सिंघल फाइबर्स ने तैयार किया देश का पहला पोर्टेबल स्लॉट बियर ट्रैपिंग केज
सिंघल फाइबर्स का नवाचार: देश का पहला पोर्टेबल स्लॉट बियर ट्रैपिंग केज तैयार
मेक इन इंडिया को मजबूती: सिंघल फाइबर्स का भारत निर्मित पहला स्लॉट बियर ट्रैपिंग केज
रुद्रपुर।
सिंघल फाइबर्स एंड वाटरप्रूफिंग सॉल्यूशन्स, रुद्रपुर द्वारा वन विभाग की आवश्यकता और अधिकारियों के विशेष आग्रह पर एक अत्याधुनिक स्लॉट बियर ट्रैपिंग केज का निर्माण किया गया है। यह अपनी तरह का भारत में निर्मित पहला पोर्टेबल स्लॉट ट्रैपिंग केज बताया जा रहा है।
यह ट्रैपिंग केज चार अलग-अलग हिस्सों में खुल जाता है, जिससे इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाया जा सकता है। चार हिस्सों में विभाजित होने के कारण इसका वजन अपेक्षाकृत हल्का हो जाता है और यह मात्र दो मिनट में असेंबल किया जा सकता है। कंपनी के अनुसार, पोर्टेबल होने के बावजूद इसकी मजबूती और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया गया है।
यह विशेष ट्रैपिंग केज केवल बियर ही नहीं, बल्कि टाइगर और लेपर्ड की ट्रैपिंग के लिए भी समान रूप से उपयोगी है। इसकी मजबूत संरचना और पोर्टेबल डिजाइन के कारण इसे दुर्गम एवं संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी आसानी से स्थापित किया जा सकता है, जिससे वन्यजीव प्रबंधन में वन विभाग को बड़ी सुविधा मिलेगी।
सिंघल फाइबर्स एंड वाटरप्रूफिंग सॉल्यूशन्स द्वारा निर्मित टाइगर एवं लेपर्ड ट्रैपिंग केज पहले ही रामनगर, असम, नरेंद्रनगर, लखीमपुर खीरी सहित कई स्थानों पर वन विभाग को उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जहां इनका सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
कंपनी पिछले 10 वर्षों से निरंतर निर्माण कार्य कर रही है तथा फाइबर (एफआरपी) क्षेत्र में 30 वर्षों का अनुभव रखती है। वर्तमान में कंपनी फाइबर पोर्टेबल टॉयलेट, मोबाइल टॉयलेट (4, 6, 8 एवं 10 सीटर), भारतीय सेना के लिए शेल्टर होम्स, ऑफिस कंटेनर्स, सिक्योरिटी गार्ड केबिन्स, फिशरीज कॉलेजों के लिए टैंक एवं हैचरी सिस्टम, पॉलीहाउस, एयरपोर्ट्स के लिए प्लांटर्स, नगर निगम एवं नगर परिषदों के लिए डस्टबिन, कूड़ा गाड़ियां, रिक्शा, सीवर सक्शन मशीन, वाटर टैंक तथा स्काईलिफ्ट बकेट्स का निर्माण कर रही है।
कंपनी डाई मोल्डिंग तकनीक के माध्यम से फाइबर उत्पादों का निर्माण करती है और एसिड व वाटर के लिए एफआरपी लाइनिंग का कार्य भी सफलतापूर्वक कर रही है।
सिंघल फाइबर्स एंड वाटरप्रूफिंग सॉल्यूशन्स द्वारा किया गया यह नवाचार न केवल वन्यजीव प्रबंधन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना रहा है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान और देश की औद्योगिक आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती प्रदान कर रहा है।







