भाकपा (माले) ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में वी आई पी को बचाने के आरोप में प्रदेश की भाजपा सरकार का पुतला फूंका और सीबीआइ जांच की मांग की।

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भाकपा (माले) ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में वी आई पी को बचाने के आरोप में प्रदेश की भाजपा सरकार का पुतला फूंका और सीबीआइ जांच की मांग की।

 

 

भाकपा (माले) ने आज रुद्रपुर के बाटा चौक पर अंकिता भंडारी हत्याकांड में वी आई पी को बचाने के आरोप में प्रदेश की भाजपा सरकार के पुतला फूंका और सीबीआइ जांच की मांग की।

इस दौरान भाकपा (माले) नेता अमनदीप कौर ने कहा कि जघन्य अंकिता भंडारी हत्याकांड में हमेशा से यह चर्चा रही कि अंकिता भंडारी पर किसी वीआईपी को “स्पेशल सर्विस” देने के लिए दबाव डाला जा रहा था और ऐसा करने से इंकार करने पर अंकिता की हत्या कर दी गयी. इस प्रकरण में हत्या के दोषियों को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद भी यह रहस्य अनसुलझा ही रहा कि उक्त वीआईपी कौन था, जिसकी वजह से अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गयी.

हाल में सामने आये कुछ सनसनीखेज ऑडियो जो उर्मिला सनावर नामक महिला द्वारा सार्वजनिक किये गए हैं, उसमें ज्वालापुर से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर बताए जा रहे व्यक्ति यह कहते सुने जा सकते हैं कि अंकिता भंडारी मामले में वीआईपी , भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम व भाजपा के उत्तराखंड संगठन महामंत्री अजय कुमार हैं. ऑडियो में तो यहां तक कहा जा रहा है कि दुष्यंत कुमार गौतम के खिलाफ तो महिला संबंधी सात मामले हैं, जिनकी शिकायत भाजपा हाईकमान से की गयी है. और यह भी कहा गया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पार्टी की छवि बचाने के लिए इस प्रकरण में सीबीआई जांच नहीं होने दी.

उक्त सभी दावे बेहद गंभीर और क्षोभनीय हैं, जिनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है. इसके लिए जरुरी है कि जिन लोगों को वीआईपी बताया जा रहा है, उनके कॉल डिटेल रिकार्ड्स (सीडीआर) और मोबाइल लोकेशन की जांच हो, उक्त ऑडियो रिकॉर्डिंग्स की फॉरेंसिक जांच हो. पूर्व में इस प्रकरण की जांच उत्तराखंड पुलिस की एसआईटी द्वारा की गयी और वो वीआईपी का खुलासा करने में नाकामयाब रही. स्पष्ट तौर पर इसकी वजह राजनीतिक दबाव है.

इसलिए नए तथ्यों की आलोक में जरूरत है कि इस प्रकरण में स्वतंत्र, निष्पक्ष जांच हो और वह प्रदेश के बाहर की एजेंसी द्वारा की जाए. लेकिन भाजपा सरकार व उनके नेता इधर उधर की बात करके मुद्दे को भटकाने में लगे हैं।

इसलिए हमारी मांग है कि इस प्रकरण में उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच करवाई जाए. चूंकि इस प्रकरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी यह आरोप है कि उन्होंने सीबीआई जांच नहीं होने दी, इसलिए आज भाकपा (माले) आज प्रदेश सरकार का पुतला फूंक रही है।

 

ललित मटियाली ने कहा कि बिहार में भाजपा नीत सरकार में मुखिया नीतीश कुमार ने जिस तरह महिला डॉक्टर का हिजाब खींचा और भाजपा ने नीतीश कुमार का बचाव किया उससे भाजपा का महिला विरोधी चेहरा साफ हो जाता है। उत्तर प्रदेश में बलात्कार के आरोपी भाजपा विधायक की जमानत स्वीकार हो जाना और उत्तराखंड में वी आई पी को बचाना , ये सब घटनाएं भाजपा के महिला विरोधी रुख को स्पष्ट कर देती है।

पुतला फूंकने वाले में ललित मटियाली, अमनदीप कौर, ज्ञानी सुरेन सिंह, उत्तम दास, अनिता अन्ना, माकपा के नेता जागीर सिंह, विजय शर्मा,प्रीति मौर्य, मंजू कश्यप, मोहनस्वरुप आदि थे।

 


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