क है कि सदन की कार्यवाही से जुड़े किसी भी विषय पर कार्रवाई से पहले अध्यक्ष की अनुमति या संज्ञान आवश्यक है.

फॉरेंसिक रिपोर्ट में विरोधाभास: पंजाब पुलिस ने जहां वीडियो को ‘एडिटेड’ बताया, वहीं दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने दिल्ली की फॉरेंसिक लैब से स्वतंत्र जांच कराई. दिल्ली की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि आतिशी द्वारा दिए गए बयान सदन की आधिकारिक कार्यवाही का हिस्सा थे और वीडियो सही है.

 

दस्तावेज छिपाने का आरोप: अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने नाराजगी जताई कि बार-बार मांगने के बावजूद पंजाब पुलिस ने FIR की कॉपी, सोशल मीडिया विशेषज्ञ की रिपोर्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट सचिवालय को उपलब्ध नहीं कराई

 

अब विशेषाधिकार समिति इन अधिकारियों और व्यक्तियों के आचरण की जांच करेगी

 

पुलिस महानिदेशक, पंजाब

 

पुलिस आयुक्त, जालंधर

 

अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पंजाब सरकार

 

शिकायतकर्ता इकबाल सिंह


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