*_द ग्रेट खली ने हिमाचल के इस तहसीलदार पर लगाए करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप, CM सुक्खू से जांच की मांग_*

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*_द ग्रेट खली ने हिमाचल के इस तहसीलदार पर लगाए करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप, CM सुक्खू से जांच की मांग_*

शिमला: WWE रेसलर रहे दिलीप सिंह राणा उर्फ ‘द ग्रेट खली’ एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. इस बार रिंग में नहीं बल्कि अन्य वजह से सुर्खियों में हैं. द ग्रेट खली ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पांवटा साहिब राजस्व विभाग में तैनात तहसीलदार पर करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार और जमीनी दस्तावेजों में हेराफेरी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. खली ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में जांच की मांग की है.

 

जमीन विवाद मामले में सिरमौर के बाद शिमला में खली की PC

 

मंगलवार को शिमला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में खली ने कहा, देवों और वीरों की भूमि पांवटा साहिब में ऐसे भ्रष्टाचारी अफसर बैठे हैं, जिन्हें लगता है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. सारा पांवटा साहिब बेच दिया गया है. वे अधिकारी जरूर हैं, लेकिन संविधान से ऊपर नहीं है. पांवटा साहिब के राजस्व विभाग के अधिकारियों ने उनके करीब 16 बीघा जमीन में दस्तावेज में कई धोखाधड़ी की है. इसमें करीब 12 बीघा जमीन को खड्ड बता दिया गया है.

 

खली ने आरोप लगाया कि, तहसीलदार समेत कई बड़े अधिकारी इस पूरे गड़बड़झाले में शामिल हैं और क्षेत्र के 100 से अधिक लोगों के साथ इस तरह की धोखाधड़ी हुई है. खली ने बताया कि पांवटा साहिब के सूरजपुर गांव में उन्होंने 12 से 13 साल पहले 16 बीघा जमीन खरीदी थी, लेकिन अब राजस्व विभाग उनकी जमीन को किसी और का बता रहा है और उनके करीब 12 बीघा जमीन को खड्ड में बताया जा रहा है.

 

मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे पूरा मामला: खली

 

द ग्रेट खली ने कहा कि, गांव सूरजपुर और भाटांवाली गांव में 100 से अधिक लोगों के साथ भी बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है. लोगों की पुश्तैनी जमीन को इधर से उधर करने के आरोप हैं. इस दौरान खली ने राजस्व विभाग पर खसरा नंबरों में हेराफेरी कर लोगों की जमीन अन्य लोगों को गैरकानूनी तरीके से बेचने और दस्तावेजों से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं. खली ने इस बाबत प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच के लिए गठित की गई कमेटी को भी बदला जाए और ईमानदार अधिकारियों की एक नई टीम गठित कर पूरे गड़बड़झाले का खुलासा किया जाए.

 

क्या है पूरा मामला?

 

द खली ने कहा कि, “संबंधित जमीन 2005 में एक महिला के नाम पर कानूनी तौर पर पंजीकृत थी और हमने कानूनी प्रक्रिया के बाद उससे जमीन का मालिकाना हक हासिल किया. साल 2013 में मेरे पिता ज्वाला राम ने उस महिला से यह जमीन कानूनी तौर पर खरीदी थी और तब से हमारे परिवार के पास इस संपत्ति का मालिकाना हक है. कागज होने के बावजूद, पांवटा साहिब के तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी अब अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग कर रहे हैं और प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलकर जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं. 20 मई 2025 को पहली बार कुछ लोगों ने जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की. इसके अलावा 18 जुलाई 2025 को फिर से जमीन में घुसने का प्रयास किया गया, लेकिन ग्रामीणों, महिलाओं और शिकायतकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर यह प्रयास नाकाम कर दिया.”

 

तहसीलदार ने आरोपों को नकारा

 

बता दें कि खली पिछले कुछ समय से तहसीलदार पर लगातार आरोप लगा रहे हैं. खली के आरोपों के बाद पांवटा साहिब के तहसीलदार ऋषभ शर्मा की पिछले दिनों प्रतिक्रिया सामने आई थी. तहसीलदार ने सभी आरोपों का पूरी तरह खंडन करते हुए कहा कि, “जिस जमीन पर महिलाएं और खली दावा कर रहे हैं, वो जमीन उनकी नहीं है. राजस्व विभाग अपनी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही कार्य कर रहा है. किसी भी तरह की मिलीभगत और अवैध कब्जे के आरोप गलत हैं. खली जबरन जमीन पर कब्जा कर रहे हैं. जिस जमीन को खली अपना बता रहे हैं वो जमीन विमला देवी के नाम पर है. खली ने खाता नंबर- 8 में जमीन खरीदी है और वह जमीन इतनी अच्छी नहीं हैं. खली ने 38 बीघा के खाता नंबर 6 पर कब्जा किया हुआ है, जो उस जमीन से बेहतर है. हमने कई बार उन्हें निशानदेही के लिए भी बुलाया, लेकिन वो इसके लिए नहीं आए. यदि खली को हमारे ऊपर विश्वास नहीं है, तो वो कोई रिटायर्ड पटवारी, तहसीलदार के साथ आकर अपनी जमीन की निशानदेही करवा सकते हैं.”


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