आज प्रस्तुत बजट देश के विकास की बात तो करता है, लेकिन आम जनमानस की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता। जनता को उम्मीद थी कि इस बार बजट उनके रोजमर्रा के संघर्ष को कम करेगा — महंगाई से राहत देगा, आय बढ़ाएगा और टैक्स का बोझ घटाएगा। परंतु ऐसा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता।
सबसे बड़ी कमी यह है कि मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को आयकर में कोई बड़ी राहत नहीं मिली। आज का आम आदमी महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और घर के खर्चों से पहले ही दबा हुआ है। ऐसे समय में टैक्स राहत जरूरी थी।
“विकास की बात, राहत नदारद: बजट पर बोले कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. गणेश उपाध्याय”
दूसरी बात — बेरोजगारी देश की बड़ी समस्या है। बजट में रोजगार बढ़ाने की बातें तो हैं, पर तुरंत असर डालने वाली ठोस योजना का अभाव दिखता है। युवा वर्ग को उम्मीद थी कि उनके भविष्य के लिए मजबूत कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीण भारत की बात करें तो किसानों और मजदूरों की आय बढ़ाने के लिए और साहसी निर्णय की जरूरत थी। गाँव मजबूत होंगे तभी देश मजबूत होगा। यह प्रतिक्रिया डा गणेश उपाध्याय प्रवक्ता उत्तराखंड कांग्रेस ने कहीं और दीर्घकालीन योजनाएँ अच्छी हो सकती हैं, लेकिन आम जनता को तत्काल राहत भी उतनी ही आवश्यक है। विकास का असली अर्थ तभी है जब हर नागरिक अपने जीवन में सुधार महसूस करे।







