चंदन हॉस्पिटल विवादों में घिरा, जीवित मरीज को मृत दर्शाने के आरोप पर छात्रों का प्रदर्शन

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अस्पताल गेट पर धरना: छात्रसंघ अध्यक्ष अभिषेक गोस्वामी के नेतृत्व में जोरदार नारेबाजी

प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग, कार्रवाई न होने पर आंदोलन उग्र करने की चेतावनी

हल्द्वानी। शहर के चर्चित चंदन हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। हाल ही में सामने आए एक मामले के विरोध में बुधवार को छात्रों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। छात्रसंघ अध्यक्ष अभिषेक गोस्वामी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र अस्पताल गेट पर धरने पर बैठ गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि वे पीड़ित पक्ष की सहायता के लिए अस्पताल पहुंचे थे, जहां कर्मचारियों द्वारा उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। छात्रों ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन लगातार विवादों में घिरा रहा है और अब भी अपने व्यवहार में सुधार नहीं कर रहा है।

विवाद का मुख्य कारण अस्पताल में भर्ती एक जीवित मरीज को रिकॉर्ड में मृत दर्शाने का आरोप है। यह खबर सामने आते ही क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि यह आरोप सही है तो यह मानवता और चिकित्सा व्यवस्था दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

छात्रों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं संस्थान की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल पहले भी विवादों में रहा है और इसे “मौत का अस्पताल” तक बताया।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी एक मामले में मृतक के शव को रोके जाने और धन की मांग किए जाने का आरोप लगा था, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा था। अब जीवित मरीज को मृत दर्शाने के आरोप ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है।

प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि पहाड़ के भोले-भाले लोगों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से अस्पताल की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

अब जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और अस्पताल प्रबंधन की ओर से लापरवाही बरती गई या नहीं, यह जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल शहर में इस घटना को लेकर चर्चा और आक्रोश दोनों जारी हैं।


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