*_AI बना बाजार की नई टेंशन, दबाव में आईटी कंपनियां, दो दिन में उड़े सैकड़ों अरब डॉलर_*
हैदराबाद: जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को पहले शेयर बाजार का भविष्य माना जाता था, वही अब निवेशकों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है. ChatGPT और अन्य AI टूल्स के आने के बाद पिछले तीन सालों में कई बार बाजार में उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन इस हफ्ते जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया. शेयर और कर्ज बाजार में तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है.
दो दिनों में अरबों डॉलर की संपत्ति गायब
सिर्फ दो कारोबारी दिनों में सिलिकॉन वैली की कई बड़ी और मध्यम कंपनियों की बाजार पूंजी से सैकड़ों अरब डॉलर कम हो गए. सॉफ्टवेयर सेक्टर इस गिरावट का केंद्र रहा. एक प्रमुख iShares ETF, जो सॉफ्टवेयर कंपनियों को ट्रैक करता है, उसकी वैल्यू महज सात दिनों में लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर घट गई. बाजार में घबराहट का माहौल साफ नजर आया.
डर अब बिजनेस मॉडल को लेकर है
इस बार गिरावट किसी पारंपरिक बुलबुले के फूटने से नहीं आई. असली चिंता यह है कि AI अब कंपनियों के पूरे बिजनेस मॉडल को चुनौती दे रहा है. निवेशकों को लगने लगा है कि जिस खतरे की चर्चा वर्षों से हो रही थी, वह अब हकीकत बनकर सामने आ गया है. Jonestrading के चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट माइकल ओ’रूर्क का कहना है कि बाजार की प्रतिक्रिया थोड़ी ज्यादा है, क्योंकि दो साल से कहा जा रहा था कि AI दुनिया बदल देगा.
छोटा ऐलान, बड़ा असर
बाजार की हलचल की शुरुआत एक छोटे ऐलान से हुई. AI स्टार्टअप Anthropic ने कानूनी कामों, जैसे कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू के लिए नया AI टूल पेश किया. भले ही यह ऐलान अपने आप में बहुत बड़ा न था, लेकिन इससे पहले Anthropic के AI कोडिंग टूल्स सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की तस्वीर बदल चुके थे. यही कारण है कि निवेशकों ने इसे खतरे की घंटी माना. KeyBanc के एनालिस्ट जैक्सन एडर का कहना है कि अगर AI आज लीगल सेक्टर में घुस रहा है, तो कल यह सेल्स, मार्केटिंग और फाइनेंस में भी बदलाव ला सकता है.
AI फेवरेट कंपनियों में भी कमजोरी
AI से सबसे ज्यादा लाभ उठाने वाली कंपनियों में भी निवेशकों की चिंता बढ़ी. Alphabet ने माना कि AI पर खर्च उम्मीद से ज्यादा बढ़ेगा, जबकि Arm Holdings की आय का अनुमान बाजार की उम्मीदों से कम रहा. परिणामस्वरूप दोनों कंपनियों के शेयर आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में गिर गए.
बिकवाली का असर पूरे बाजार में
D.A. Davidson के मैनेजिंग डायरेक्टर गिल लूरिया के मुताबिक शुरुआती बिकवाली सिर्फ सॉफ्टवेयर शेयरों तक सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे बाजार में फैल गई. शेयर गिरते गए, डर बढ़ता गया और डर ने और बिकवाली को जन्म दिया. यह असर अमेरिका तक सीमित नहीं रहा; लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप, TCS और Infosys जैसी कंपनियों के शेयर भी दबाव में आ गए.
कर्ज बाजार पर भी दबाव
डर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा. जिन बैंकों और निवेशकों ने सॉफ्टवेयर कंपनियों को कर्ज दिया था, वहां भी तनाव बढ़ गया. ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार हफ्तों में 17.7 अरब डॉलर से ज्यादा के अमेरिकी टेक लोन संकट के स्तर तक पहुँच गए हैं.
नुकसान कम, डर ज्यादा
अभी तक ServiceNow और Salesforce जैसी कंपनियों ने AI के कारण कोई बड़ा नुकसान नहीं झेला. हालांकि Microsoft के Copilot के केवल 1.5 करोड़ पेड यूजर्स हैं, जबकि कुल यूजर बेस करोड़ों में है. इस वजह से निवेशक सतर्क हैं, क्योंकि अब सवाल यह है कि कौन सी कंपनियां AI की रफ्तार में टिक पाएंगी और कौन पीछे छूट जाएगी.
SLC Management के डेक मुलार्की का कहना है कि आने वाला साल बहुत अहम होगा. यह तय होगा कि AI दौर में असली विजेता कौन होगा और सबसे कमजोर कौन.






