*_मोदी सरकार का ‘फरमान’, ‘पीएम केयर्स फंड संंबंधित सवाल नहीं पूछ सकते’, बिफरी कांग्रेस_*

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*_मोदी सरकार का ‘फरमान’, ‘पीएम केयर्स फंड संंबंधित सवाल नहीं पूछ सकते’, बिफरी कांग्रेस_*

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री देखभाल कोष (पीएम केयर्स फंड), प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) और राष्ट्रीय रक्षा कोष (एनडीएफ) से संबंधित किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया जाएगा. इस संबंध में पीएमओ ने लोकसभा सचिवालय को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है. कांग्रेस पार्टी ने इस पर तीखी टिप्पणी की है.

कांग्रेस पार्टी ने इसे सरकार की तानाशाही बताया है. पार्टी ने इसको लेकर कई सवाल पूछे हैं. कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर सवाल पूछते हुए लिखा, “सांसद जनता के प्रतिनिधि हैं, उन्हें जनहित के सवाल पूछने से क्यों रोका जा रहा है ? मोदी सरकार जनता के लाखों-करोड़ रुपये का हिसाब क्यों नहीं देना चाहती ? आखिर मोदी सरकार देश की जनता से क्या छिपाना चाह रही है ? क्या अब देश की संसद नरेंद्र मोदी की मनमर्जी से चलेगी ?”

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने इस संबंध में एक खबर प्रकाशित की है. कांग्रेस पार्टी ने इस खबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है. अखबार के अनुसार पीएमओ ने बताया है कि इन तीनों फंडों से संबंधित संसदीय सवालों को लोकसभा की कार्यवाहियों से संबंधित नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं किए जाएंगे. पीएमओ ने 30 जनवरी को ही इस बाबत सूचना दे दी थी. उनके अनुसार पीएमओ ने लोकसभा सचिवालय को सूचित किया कि इन तीनों कोषों से संबंधित प्रश्न और मामले लोकसभा की कार्यवाहियों के नियम 41(2)(vii) और 41(2)(xviii) के तहत स्वीकार्य नहीं हैं.

 

लोकसभा के नियम 41(2)(viii) में कहा गया है कि सवाल ऐसे किसी मामले से संबंधित नहीं होना चाहिए, जो भारत सरकार के प्राथमिक अधिकार क्षेत्र में न हो. इसी तरह से लोकसभा के नियम 41(2)(xvii) में कहा गया है कि प्रश्न ऐसे किसी मामले से संबंधित नहीं होना चाहिए, जो उन निकायों या व्यक्तियों के नियंत्रण में हो जो भारत सरकार के प्रति प्राथमिक रूप से उत्तरदायी नहीं हैं.पीएमओ के अनुसार क्योंकि इन कोषों का निर्माण स्वैच्छिक जन योगदान से बना था, लिहाजा अब इस पर जानकारी साझा करने की जरूरत नहीं है, साथ ही इसमें भारत की संचित निधि से कोई भी आवंटन नहीं किया गया था.

पीएमओ ने बताया है कि यदि कोई भी सांसद इन फंडों से संबंधित सवाल पूछते हैं, या फिर उसे शून्यकाल में उठाने की कोशिश करते हैं, तो इन प्रावधानों में दी गई शर्तों का प्रयोग किया जा सकता है.

पीएम केयर्स फंड का निर्माण कोविड के समय 2020 में किया गया था. इसको लेकर पीएमओ ने एक अलग से वेबसाइट बनाई थी. इस फंड से कोविड महामारी से निपटने के लिए जो भी जरूरत थी, उसमें योगदान करना था. सरकार ने प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) नाम से इसे बनाया था. यह एक ट्रस्ट की भांति था.इसे पब्लिक चैरिटेबल ट्र्स्ट 1908 के तहत रजिस्टर्ड किया गया था. 27 मार्च 2020 को रजिस्टर्ड किया गया था. वेबसाइट में अंतिम जानकारी मार्च 2023 की है, जिसमें इसके पास शेष राशि 6283.7 करोड़ रुपये थी.

 

केंद्र सरकार ने जनवरी 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट को जानकारी दी थी कि पीएम केयर्स फंड एक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में स्थापित किया गया है. इसे संविधान या संसद या फिर राज्य द्वारा बनाए गए कानून के तहत नहीं बनाया गया है. यही वजह है कि यह आरटीआई के दायरे में भी नहीं आता है.

 

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त, 2020 को पीएम केयर फंड से एनडीआरएफ में धनराशि हस्तांतरित करने का आदेश देने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने पीएम केयर्स फंड को कैग के ऑडिट से भी मुक्त किया था.

पीएमओ की बेवसाइट पर इस फंड के बारे में लिखा गया है, “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी या किसी अन्य प्रकार की आपात स्थिति, मानव निर्मित या प्राकृतिक आपदा अथवा संकट से संबंधित किसी भी प्रकार की राहत या सहायता सहित स्वास्थ्य सेवा या फर्मास्यूटिकल सुविधाओं का निर्माण या अपग्रेडेशन, अन्य जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिलेवेंट रिसर्च हेतु फंडिंग या अन्य प्रकार की मदद हेतु.”

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) की स्थापना जनवरी 1948 में जनता के चंदे से पाकिस्तान से विस्थापित लोगों की सहायता के लिए की गई थी. इसके संसाधनों का उपयोग अब मुख्य रूप से बाढ़, चक्रवात और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों के परिवारों और बड़ी दुर्घटनाओं और दंगों के पीड़ितों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए किया जाता है.

राष्ट्रीय रक्षा कोष (एनडीएफ) का उपयोग सशस्त्र बलों, जिनमें अर्धसैनिक बल भी शामिल हैं, के सदस्यों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए किया जाता है.


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