*_गौतम अडाणी ने बारामती में वर्ल्ड-क्लास AI सेंटर का किया उद्घाटन, तकनीक के महत्व पर जोर_*

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*_गौतम अडाणी ने बारामती में वर्ल्ड-क्लास AI सेंटर का किया उद्घाटन, तकनीक के महत्व पर जोर_*

बारामती (महाराष्ट्र): अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने रविवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान में निर्मित ‘शरदचंद्र पवार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ का उद्घाटन किया. कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार, एनसीपी (SP) अध्यक्ष शरद पवार, सांसद सुप्रिया सुले, सुनेत्रा पवार, विद्या प्रतिष्ठान के पदाधिकारी, अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट और बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स शामिल हुए.

यह सेंटर पवार परिवार द्वारा चलाए जाने वाले एजुकेशनल इंस्टीट्यूट विद्या प्रतिष्ठान के तहत बनाया गया है. पवार परिवार के जरिये बारामती में शुरू हुए इस वर्ल्ड-क्लास AI सेंटर ने गांव के युवाओं के लिए वर्ल्ड-क्लास एजुकेशन के दरवाजे खोल दिए हैं. अडाणी ग्रुप ने AI सहयोग को बढ़ाने के लिए बारामती के विद्या प्रतिष्ठान के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करके एक ट्रांसफॉर्मेटिव पार्टनरशिप की है.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गौतम अडाणी ने कहा, “यह पार्टनरशिप व्यावहारिक तकनीकी क्षमता बनाने की एक प्रतिबद्धता है, जहां AI रिसर्च, इंजीनियरिंग और एग्जीक्यूशन एक साथ इंटीग्रेटेड तरीके से आगे बढ़ते हैं.”

उन्होंने कहा कि बारामती ऐसे ही बदलाव की निशानी है, जिसमें असीमित क्षमता है, जो एक असाधारण नेता और मार्गदर्शक, शरद पवार के विजन से मुमकिन हुआ है. शरद पवार के नेतृत्व की तारीफ करते हुए अडाणी ने कहा, “मैं भाग्यशाली हूं कि मैं पवार साहब को तीन दशकों से अधिक समय से जानता हूं, और मैंने उनसे जो सीखा है, वो अद्वितीय है. लेकिन ज्ञान से परे, उनकी समझदारी, उनका प्यार और उनकी गहरी हमदर्दी सबसे गहरी छाप छोड़ती है.”

गौतम अडाणी ने आगे कहा, “मेरे लिए, वह हमेशा सही मायने में एक मार्गदर्शक रहे हैं. बारामती में दर्जनों बार आने के बाद, मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि पवार साहब ने यहां जो हासिल किया है, वह सिर्फ स्थानीय विकास से कहीं ज्यादा है. खेती को बदलकर, कोऑपरेटिव को मजबूत करके, एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देकर, शैक्षणिक संस्थान बनाकर, इंडस्ट्री पॉलिसी बनाकर, और यह सब एक बेमिसाल, इंटीग्रेटेड तरीके से किया है.”

उन्होंने कहा कि इतिहास देखने वाले लोग नहीं, बल्कि इतिहास बनाने वाले लोग जरूरी होते हैं और युवाओं से देश बनाने के लिए तैयार होने की अपील की.

मानव प्रगति छलांग लगाकर आगे बढ़ती है…

एआई को भविष्य की तकनीक के तौर पर महत्व देते हुए गौतम अडाणी ने कहा कि पहले बीज धरती में बोए जाते थे, लेकिन कल के बीज एल्गोरिदम में बोए जाएंगे. उन्होंने कहा, “मानव प्रगति सीधी लाइन में नहीं चलती. यह छलांग लगाकर आगे बढ़ती है. हर छलांग एक प्रौद्योगिकी क्रांति से आगे बढ़ती है जो पहले समाज को अस्थिर करती है, और फिर उसे क्षमता के कहीं ज्यादा ऊंचे स्तर पर फिर से बनाती है.”

अडाणी के अनुसार, पहली औद्योगिक क्रांति ने भाप और मशीनीकरण की ताकत का इस्तेमाल किया. दूसरी क्रांति ने बिजली और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन लाया. तीसरी क्रांति ने डिजिटल कंप्यूटिंग और इंटरनेट के जरिये दुनिया को जोड़ा. उन्होंने एआई स्पेस में क्षमता निर्माण की जरूरत को समझते हुए कहा, “आज हम चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर में जी रहे हैं, एक ऐसा दौर जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तय किया गया है.”

उन्होंने कहा, “इतिहास हमें सिखाता है कि हर ऐसे बदलाव में दो अलग-अलग ताकतें होती हैं. बहुत बड़ा मौका और बहुत अधिक चिंता. जगह बदलने का डर, बेकार हो जाने का डर, सिस्टम को कंट्रोल देने का डर, हम अभी पूरी तरह से समझ नहीं पाए हैं.” यह बात लोगों की उस आशंका को दिखाती है कि AI नौकरियों में रुकावट डाल सकता है. फिर उन्होंने तर्क दिया कि टेक्नोलॉजी काम को खत्म नहीं करती – यह पुराने तरीकों में रुकावट डालती है और फिर संभावनाओं को बढ़ाती है.

हर औद्योगिक क्रांति ने कहीं ज्यादा नौकरियां पैदा कीं…

उन्होंने कहा कि पीछे मुड़कर देखें तो, हर औद्योगिक क्रांति ने जितनी नौकरियां हटाईं, उससे कहीं ज्यादा नौकरियां पैदा कीं, क्योंकि इससे पूरी तरह से नई इंडस्ट्री और बिजनेस मॉडल खुले जिनकी कल्पना भी नहीं की गई थी.

उन्होंने कहा, “भारत का अपना अनुभव इसका साफ सबूत देता है. मोबाइल क्रांति ने, जैसा कि बहुतों को डर था, नौकरियां खत्म नहीं कीं. बल्कि, इसने उन्हें बड़े पैमाने पर बढ़ा दिया. जब स्मार्टफोन और कम कीमत वाला डेटा आम भारतीयों तक पहुंचता है, तो इससे जमीनी स्तर पर आर्थिक ऊर्जा का एक बहुत बड़ा उछाल आता है.”

कुछ पॉपुलर इंडियन डिजिटल सर्विस प्लेटफॉर्म्स का जिक्र करते हुए अडाणी ने कहा कि 1991 और 2024 के बीच, भारत ने 230 मिलियन से ज्यादा गैर-कृषि नौकरियां जोड़ीं, जिनमें से अधिकांश डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ने के बाद पैदा हुईं. इनमें से कोई भी मॉडल मोबाइल आने से पहले दिखाई नहीं देता था.

गौतम अडानी के अनुसार, ये बदलाव सिर्फ नीति या सिर्फ पूंजी से नहीं हुए. उन्होंने AI के भविष्य के लिए उम्मीद जताई और कहा, “ये तब सामने आए जब काबिलियत आम नागरिक तक पहुंची. इसलिए, मैं भरोसे के साथ कह सकता हूं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब अगली और कहीं ज्यादा ताकतवर छलांग होगी.”

वहीं, शरद पवार ने कहा कि गौतम अडाणी का काम, जिन्होंने शुरू से इंडस्ट्रीज बनाईं, नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा देने वाला है. उन्होंने विश्वास जताया कि AI और डेटा सेंटर हजारों युवाओं को रोजगार के मौके देंगे. उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार महाराष्ट्र में बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पूरी मदद करेगी।


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