*राम की पुकार पर संजीवनी लेकर दौड़े हनुमान, लक्ष्मण के बचे प्राण*
*मुख्य रामलीला में मेघनाद वध का हुआ भव्य मंचन, लक्ष्मण मूर्छा और मेघनाद की अंतिम विदाई के दृश्यों ने दर्शकों को किया भावुक*
*आज ऐतिहासिक गांधी पार्क में होगा रावण दहन, दशहरा महोत्सव को लेकर उत्साह*
रुद्रपुर। नगर की प्राचीन मुख्य रामलीला में मंगलवार रात लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, लक्ष्मण को शक्तिबाण लगने, श्रीराम के विलाप, हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने और मेघनाद वध तक की लीलाओं का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया। लक्ष्मण मूर्छा, श्रीराम की व्याकुलता और मेघनाद की अंतिम विदाई के दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। बुधवार को ऐतिहासिक गांधी पार्क में रावण दहन किया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महापौर विकास शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। श्रीरामलीला कमेटी की ओर से महापौर को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। अन्य अतिथियों का भी माल्यार्पण एवं स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया गया।
रामलीला की शुरुआत रावण द्वारा अपने पुत्र मेघनाद को युद्धभूमि में भेजने के प्रसंग से हुई। पिता की आज्ञा पाकर रणभूमि में पहुंचे मेघनाद और लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध हुआ। इसी दौरान मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़े। लक्ष्मण की यह दशा देखकर रामदल में शोक छा गया। अपने अनुज को अचेत देखकर प्रभु श्रीराम व्याकुल हो उठे। भाई के प्रति उनके अगाध प्रेम और वियोग की आशंका को कलाकारों ने मार्मिक अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया।
इसके बाद सुशेन वैद्य ने लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने की सलाह दी। प्रभु श्रीराम की आज्ञा पाकर हनुमान जी संजीवनी की खोज में निकल पड़े। औषधि की पहचान न होने पर पूरा पर्वत उठा लाने के प्रसंग ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। संजीवनी बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण की मूर्छा दूर होते ही रामदल में खुशी की लहर दौड़ गई। इस दृश्य ने भक्ति, सेवाभाव और भ्रातृप्रेम का संदेश दिया।
इसके बाद मेघनाद के यज्ञ विध्वंस का मंचन किया गया। युद्धभूमि में जाने से पहले मेघनाद का अपने पिता रावण, माता मंदोदरी और पत्नी सुलोचना से अंतिम मिलन दर्शकों के लिए बेहद भावुक क्षण रहा। पिता-पुत्र के संवादों में स्नेह और युद्ध की गंभीरता दिखाई दी, वहीं सुलोचना की व्याकुलता और पति के प्रति समर्पण ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
अंतिम प्रसंग में मेघनाद और लक्ष्मण के बीच एक बार फिर भीषण युद्ध हुआ। अंततः लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया। इसी के साथ रात की लीला का समापन हुआ। पूरे मंचन में साहस, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, भक्ति और पारिवारिक प्रेम के भाव प्रभावशाली ढंग से उभरकर सामने आए।
मनोज अरोरा ने श्रीराम के किरदार में छोड़ी छाप
मुख्य रामलीला में श्रीराम की भूमिका निभा रहे मनोज अरोरा ने अपने सजीव अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। वर्ष 1992 में वानर सेना के सदस्य के रूप में अभिनय यात्रा शुरू करने वाले मनोज अरोरा ने अपने लंबे अनुभव के आधार पर श्रीराम की मर्यादा, सौम्यता और करुणा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
लक्ष्मण मूर्छा के प्रसंग में भाई के वियोग की आशंका से व्याकुल श्रीराम की मनोदशा को उन्होंने भावपूर्ण अभिनय से साकार किया। उनके संवादों, चेहरे के भावों और गीतों की प्रस्तुति ने वातावरण को करुणामय बना दिया। ‘मेरे भाई लक्ष्मण मुझे न रुलाओ’ और ‘आ जाओ मेरे बजरंगबली’ जैसे गीतों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
महापौर ने 31 लाख रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की
मुख्य अतिथि महापौर विकास शर्मा ने कहा कि रुद्रपुर की प्राचीन मुख्य रामलीला शहर की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता की अमूल्य धरोहर है। प्रभु श्रीराम का जीवन मर्यादा, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। उन्होंने रामलीला से जुड़े विकास कार्यों के लिए 31 लाख रुपये की घोषणा करते हुए कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े स्थलों का विकास प्राथमिकता में है।
उन्होंने रामलीला की परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए कमेटी के पदाधिकारियों, कलाकारों और सेवादारों की सराहना की। साथ ही सभी से प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने और रुद्रपुर को स्वच्छ, सुंदर एवं विकसित बनाने में सहयोग देने का आह्वान किया।
इन कलाकारों ने निभाईं प्रमुख भूमिकाएं
श्रीराम की भूमिका में मनोज अरोरा, लक्ष्मण के रूप में राजकुमार कक्कड़, रावण की भूमिका में विशाल भुड्डी, मेघनाद के रूप में रमन अरोरा, विभीषण की भूमिका में सचिन आनंद, गणेश भगवान के रूप में आशीष ग्रोवर, सुशेन वैद्य की भूमिका में मनोज मुंजाल, सुग्रीव के रूप में मोहन अरोरा, अंगद की भूमिका में आयुष्मान सुशील गाबा, मंदोदरी के रूप में सुमित आनंद और सुलोचना की भूमिका में दीपक गुप्ता ने शानदार अभिनय किया। मंच संचालन मंच सचिव विजय जग्गा और संदीप धीर ने किया।
इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा, महामंत्री सुशील गाबा, कोषाध्यक्ष सीए अमित गंभीर, समन्वयक राजेश छाबड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश शर्मा, पार्षद विष्णु, पार्षद वीनू कुमार, मंडल अध्यक्ष सुनील ठुकराल, राजन राठौर, अजय चड्ढा, देवी शंकर अग्रवाल, विजय अरोरा, हरीश अरोरा, महावीर आजाद, अमित अरोरा बोबी, विजय विरमानी, सुभाष खंडेलवाल, ओम प्रकाश अरोरा, राकेश सुखीजा, अशोक गुम्बर, केवल कृष्ण बत्रा, अमित चावला, आशीष मिड्ढा, जगदीश टंडन, रघुवीर अरोरा, राज घई, चन्द्र सचदेवा, बिट्टू ग्रोवर, रवि बठला सहित श्री रागनाटक क्लब के पदाधिकारी, कलाकार और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
बॉक्स : मेघनाद की अंतिम विदाई ने नम कीं आंखें
रुद्रपुर। मुख्य रामलीला में मेघनाद की अंतिम विदाई का दृश्य दर्शकों के लिए भावुक क्षण रहा। युद्धभूमि में जाने से पहले पिता रावण, माता मंदोदरी और पत्नी सुलोचना से विदा लेते मेघनाद के संवादों ने पारिवारिक प्रेम और बिछोह की पीड़ा को साकार कर दिया। पुत्र के प्रति माता-पिता का स्नेह और पति की कुशलता को लेकर सुलोचना की व्याकुलता ने माहौल को करुणामय बना दिया। विशाल भुड्डी, रमन अरोरा, सुमित आनंद और दीपक गुप्ता के जीवंत अभिनय को दर्शकों ने सराहा।


