*_नरवणे की किताब पर लोकसभा में हंगामा, राहुल बोले, ‘क्या चीन पर बोलने की अनुमति नहीं है’_*

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*_नरवणे की किताब पर लोकसभा में हंगामा, राहुल बोले, ‘क्या चीन पर बोलने की अनुमति नहीं है’_*

नई दिल्ली : राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच खूब नोकझोंक हुई. भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के एक बयान पर बात इतनी अधिक बढ़ गई कि स्पीकर को लोकसभा की कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ गई. तेजस्वी ने यूपीए शासन को लेकर कुछ टिप्पणी की, राहुल गांधी उस पर जवाब देना चाहते थे. लेकिन राहुल गांधी इसके लिए जिस किताब का जिक्र करना चाहते थे, स्पीकर ने उसकी इजाजत नहीं दी. पूरा विवाद इससे ही जुड़ा है. राहुल का कहना था कि सूर्या ने कांग्रेस की देशभक्ति और चरित्र पर सवाल खड़े किए हैं, इसलिए वह एक पूर्व सेना प्रमुख के उस संस्मरण के अंश को पढ़ना चाहते हैं जो एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

इसके बाद प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस बयान पर हंगामा मच गया, जिसमें वह पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की एक किताब को लेकर कुछ कहना चाहते थे. सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूछा कि राहुल गांधी जिस किताब का जिक्र करना चाहते हैं, वह किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है. इस पर राहुल गांधी ने कहा कि नरवणे की किताब को सरकार ने ही प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी है. इस पर सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि यदि सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी है, तो इसका मतलब है कि उसमें लिखित तथ्य ऑन रिकॉर्ड नहीं हैं.

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यदि राहुल गांधी किसी मैगजीन को ‘कोट’ करना चाहते हैं, तो वे ऐसा नहीं कर सकते हैं, क्योंकि स्पीकर ने इसकी इजाजत नहीं दी है. दरअसल, राहुल गांधी नरवणे की किताब को लेकर “कारवां” मैगजीन में छपे एक लेख का जिक्र करना चाहते थे, जिसमें डोकलाम को लेकर टिप्पणी की गई है.

राहुल गांधी ने कहा कि हम चीन पर कुछ नहीं बोल रहे हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लेकर कुछ बातें कही गई हैं, उसको सामने लाना चाहते हैं, इसकी अनुमति दी जाए. राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख का हवाला देते हुए चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का विषय उठाने का प्रयास किया और दावा किया कि पूर्व सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के चरित्र के बारे में भी बताया है.

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष सदन में पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे की पुस्तक “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” के मसौदे के उस अंश को पढ़ना चाहते थे, जिसमें 31 अगस्त, 2020 की एक घटना का उल्लेख है.

 

इस मुद्दे पर हंगामा होने के बाद स्पीकर ने साफ-साफ कहा कि किसी भी हाल में इस मुद्दे को उठाने की इजाजत नहीं देंगे, और राहुल गांधी नहीं बोलना चाहते हैं तो वह अगले स्पीकर का नाम लेंगे. स्पीकर ने अगले वक्ता के रूप में अखिलेश यादव का भी नाम लिया.

इस बीच अखिलेश यादव ने स्पीकर से अपील की कि यदि चीन को लेकर राहुल गांधी कुछ कहना चाहते हैं और यह देश के हित में है, तो उन्हें इसकी अनुमति दी जानी चाहिए. हालांकि, स्पीकर ने अनुमति नहीं दी और सदन की कार्यवाही एक घंटे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

कांग्रेस नेता की बातों का विरोध करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “ये पूरी तरह काल्पनिक बातें हैं, नेता प्रतिपक्ष सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें इस विषय पर बोले जाने से रोका जाए.” संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा, “आप (राहुल) देश को नीचा दिखाकर क्या कहना चाहते हैं…आप एक ऐसी बात कर रहे हैं जिसका कोई स्रोत नहीं है…आप ऐसी कोई बात मत बोलिए, जिससे सेना का मनोबल गिरे.”

बिरला ने राहुल गांधी से कहा, “आप आसन की व्यवस्था की लगातार अवमानना कर रहे हैं, आपसे विनम्र आग्रह है कि व्यवस्था बनाए रखें…अगर हम सेना और सेना की कार्रवाइयों की आलोचना करेंगे तो यह उचित नहीं है.” राहुल गांधी ने कहा कि जो हुआ है, उसके बारे में सेना के हर जवान को पता है, लेकिन सरकार इस बात को जनता से छिपाना चाहती है.

दरअसल, इस विवाद की शुरुआत भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या के एक बयान से हुई. उन्होंने कहा कि यूपीए के 10 साल के समय में राष्ट्रपति के अभिभाषण में कभी भी देश की संस्कृति कैसे मजबूत हो, सांस्कृतिक उन्नति कैसे हो, युवाओं की सोच कैसे बदले, इस पर कभी भी कुछ भी नहीं कहा गया. राहुल गांधी ने कहा कि क्योंकि कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाया गया है, लिहाजा वह नरवणे की किताब का जिक्र करना चाहते हैं, जिसमें उन्होंने पीएम और राजनाथ सिंह को लेकर गंभीर टिप्पणियां की हैं और यह टिप्पणी कारवां मैगजान में प्रकाशित हुआ है.

 

भाजपा ने इस पर नरवणे का एक बयान सोशल मीडिया एक्स पर प्रकाशित किया है. इसमें अमित मालवीय ने कहा, “राहुल गांधी सुधरने वाले नहीं हैं और संसदीय विशेषाधिकार का दुरुपयोग करके भारत और उसके सशस्त्र बलों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण माहौल बना रहे हैं.पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे ने स्पष्ट रूप से कहा है, “एक इंच भी ज़मीन नहीं खोई है.”तथ्य मायने रखते हैं. संस्थाएं मायने रखती हैं. और सार्वजनिक जीवन में ज़िम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.”


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