*_हत्या मामले में BJP MLA की अग्रिम जमानत याचिकाः सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी-‘साहस दिखाएं और जांच का सामना करें’_*

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*_हत्या मामले में BJP MLA की अग्रिम जमानत याचिकाः सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी-‘साहस दिखाएं और जांच का सामना करें’_*

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हत्या मामले में कर्नाटक के भाजपा विधायक बैरथी बसवराज की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा, ‘आप एक सार्वजनिक व्यक्ति हैं. आपको इस साहस के साथ आगे आना चाहिए कि मैं किसी भी तरह की पूछताछ का सामना करने के लिए तैयार हूं.’

यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने आया. बेंच ने टिप्पणी की कि विधायक को इसके बजाय नियमित जमानत के लिए याचिका दायर करनी चाहिए.

सुनवाई के दौरान, भाजपा विधायक का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है. वे वहां मौजूद नहीं थे और यह एक संपत्ति विवाद है जिसमें उनके मुवक्किल शामिल नहीं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वह संपत्ति उनके निर्वाचन क्षेत्र में भी नहीं आती है.

बेंच ने कहा कि महिला के बेटे को उसकी मौजूदगी में ही गोलियों से भून दिया गया. वकील रोहतगी ने दलील दी कि उसने कभी नहीं कहा कि उसने मुझे देखा है. इस पर सीजेआई (CJI) ने टिप्पणी की, “आपका स्तर ऐसा नहीं है कि आप खुद हथियार लेकर जाएंगे… आपके पास तो बहुत सारे ‘सर्विस प्रोवाइडर’ (काम करने वाले) हैं.”

सीजेआई ने यह भी कहा कि जमीन हड़पने वालों को आमतौर पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होता है और दुर्भाग्य से दूसरा गुट भी वैसा ही है. जमीन हड़पने वालों के संदर्भ में सीजेआई ने कहा, “जनता के बीच धारणा यही है कि उन्हें संरक्षण मिलता है.” जस्टिस बागची ने कहा, “हत्या के मामले में अग्रिम जमानत, हमें बहुत हैरानी होगी. धोखाधड़ी, गबन… इन सामान्य गतिविधियों में तो समझ आता है, लेकिन यहां मामला हत्या तक पहुंच गया है.”

 

सीजेआई ने कहा कि घटनाओं का क्रम कुछ इस तरह है: मृतक विवादित संपत्ति पर जाता है, जहां ऐसा लग रहा है कि दो गुट उस जमीन को हड़पने की कोशिश कर रहे हैं. झगड़ा होता है और उसे गोली मार दी जाती है, जबकि उसकी मां वहीं मौजूद है. अब, आरोप जो भी हों, सही या गलत, यह जांच का विषय है. सीजेआई ने कहा कि आरोप है कि वह (जगदीश) याचिकाकर्ता के संपर्क में था और अब श्रीलंका भाग गया है.

बेंच को सूचित किया गया कि विवादित जमीन का टुकड़ा केवल 130 वर्ग गज का है. इस पर बेंच ने कहा कि यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि वह जमीन कहां स्थित है और उसकी कीमत क्या है. वकील रोहतगी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल चार बार के विधायक हैं और वे 130 वर्ग गज का प्लॉट नहीं हड़पेंगे, साथ ही उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है. इस पर सीजेआई (CJI) ने कहा, “आप एक सार्वजनिक व्यक्ति हैं. आपको हिम्मत के साथ आगे आना चाहिए… कि मैं किसी भी तरह की पूछताछ का सामना करने के लिए तैयार हूं. मैं निर्दोष हूं, उन्हें साबित करने दें.”

बेंच ने कहा कि वे उन्हें अग्रिम जमानत दे देते, लेकिन उन्होंने टालमटोल वाला रुख अपनाया है कि वे मामले के मुख्य आरोपी को बिल्कुल नहीं जानते, जबकि याचिकाकर्ता के कॉल रिकॉर्ड कुछ और ही बताते हैं.

 

जस्टिस बागची ने कहा, “मिस्टर रोहतगी, हम आपकी बात मान लेते, लेकिन आपने कहा कि आप उसे नहीं जानते… जबकि सीडीआर दिखाता है कि घटना के दिन आपके और जगदीश के बीच फोन पर बात हुई थी.” इसके बाद रोहतगी ने कहा कि वे याचिका वापस ले लेंगे. बेंच ने आदेश दिया, “याचिका पर विचार नहीं किया गया. याचिकाकर्ता को नियमित जमानत के लिए आवेदन करने की छूट दी जाती है.”


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