- *_कैसे बना आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद? जिसने कभी नरेंद्र मोदी को दी थी मारने की धमकी_*
हैदराबादः राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. इस हमले की किसी भी आतंकी संगठन ने जिम्मेवारी नहीं ली है. सरकार ने भी अबतक की जांच के बाद कुछ नहीं कहा है. लेकिन, जिस तरह से जांच चल रही है उससे यह एक संदिग्ध आतंकी हमला लग रहा है. आशंका जतायी जा रही है जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले से इसके तार जुड़े हो सकते हैं.दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों की नज़र एक बार फिर पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद पर टिक गई है. शुरुआती जांच में कुछ गिरफ्तार लोगों के तार इसी संगठन से जुड़े बताए जा रहे हैं
जैश-ए-मोहम्मद का गठनः
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की स्थापना 31 जनवरी 2000 को मौलाना मसूद अजहर ने कराची में की थी. यह वही मसूद अजहर है जिसे भारत ने दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट IC-814 के अपहरण के बाद यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़ा था. लश्कर-ए-तैयबा की तरह, जैश-ए-मोहम्मद भी पाकिस्तान में बना, संचालित और संरक्षित संगठन है. यह कश्मीर घाटी में सक्रिय तीन बड़े आतंकी संगठनों- लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद में सबसे नया है.
गठन का कारण
मसूद अजहर 1994 में बने आतंकी संगठन हरकत-उल-अंसार (HuA) का महासचिव था. जम्मू-कश्मीर में मिशन पर था, जब 11 फरवरी 1994 को उसे गिरफ्तार किया गया. उसकी रिहाई के बाद, HuA को अमेरिका ने विदेशी आतंकी संगठनों की सूची में डाल दिया. जिसके बाद उसका नाम बदलकर हरकत-उल-मुजाहिदीन (HuM) रखा गया.
लेकिन मसूद अजहर ने पुराना संगठन छोड़कर नया संगठन जैश-ए-मोहम्मद बनाने का फैसला किया. इस संगठन को खड़ा करने में उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI, अफगानिस्तान में तालिबान शासन, ओसामा बिन लादेन और पाकिस्तान के कई सुन्नी चरमपंथी समूहों का समर्थन मिला.जैश-ए-मोहम्मद एक इस्लामी आतंकी नेटवर्क का हिस्सा है, जिसका मुख्यालय पाकिस्तान में है. जम्मू-कश्मीर में हिंसा फैलाने में सक्रिय है. इसका घोषित उद्देश्य है- जम्मू-कश्मीर से भारतीय सुरक्षा बलों को हटाना और “जिहाद” के ज़रिए भारत पर दबाव बनाना.
JeM की कार्यशैली:
जैश-ए-मोहम्मद के हमलों को आमतौर पर फिदायीन (आत्मघाती) हमले कहा जाता है. इस तरीके में आतंकी सुरक्षा ठिकानों, सेना के कैंपों या काफिलों पर धावा बोलते हैं. वे अधिकतम नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं. कभी अंदर घुसकर तब तक गोलीबारी करते हैं जब तक मारे नहीं जाते, या फिर जितने लोगों को मार सकते हैं, मारकर भागने की कोशिश करते हैं.
कहां-कहां सक्रिय हैः
जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी गतिविधियां मुख्यतः जम्मू-कश्मीर तक ही सीमित रखी हैं. जम्मू-कश्मीर के बाहर इसकी गतिविधियों का एकमात्र उदाहरण 13 दिसंबर, 2001 को नई दिल्ली में संसद पर हमला है. हालांकि, इसके कई सदस्यों को जम्मू-कश्मीर के अलावा अन्य राज्यों में भी सुरक्षा बलों द्वारा गिरफ्तार या मार गिराया गया है.






