*_अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 69 पैसे लुढ़का, 92.18 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर_*

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*_अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 69 पैसे लुढ़का, 92.18 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर_*
मुंबई: वैश्विक मोर्चे पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल ने भारतीय मुद्रा बाजार में हड़कंप मचा दिया है. बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 69 पैसे की भारी गिरावट के साथ 92.18 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया.
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का दबाव
मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष है. इस तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा (Brent Crude) की कीमतें तेजी से बढ़कर 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं. चूंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की सेहत के लिए सीधा खतरा पैदा करती हैं.
बाजार का हाल और होली का अंतराल
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Forex Market) में रुपया आज 92.05 पर खुला और कुछ ही देर में फिसलकर 92.18 के स्तर पर आ गया. गौर करने वाली बात यह है कि सोमवार को रुपया 91.49 पर बंद हुआ था. मंगलवार को देश में होली के उपलक्ष्य में बाजार बंद थे, जिसके कारण दो दिनों का संचित वैश्विक दबाव आज बाजार खुलते ही रुपये पर भारी पड़ा.
विदेशी निवेशकों की निकासी
रुपये पर दबाव बनाने वाला एक अन्य प्रमुख कारक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से की जा रही लगातार बिकवाली है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को विदेशी निवेशकों ने 3,295.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. जब विदेशी निवेशक अपना पैसा निकालकर बाहर ले जाते हैं, तो वे डॉलर की मांग बढ़ाते हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है.

अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये के इस ऐतिहासिक स्तर तक गिरने से भारत का आयात बिल काफी बढ़ जाएगा. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है:

महंगाई में बढ़ोतरी: आयातित कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी.

महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य विदेशी कलपुर्जों के दाम बढ़ सकते हैं.

व्यापार घाटा: महंगे आयात और कमजोर रुपये की वजह से देश का व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका है, जो राजकोषीय गणित को बिगाड़ सकता है.

फिलहाल, बाजार की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप पर टिकी हैं कि क्या केंद्रीय बैंक रुपये की गिरावट थामने के लिए डॉलर की बिक्री करेगा.


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