“4 लेबर कोड मजदूरों को 150 साल पीछे ले जाएंगे” — रुद्रपुर सेमिनार में वक्ताओं का तीखा हमला
*4श्रम संहिताओं के विरोध में सेमिनार*
रुद्रपुर, 1 फरवरी 2026 को *मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताएं और मजदूर आंदोलन की दिशा* विषय पर *इंकलाबी मजदूर केन्द्र* द्वारा आहूजा धर्मशाला में एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें इंकलाबी मजदूर केन्द्र की रुद्रपुर, पंतनगर व लालकुआं की टीमों के साथ साथ सिडकुल की यूनियनों, मजदूर संगठनों व सामाजिक संगठनों ने भागीदारी की।
सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा देशी विदेशी पूंजीपतियों के हितों को पूरा करने के लिए 29 केन्द्रीय श्रम कानूनों को समाप्त कर घोर मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताओं (लेबर कोड) बना दिए और 21 नवंबर 2025 से इन संहिताओं को लागू करने की घोषणा कर दी है।
वक्ताओं ने कहा कि इन श्रम संहिताओं के लागू होने से मजदूर वर्ग की स्थिति 100-150 वर्ष पूर्व की हो जायेगी। रखो व निकलो की नीति चलेगी, स्थायी काम पर स्थायी रोजगार के स्थान पर फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट (FTE) लागू कर दिया है। ठेकेदारी प्रथा को बढ़ाया गया है। मोदी सरकार व गोदी मीडिया 1 साल पश्चात ग्रेच्युटी मिलने, नियुक्ति पत्र मिलने आदि की बातों को जोर जोर से उठा रही है। जबकि फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट के तहत स्थायी नौकरी समाप्त हो जायेगी। तब ग्रेच्युटी व नियुक्ति पत्र का मतलब ही क्या रहेगा।
वक्ताओं ने कहा कि यूनियन बनाना कठिन हो जायेगा। हड़ताल करने पर अपराधिक मुकदमे लगाए जायेंगे। पहले भी श्रम कानूनों के तहत ही मजदूरों पर आंदोलन/ हड़ताल करने पर पुलिसिया दमन किया जाता रहा है मारुति सुजुकी, एलाइड निप्पन,ग्रेजियानों व प्रिकाल आदि इसके उदाहरण हैं।अब मोदी सरकार ने अब ट्रेड यूनियन गतिविधियों पर जेल व जुर्माना लगाकर ट्रेड यूनियन का अपराधिकरण कर दिया है।
वक्ताओं ने कहा कि देश में मजदूर – मेहनतकश वर्ग की महिलाओं के साथ उत्पीड़न व हिंसा की घटनाएं पहले से ही काफी होती हैं और मोदी राज में इनमें और बढ़ोत्तरी ही हुई है। मोदी सरकार ने महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के स्थान पर महिला सशक्तिकरण के नाम पर महिलाओं को रात्रि की पाली में व खतरनाक उद्योगों में काम करने का नियम बनाकर पूंजीपतियों को सस्ता श्रम उपलब्ध कराने का काम किया है। महिला मज़दूरों से तमाम स्किम वर्करों ( भोजनमाता, आशा व आंगनबाड़ी ) के रूप में नाममात्र के मानदेय पर काम करवाना व प्लेटफॉर्म, गिग वर्करों(जोमैटो,फिलिफकरत,मीसो,बलिंकिट आदि) को रोजगार की गारंटी से बंचित करने की कवायद का विरोध जरूरी है।
वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा काम के घंटे 8 के स्थान पर 12 घंटे करने की छूट पूंजीपतियों को दे दी है।
वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने पूंजीपतियों के हितों में पीएफ का अंशदान 12 प्रतिशत से कम कर 10 प्रतिशत कर दिया गया है, पीएफ व ई एस आई में भागीदारी भी प्रबंधन व मजदूरों की इच्छा पर निर्भर कर दिया गया है। इन श्रम संहिताओं के बाद यूनियनों को संस्थान (फैक्ट्री) के खातों की जांच से वंचित कर दिया गया है।
वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने मजदूर-मेहनतकश जनता के बदहाली को खत्म करने का दावा किया और उनकी जिंदगी को बेहतर करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम वेतन 178/- घोषित कर मजदूर – मेहनतकश जनता के साथ भद्दा मजाक किया।
वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने देशी-विदेशी पूंजीपतियों के मुनाफे को बढ़ाने के लिए इन श्रम संहिताओं को लागू किया गया है इन श्रम संहिताओं से निश्चित ही मजदूर वर्ग की जिंदगी और बदहाल होगी मजदूर की संगठित ताकत कमजोर होगी। मोदी सरकार कानून बनाकर मजदूर वर्ग को दबाना चाहती है। लेकिन मजदूर वर्ग का इतिहास रहा है कि मजदूरों ने एक वर्ग के रूप में संगठित होकर पूंजीपतियों की सत्ता छीन मजदूर राज कायम किये, और पूरी दुनिया के पूंजीपतियों को श्रम कानून बनाने को बाध्य किया।
पीएफ मुद्दे पर बंगलूरू की महिला मजदूरों का जुझारू संघर्ष व ड्राइवरों का हालिया संघर्ष ने मोदी सरकार को पीछे धकेला है।
*सेमिनार में 12 फरवरी 2026 के राष्ट्रीय हड़ताल के समर्थन में प्रस्ताव पारित करते हुए सभी लोगों से बढ़-चढ़ कर कार्यक्रम में भागीदारी करने की अपील की गई।*
सेमिनार में इंकलाबी मजदूर केन्द्र के कैलाश,सुरेन्द्र , पंकज, शम्भू, दिनेश, ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर के अभिलाख, मनोज, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के शिवदेव सिंह, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की रविन्दर कौर , परिवर्तनकामी छात्र संगठन के चंदन, सी.एस.टी.यू. के मुकुल, एक्टू की अनीता अन्ना, इन्टरार्क मजदूर संगठन उधम सिंह नगर के सौरभ, डॉल्फिन मजदूर संगठन की सुनीता, आटोलाइन इम्प्लाइज यूनियन के जीवन, बेलराइज इंडस्ट्रीज वर्कर्स यूनियन के साहिब सिंह, भाकपा (माले) के ललित मटियाली, सी एन जी टेम्पो यूनियन के सुब्रत विस्वास, समाजसेवी जयदेव मदक, सावित्री आदि वक्ताओं ने बात रखी। पंतनगर विश्व विद्यालय के काफी ठेका महिला मज़दूरों ने भागीदारी की।







