* *सोते हुए मनमोहन सिंह को आया फोन कॉल, वित्त मंत्री बनकर बदल दी भारत की आर्थिक तकदीर*….
* मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि कृतज्ञ राष्ट्र आज उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।
*कहानी उस समय की जब देश दिवालिया होने की एकदम कगार पर खड़ा था*…
* मनमोहन सिंह को एक टेक्नोक्रेट और सफल अर्थशास्त्री के रूप में जाना जाता है।
* उन्होंने वित्तमंत्री रहते हुए भारत की आर्थिक तकदीर को बदलकर रख दिया।
* दरअसल, 1991 में भारत दिवालिया होने के कगार पर खड़ा था।
* विदेशी मुद्रा भंडार में महज 2,500-4,000 करोड़ रुपए रह गए थे, जो दो हफ्तों के आयात के लिए भी पर्याप्त नहीं थे।
* खाड़ी युद्ध के चलते देश में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं।
* भारत का मजबूत साझेदार सोवियत संघ का सूर्य अस्त हो रहा था।
* रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को अपना 47 टन सोना गिरवी रखना पड़ा था। लाइसेंस राज, बंद अर्थव्यवस्था और नियंत्रणों ने विकास के पैरों में जंजीरे बांध दी थी।
* महंगाई दहाई अंक में थी और भुगतान संतुलन भी पूरी तरह से बिगड़ चुका था।
* आर्थिक अस्थिरता के साथ ही भारतीय राजनीति भी हिचकोले खा रही थी।
* पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के बाद 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से दूर थी।
* पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अनुभवी और विद्वान पी.वी. नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना, जो उस समय राजनीति से संन्यास लेने की सोच रहे थे।
* 21 जून 1991 को पी.वी. नरसिम्हा राव ने भारत के 9वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ लेने के बाद राव के सामने सबसे चुनौती भारत की माली हालत को ठीक करने की थी।
* पूर्व आरबीआई गवर्नर, योजना आयोग के उपाध्यक्ष और मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे मनमोहन सिंह, जिनकी ईमानदारी और विशेषज्ञता बेजोड़ थी।
* वह उस समय UGC के अध्यक्ष थे और नीदरलैंड से एक सम्मेलन में हिस्सा लेकर लौटे थे।
* दिल्ली में स्थित अपने घर में थकान से चूर होकर गहरी नींद में सो रहे थे।
* तभी देर रात उनके घर का फोन बजा। यह फोन मनमोहन सिंह के दामाद विजय तनखा ने उठाया।
* फोन के दूसरी तरफ पीवी नरसिम्हा राव के प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीसी अलेक्जेंडर थे।
* अलेक्जेंडर ने विजय तनखा से गुजारिश की वह मनमोहन सिंह को नींद से जगाए।
* विजय तनखा द्वारा मनमहोन सिंह को जगाने के बाद अलेक्जेंडर ने उनसे मुलाकात की।
* अलेक्जेंडर ने मनमहोन सिंह से कहा कि नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव उन्हें वित्त मंत्री बनाना चाहते हैं।
* जून 1991 को राष्ट्रपति भवन में मनमोहन सिंह का शपथ ग्रहण हुआ।
* 24 जुलाई 1991 को संसद में अपना पहला बजट पेश करते हुए उन्होंने अपने पहले बजट भाषण में कहा, “विक्टर ह्यूगो ने लिखा है कि दुनिया की कोई ताकत उस विचार को रोक नहीं सकती जिसका समय आ गया हो।
* उन्होंने भारत के बाजार को दुनिया के लिए खोल दिया। बजट में उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नींव पड़ी।
* जिसे आम भाषा में LPG कहा गया।
* लाइसेंस राज खत्म हुआ और विदेशी निवेश के दरवाजे खुल गए।
* सार्वजनिक क्षेत्र का एकाधिकार समाप्त हुआ। रुपए का अवमूल्यन किया गया। इससे निर्यात को बढ़ावा मिला।
* इसका सकारात्मक असर जल्द ही दिखने लगा। भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर आई। विदेशी निवेश बढ़ा, विकास दर ऊंची हुई, और भारत बंद अर्थव्यवस्था से वैश्विक खिलाड़ी बना।
* इसका सकारात्मक असर जल्द ही दिखने लगा। भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर आई।
* विदेशी निवेश बढ़ा, विकास दर ऊंची हुई, और भारत बंद अर्थव्यवस्था से वैश्विक खिलाड़ी बना।
* आज, जब भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, उसकी जड़ें 1991 के उन सुधारों में हैं।
* वो रात का फोन कॉल न केवल मनमोहन सिंह की जिंदगी बदला, बल्कि करोड़ों भारतीयों की तकदीर संवारी।
साभार ##
विनम्र श्रद्धांजलि: स्व: डॉ मनमोहन सिंह..






