*_दिल्ली विधानसभा और पंजाब सरकार के बीच चल रही तनातनी, लखनऊ तक पहुंची गूंज_*

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  1. *_दिल्ली विधानसभा और पंजाब सरकार के बीच चल रही तनातनी, लखनऊ तक पहुंची गूंज_*

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठे मुद्दे का शोर मंगलवार को लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में सुनाई दी. सम्मेलन के दौरान दिल्ली और पंजाब सरकार के बीच चल रही तनातनी की गूंज सुनाई दी. दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन की गरिमा और शक्तियों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया. उन्होंने पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस द्वारा आतिशी के समर्थन में की गई कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

 

सदन की स्वायत्तता पर प्रहार: विजेंद्र गुप्ता

 

सम्मेलन को संबोधित करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली विधानसभा में हाल ही में एक गंभीर विषय पर विशेषाधिकार समिति विचार-विमर्श कर रही थी. सदन के सदस्यों की भावनाओं के अनुरूप उस पर तर्क-वितर्क और निर्णय लिए जा रहे थे. उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जब एक राज्य की विधानसभा किसी मामले का संज्ञान ले रही हो, तो दूसरे राज्य की सरकार और पुलिस का उसमें हस्तक्षेप करना न केवल अनैतिक है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है.

 

विजेंद्र गुप्ता ने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “यह कौन सा न्याय है? एक विधानमंडल में किसी विषय पर चर्चा हो रही है, पक्ष और विपक्ष उसमें शामिल हैं, और अध्यक्ष के माध्यम से कार्यवाही संचालित की जा रही है. ऐसे में दूसरे राज्य की पुलिस का दखल देना संसदीय प्रणाली की मर्यादाओं का उल्लंघन है.” उन्होंने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की.

 

मंच पर मौजूद थे दिग्गज, बढ़ी सरगर्मी

 

इस महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह कर रहे थे. खास बात यह रही कि जिस समय विजेंद्र गुप्ता पंजाब सरकार की आलोचना कर रहे थे, उस समय पंजाब विधानसभा के स्पीकर भी कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे. गुप्ता के कड़े रुख ने सम्मेलन में मौजूद अन्य राज्यों के पीठासीन अधिकारियों का ध्यान भी इस ओर खींचा.

 

यह विवाद 6 जनवरी को दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान शुरू हुआ था. भाजपा विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष का आरोप है कि प्रदूषण पर चर्चा के दौरान आतिशी ने सिख गुरुओं के बलिदान के संदर्भ में कुछ ‘अमर्यादित’ टिप्पणियां की थीं. इसके बाद सदन में भारी हंगामा हुआ था. इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसे ‘आप’ ने ‘डॉक्टर्ड’ यानी छेड़छाड़ किया हुआ बताया.

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने हाल ही में दावा किया था कि दिल्ली की फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट के अनुसार वीडियो सही है, जबकि ‘आप’ का कहना है कि रिपोर्ट में कहीं भी यह साबित नहीं हुआ कि आतिशी ने ‘गुरु’ शब्द का इस्तेमाल अपमानजनक संदर्भ में किया. विशेषाधिकार समिति अब आतिशी के इस जवाब और उनके द्वारा मांगे गए दस्तावेजों पर विचार कर रही है.

आतिशी पर लगे आरोपों के बीच पंजाब में कानूनी कार्रवाई की गई, जिसे दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने ‘राजनीति से प्रेरित’ और ‘सदन के कार्य में बाधा’ करार दिया है. विजेंद्र गुप्ता का तर्क है कि यदि कोई मामला पहले से ही दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के अधीन है, तो किसी अन्य राज्य की कार्यकारी शक्ति को उसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए.

 

संसदीय मर्यादा पर केंद्रित रहा संबोधन

 

अपने संबोधन के अंत में विजेंद्र गुप्ता ने पीठासीन अधिकारियों से आग्रह किया कि वे विधानसभाओं की स्वायत्तता की रक्षा के लिए एकजुट हों. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि राज्यों के बीच इस तरह का हस्तक्षेप बढ़ा, तो इससे संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर बुरा असर पड़ेग. सम्मेलन में इस मुद्दे पर हुई चर्चा अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि विजेंद्र गुप्ता का यह बयान आने वाले दिनों में दिल्ली और पंजाब के विधायी संबंधों में और अधिक कड़वाहट पैदा कर सकता है.


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