*_कांग्रेस के आठ सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन के नोटिस पर विचार_*
नई दिल्ली : वीबी जी राम जी विधेयक पर चर्चा दौरान गुरुवार को जब कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जवाब दे रहे थे, तब कांग्रेस के कुछ सांसदों ने उनके सामने कागज के कुछ टुकड़े उछाले थे. भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से इसकी शिकायत की है. उन्होंने कांग्रेस के इन सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना करने का आरोप लगाया है. स्पीकर ओम बिरला इस पर विचार कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार स्पीकर ओम बिरला ने नोटिस को स्वीकार किया और कहा कि इसे जांच के लिए लोकसभा विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाएगा.
भाजपा सांसद ने कांग्रेस के आठ सांसदों के नाम लिए हैं. ये हैं – हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, एस मुरासोली, के गोपीनाथ, शशिकांत सेंथिल, शफी परम्बिल, एस वेंकटेशन और जोतिमणि. दुबे ने इन सांसदों के व्यवहार को अपमानजनक और अशोभनीय बताया है. इस नोटिस को लेकर चर्चा तेज हो गई है. कहा जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं.
दुबे ने आरोप लगाया, “उन्होंने कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और सदन के कामकाज में मदद कर रहे अधिकारियों के लिए बाधाएं पैदा करके सदन के सुचारू कामकाज में लगातार अवरोध डाला.”
भारतीय जनता पार्टी के सदस्य दुबे ने कहा, “इस तरह, यह सदन में दुर्व्यवहार है, लोकसभा अध्यक्ष के अधिकारों की अवज्ञा है, सदन के अधिकारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालना है, जो स्पष्ट रूप से सामूहिक रूप से संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों का उल्लंघन और सदन की अवमानना है.”
भाजपा ने आरोप लगाया है कि जब कृषि मंत्री जवाब दे रहे थे, तो कांग्रेस के सदस्यों को विरोध करने का पूरा हक था, लेकिन जिस तरह का बर्ताव उन्होंने अपनाया और जिस तरह से उन्होंने बिल की कॉपी फाड़ी और उसे मंत्री के सामने हवा में लहराया, उन सांसदों का यह आचरण कहीं से भी उचित नहीं जान पड़ता है.
आपको बता दें कि कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी राम जी विधेयक पर जवाब दे रहे थे. उन्होंने कांग्रेस के सदस्यों से कहा कि ऐसा करके आप गांधी के विचारों की हत्या कर रहे हैं. यह बिल मनरेगा की जगह लेगा. बिल में ग्रामीण लोगों को एक साल में 125 दिनों तक रोजगार दिए जाने का प्रावधान है. इस बिल का विपक्षी सदस्यों ने विरोध किया. उनका कहना है कि बिल से महात्मा गांधी का नाम हटा दिया गया. उन्होंने कहा कि बिल में रोजगार की बात तो है, पर उसकी गारंटी नहीं दी जा रही है. साथ ही उनका कहना था कि मनरेगा एक डिमांड ड्रिवेन योजना है, जबकि जी राम जी का पूरा दारोमदार केंद्र सरकार पर निर्भर करेगा, यानि जब उन्हें इच्छा होगी, तो वे रोजगार देंगे और जब इच्छा नहीं होगी, तो वे रोजगार नहीं देंगे.






