*_’भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर’, राष्ट्र के नाम संबोधन में बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू_*

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*_’भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर’, राष्ट्र के नाम संबोधन में बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू_*

नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को देशवासियों को संबोधित किया. राष्ट्रपति मुर्मु ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत लगातार आर्थिक वृद्धि दर्ज कर रहा है और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है.

उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस का पावन पर्व हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य में देश की दशा और दिशा का अवलोकन करने का अवसर होता है. स्वाधीनता संग्राम के बल पर 15 अगस्त 1947 के दिन से हमारे देश की दशा बदली, भारत स्वाधीन हुआ, हम अपनी राष्ट्र नीति के निर्माता बने. 26 जनवरी 1950 के दिन से हम अपने गणतंत्र को संवैधानिक आदर्श की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं. उसी दिन हमने अपने संविधान को पूरी तरह से लागू किया.

राष्ट्रपति ने कहा हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणतंत्र का मूलभूत दस्तावेज है. वहीं वंदे मातरम् भारत माता के दिव्य स्वरूप की आराधना है, जो प्रत्येक भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना जागृत करती है.

रक्षा क्षेत्र में हमारी आत्मनिर्भरता ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की ऐतिहासिक सफलता को संभव बनाया. उन्होंने कहा कि एकता की भावना को बढ़ावा देने के लिए किया गया हर प्रयास बहुत सराहनीय है. राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मतदान के लिए महिलाओं की बढ़ती भागीदारी हमारे गणतंत्र को एक सशक्त आयाम प्रदान करती है.

देश के विकास में महिलाओं की भूमिका अहम

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में ‘नारी शक्ति’ की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. महिलाओं का सक्रिय और समर्थ होना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तीकरण हेतु किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है. ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन मिला है. ‘प्रधानमंत्री – जन धन योजना’ के तहत अब तक 57 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं. इनमें महिलाओं के खाते लगभग 56 प्रतिशत हैं.

भारत की बेटियों ने खेल में रचा इतिहास

हमारी बहनें और बेटियां, परंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं. महिलाएं देश के समग्र विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं. दस करोड़ से अधिक सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी बहनें विकास की नई परिभाषा लिख रही हैं. महिलाएं, खेत-खलिहानों से लेकर अन्तरिक्ष तक, स्व-रोजगार से लेकर सेनाओं तक, अपनी प्रभावी पहचान बना रही हैं. खेल-कूद के क्षेत्र में हमारी बेटियों ने विश्व-स्तर पर नए प्रतिमान स्थापित किए हैं. पिछले वर्ष नवंबर में, भारत की बेटियों ने आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप और उसके बाद ब्लाइंड महिला टी20 विश्व कप जीतकर स्वर्णिम इतिहास रचा है. पिछले ही वर्ष शतरंज विश्व कप का फाइनल मैच भारत की ही दो बेटियों के बीच खेला गया. ये उदाहरण खेल-जगत में हमारी बेटियों के वर्चस्व का प्रमाण हैं. ऐसी बेटियों पर देशवासियों को गर्व है.

राष्ट्रपति ने कहा, पंचायती राज संस्थाओं में महिला जन-प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46 प्रतिशत है. महिलाओं के राजनैतिक सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से, महिलाओं के नेतृत्व द्वारा विकास की सोच को अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी. विकसित भारत के निर्माण में नारी-शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी. उनके बढ़ते हुए योगदान से, हमारा देश महिला-पुरुष समानता पर आधारित समावेशी गणतन्त्र का उदाहरण प्रस्तुत करेगा.

किसान अर्थ व्यवस्था के मेरुदंड

उन्होंने कहा कि हमारे अन्नदाता किसान, हमारे समाज के तथा अर्थ-व्यवस्था के मेरुदंड हैं. किसानों की परिश्रमी पीढ़ियों ने हमारे देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया है. किसानों के परिश्रम के बल पर ही हम कृषि आधारित उत्पादों का निर्यात कर पा रहे हैं. अनेक किसानों ने सफलता के अत्यंत प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किए हैं. किसान भाई-बहनों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिले, रियायती ब्याज पर ऋण मिले, प्रभावी बीमा सुरक्षा मिले, खेती के लिए अच्छे बीज मिलें, सिंचाई की सुविधाएं मिलें, अधिक उत्पादन के लिए उर्वरक उपलब्ध हों, उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा जाए तथा जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए, इन सभी विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है. ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ के द्वारा किसान भाई-बहनों के योगदान को आदर दिया जा रहा है तथा उनके प्रयासों को संबल प्रदान किया जा रहा है.

दशकों से गरीबी के साथ जूझ रहे करोड़ों देशवासियों को, गरीबी की सीमा-रेखा से ऊपर लाया गया है. साथ ही, ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि वे पुनःट गरीबी से पीड़ित न होने पाएं. अंत्योदय की संवेदना को कार्यरूप देने वाली, विश्व की सबसे बड़ी योजना, ‘पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना’ इस सोच पर आधारित है कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले हमारे देश में कोई भी भूखा न रहे. इस योजना से लगभग 81 करोड़ लाभार्थियों को सहायता मिल रही है. गरीब परिवारों के लिए बिजली-पानी तथा शौचालय की सुविधा से युक्त 4 करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण करके, उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने तथा आगे बढ़ने का आधार प्रदान किया गया है. गरीबों के कल्याण के हित में किए गए ऐसे प्रयास महात्मा गांधी के सर्वोदय के आदर्श को कार्यरूप देते हैं.


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