*राम के वियोग में राजा दशरथ ने त्यागे प्राण, चित्रकूट में हुआ राम-भरत मिलाप* *श्री शिव नाटक क्लब की रामलीला के सातवें दिन भावुक हुए दर्शक, भरत ने राम की खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौटने का लिया संकल्प*

*राम के वियोग में राजा दशरथ ने त्यागे प्राण, चित्रकूट में हुआ राम-भरत मिलाप*

 

*श्री शिव नाटक क्लब की रामलीला के सातवें दिन भावुक हुए दर्शक, भरत ने राम की खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौटने का लिया संकल्प*

 

रुद्रपुर। श्री शिव नाटक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला मंचन के सातवें दिन सुमंत की अयोध्या वापसी, राजा दशरथ के प्राण त्यागने और चित्रकूट में राम-भरत मिलाप की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम के वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने और भरत के त्याग एवं भ्रातृप्रेम के प्रसंगों ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा ओबीसी मोर्चा के उपाध्यक्ष उपेंद्र चौधरी और इस्कॉन रुद्रपुर के संत सर्वमंगल गौड़ ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। पंडित शुभम शर्मा ने प्रभु श्रीराम के चित्र के समक्ष विधिवत पूजन कराया। इस दौरान नीरज अग्रवाल और सत्यभानु दास भी उपस्थित रहे।

 

मुख्य अतिथि उपेंद्र चौधरी ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। जीवन में आने वाली कठिनाइयों से घबराने के बजाय वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए सकारात्मकता के साथ जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है। उन्होंने भव्य आयोजन के लिए श्री शिव नाटक क्लब के पदाधिकारियों को बधाई दी।

 

संत सर्वमंगल गौड़ ने कहा कि भगवान श्रीराम ने मर्यादा में रहकर जीवन व्यतीत किया और प्रत्येक परिस्थिति में धैर्य बनाए रखा। इसी कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सभी को अपने आचरण में मर्यादा, धैर्य और आदर्शों को अपनाना चाहिए।

 

क्लब के पदाधिकारियों ने अतिथियों को अंगवस्त्र, माला और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

 

राम के वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण

 

रामलीला में दिखाया गया कि सुमंत अयोध्या लौटकर राजा दशरथ को बताते हैं कि भगवान राम अब वापस नहीं आएंगे। यह सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो उठते हैं और राम, सीता तथा लक्ष्मण का स्मरण करते हुए श्रवण कुमार के माता-पिता के श्राप को याद करते हैं। राम-राम कहते हुए वे अपने प्राण त्याग देते हैं।

 

इसके बाद ननिहाल से अयोध्या लौटे भरत वहां की स्थिति देखकर दुखी हो जाते हैं। माता कैकेयी से संवाद के दौरान वे उनके कृत्य से आहत होकर संकल्प लेते हैं कि अब कभी उनके कक्ष में प्रवेश नहीं करेंगे। माता कौशल्या से भेंट करने के बाद भरत भगवान राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं।

 

चित्रकूट में राम और भरत का मिलाप होता है। भरत भगवान राम से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं, लेकिन पिता के वचन का पालन करने के लिए राम वनवास पूरा करने पर अडिग रहते हैं। अंत में भरत उनकी खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौटने का निर्णय लेते हैं। भगवान राम उन्हें आश्वासन देते हैं कि 14 वर्ष पूरे होते ही वे अयोध्या लौट आएंगे और एक दिन की भी देरी नहीं करेंगे।

 

कलाकारों ने निभाईं प्रभावशाली भूमिकाएं

 

मंचन में राजा दशरथ की भूमिका गौरव गांधी, सुमंत की विशाल गुंबर, कौशल्या की आदित्य कुमार, सुमित्रा की रोमल मदान, कैकेयी की भारत हुड़िया, भरत की सनी घई, शत्रुघ्न की विशांत भसीन, वशिष्ठ की चिराग अरोड़ा, राम की अभिनव अनेजा, लक्ष्मण की रवि कक्कड़, सीता की नैतिक तनेजा, मामा की पंकज कालरा और नाना की भूमिका नमन कक्कड़ ने निभाई। मंच संचालन जॉली कक्कड़ ने किया।

 

आज होगा शूर्पणखा प्रसंग का मंचन

 

श्री शिव नाटक क्लब के अध्यक्ष जगदीश सुखीजा ने बताया कि आज रात्रि के मंचन में शूर्पणखा की नाक काटने, खर-दूषण वध, रावण दरबार और रावण-मारीच संवाद की लीला का मंचन किया जाएगा। उन्होंने सभी रामभक्तों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर रामलीला का आनंद लेने की अपील की।

Advertisement
Advertisement
Advertisement