*_यह बिना आर्थिक रणनीति और दूरदर्शिता वाला बजट है: पी चिदंबरम_*

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*_यह बिना आर्थिक रणनीति और दूरदर्शिता वाला बजट है: पी चिदंबरम_*

नई दिल्ली: पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने रविवार को केंद्र की बीजेपी सरकार पर यूनियन बजट 2026-27 को लेकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा बजट है जिसमें कोई आर्थिक रणनीति और आर्थिक समझदारी नहीं है.

पार्टी ऑफिस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीनियर कांग्रेस नेता ने कहा, ‘बजट से पहले हर कमेंटेटर, लेखक और इकोनॉमिक्स का हर स्टूडेंट, आज संसद में वित्त मंत्री के भाषण में जो सुना, उससे हैरान होगा. मैं मानता हूं कि बजट सिर्फ सालाना कमाई और खर्च का बयान नहीं होता. मौजूदा हालात में बजट भाषण में एक ऐसी कहानी होनी चाहिए जो कुछ दिन पहले जारी किए गए इकोनॉमिक सर्वे में बताई गई बड़ी चुनौतियों का समाधान करे.’

यह कहते हुए कि उन्हें पक्का नहीं पता कि सरकार और वित्त मंत्री ने इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 पढ़ा है या नहीं, उन्होंने कहा, ‘अगर उन्होंने पढ़ा होता तो ऐसा लगता है कि उन्होंने इसे पूरी तरह से नजर अंदाज करने का फैसला कर लिया है और लोगों पर शब्द, खासकर शॉर्ट फॉर्म, फेंकने के अपने पसंदीदा काम पर वापस आ गए हैं.’

कम से कम 10 चुनौतियों का जिक्र करते हुए, जिनमें ‘खराब’ रोजगार की स्थिति, खासकर युवाओं में बेरोजगारी शामिल है, चिदंबरम ने कहा, ‘वित्त मंत्री के भाषण में इनमें से किसी भी बात पर ध्यान नहीं दिया गया.’ उन्होंने दावा किया कि एक अकाउंटेंट के स्टैंडर्ड के हिसाब से भी, 2025-26 में फाइनेंस के मैनेजमेंट का यह एक खराब हिसाब था.

कांग्रेस के सीनियर नेता ने कहा,’रेवेन्यू रिसिप्ट्स में 78,086 करोड़ रुपये की कमी थी, कुल खर्च में 1,00,503 करोड़ रुपये की कमी थी. रेवेन्यू खर्च में 75,168 करोड़ रुपये की कमी थी और कैपिटल खर्च में 1,44,376 करोड़ रुपये की कटौती की गई (केंद्र 25,335 करोड़ रुपये और राज्य 1,19,041 करोड़ रुपये). इस खराब परफॉर्मेंस को समझाने के लिए एक शब्द भी नहीं कहा गया. असल में केंद्र का कैपिटल खर्च 2024-25 में जीडीपी के 3.2 प्रतिशत से गिरकर 2025-26 में 3.1 प्रतिशत हो गया है.

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय बजट में अहम सेक्टरों और कार्यक्रमों में फंड में कटौती की गई है. कांग्रेस के सीनियर नेता ने आरोप लगाया कि बहुत ज्यादा तारीफ वाले जल जीवन मिशन पर खर्च को ‘बेरहमी से’ 67,000 करोड़ रुपये से घटाकर सिर्फ 17,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

चिदंबरम ने आगे कहा, ‘बजट भाषण की सबसे गंभीर आलोचना यह है कि वित्त मंत्री योजनाओं, कार्यक्रमों, मिशनों, संस्थानों, पहलों, फंडों, समितियों, हब वगैरह की संख्या बढ़ाने से थकतीं नहीं हैं. मैंने कम से कम 24 गिने. मैं यह आपकी कल्पना पर छोड़ता हूं कि इनमें से कितनी अगले साल तक भुला दी जाएंगी और गायब हो जाएंगी.’

भाषण के पार्ट बी का जिक्र करते हुए सीनियर कांग्रेस नेता ने कहा, ‘इनकम टैक्स एक्ट, 2026 के पास होने के महीनों बाद जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा. वित्त मंत्री ने कुछ रेट्स में बदलाव किया है. हालांकि कई छोटे-मोटे बदलावों के असर की सावधानी से जांच करनी होगी, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि ज्यादातर लोगों का इनकम टैक्स या इनकम टैक्स रेट से कोई लेना-देना नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘जहां तक ​​इनडायरेक्ट टैक्स की बात है, आम आदमी का संबंध भाषण के सिर्फ पैराग्राफ 159, 160 और 161 से होगा. मैं इन छोटी रियायतों का स्वागत करता हूं.’ कांग्रेस के सीनियर नेता ने आगे कहा, ‘हमारा फैसला यह है कि यह एक ऐसा बजट है जिसमें कोई आर्थिक रणनीति नहीं है, कोई आर्थिक समझदारी नहीं है.।


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