*_ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026: दुनिया में बढ़ेगा टकराव, भारत के लिए ‘साइबर अटैक’ नंबर-1 खतरा_*

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*_ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026: दुनिया में बढ़ेगा टकराव, भारत के लिए ‘साइबर अटैक’ नंबर-1 खतरा_*

नईदिल्ली। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की साल 2026 की ताज़ा ‘ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट’ ने दुनिया के भविष्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक, हम अब एक ऐसे ‘प्रतिस्पर्धा के युग’ में प्रवेश कर चुके हैं, जहां आपसी सहयोग की जगह टकराव और अविश्वास ने ले ली है. एक तरफ जहां पूरी दुनिया आर्थिक मंदी, युद्ध और जलवायु परिवर्तन जैसे संकटों से जूझ रही है.

वहीं भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता ‘साइबर असुरक्षा’ के रूप में सामने आई है. यह रिपोर्ट न केवल दुनिया भर में मची इस आपाधापी का विश्लेषण करती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे भारत की डिजिटल सफलता (UPI) दुनिया के लिए एक उम्मीद की किरण है. जबकि पानी और आय की असमानता जैसे मुद्दे भविष्य की बड़ी चुनौती बने हुए हैं.

 

“यह ‘ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट’ एक शुरुआती चेतावनी प्रणाली की तरह है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा का यह युग वैश्विक जोखिमों को कई गुना बढ़ा रहा है. भू-आर्थिक टकराव से लेकर अनियंत्रित तकनीक और बढ़ते कर्ज तक. इन खतरों से निपटने की हमारी सामूहिक क्षमता को बदल रहा है. लेकिन इनमें से कोई भी जोखिम आखिरी या तय नहीं है.”- सादिया जाहिदी, विश्व आर्थिक मंच की प्रबंध निदेशक

 

रिपोर्ट के आधार

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ‘ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026’ इस साल का 21वां संस्करण है. यह रिपोर्ट दुनिया भर के 1,300 से अधिक बड़े नेताओं और जोखिम विशेषज्ञों के सर्वे पर आधारित है. यह रिपोर्ट साफ बताती है कि अब दुनिया एक ऐसे दौर में पहुंच गई है जहां देशों के बीच सहयोग कम और “होड़ या मुकाबला” बहुत ज्यादा बढ़ गया है.

 

भविष्य का अनुमान

सर्वे के नतीजे डराने वाले हैं. आधे विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो साल दुनिया में भारी उथल-पुथल और तनाव रहेगा. पिछले साल के मुकाबले इस डर में 14% की बढ़ोतरी हुई है. करीब 40% लोगों को लगता है कि दुनिया अशांत रहेगी, जबकि केवल 10% लोग ही शांति या स्थिरता की उम्मीद रखते हैं. अगर अगले 10 सालों की बात करें, तो 90% से ज्यादा जानकारों को लगता है कि हालात संकटपूर्ण या अस्थिर ही बने रहेंगे.

 

यह रिपोर्ट खतरों को तीन हिस्सों में बांटकर देखती है. अभी के खतरे (2026), अगले दो साल के खतरे और अगले 10 साल के खतरे.

 

आज हमारे सामने तीन बड़ी मुसीबतें एक साथ खड़ी हैं. पहला युद्ध, दूसरा देशों द्वारा व्यापार और पैसों को हथियार की तरह इस्तेमाल करना, और तीसरा समाज में बढ़ता आपसी भेदभाव.

 

ये मुसीबतें तो अभी की हैं, लेकिन इनके साथ-साथ दो और बड़े संकट पीछे से आ रहे हैं. एक तो तकनीक (जैसे AI) का बहुत तेजी से बढ़ना और दूसरा पर्यावरण का बिगड़ना.

रिपोर्ट का कहना है कि आज के ये झगड़े और तनाव हमें भविष्य की बड़ी समस्याओं (जैसे जलवायु परिवर्तन) पर ध्यान देने से रोक रहे हैं, जिससे खतरा और बढ़ता जा रहा है.

 

भारत के लिए बढ़ती चुनौतियां और चिंताएं

 

विश्व आर्थिक मंच के ‘एग्जीक्यूटिव ओपिनियन सर्वे 2025’ के नतीजे भारत के लिए एक सतर्क करने वाली तस्वीर पेश करते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, भारत के सामने अगले दो वर्षों में कई गंभीर आंतरिक और बाहरी चुनौतियां खड़ी हैं. रिपोर्ट में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि तकनीक और विकास की रफ्तार के साथ-साथ देश की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जिससे निपटने के लिए ठोस रणनीति की जरूरत होगी. भारत के संदर्भ में जिन मुख्य जोखिमों को चिन्हित किया गया है, वे इस प्रकार हैं:

 

साइबर असुरक्षा (Cyber Insecurity): इसे भारत के लिए नंबर 1 जोखिम माना गया है. अर्थव्यवस्था के तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण (विशेष रूप से इंडिया स्टैक के माध्यम से) ने हैकर्स और अन्य बाहरी ताकतों के लिए हमले का एक बड़ा रास्ता खोल दिया है.

 

आय और धन की असमानता: ‘K-आकार’ की रिकवरी (जहां कुछ लोग अमीर हो रहे हैं और कुछ गरीब) और अमीर-गरीब के बीच बढ़ती खाई को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है.

 

अपर्याप्त सार्वजनिक सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा: इसमें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के घेरे में कमियां शामिल हैं. इन्हें भविष्य के संकटों से निपटने के मामले में भारत की सबसे बड़ी कमजोरी माना गया है.

 

आर्थिक मंदी: वैश्विक विकास का इंजन होने के बावजूद, भारत को दुनिया भर में छाई मंदी, उच्च कर्ज के स्तर और संपत्ति के दामों में गिरावट जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है.

 

देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष: पड़ोस में भू-राजनीतिक तनाव (विशेष रूप से सीमा विवाद) भारत के लिए एक मुख्य रणनीतिक चिंता बनी हुई है.

 

जल सुरक्षा: भविष्य का ‘पानी का युद्ध’

 

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 2026 की रिपोर्ट में ‘जल सुरक्षा’ को भारत के लिए अगले दशक का सबसे बड़ा विवादित मुद्दा बताया गया है. रिपोर्ट विशेष रूप से सिंधु नदी घाटी को लेकर चेतावनी देती है. इसमें कहा गया है कि भविष्य में कोई भी देश नदियों के बहाव पर अपने नियंत्रण को एक ‘आर्थिक हथियार’ की तरह इस्तेमाल कर सकता है. भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर चल रहा पुराना तनाव क्षेत्र की शांति के लिए एक ‘हाई-रिस्क’ यानी बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच सकता है.

 

“एक नई प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था आकार ले रही है क्योंकि बड़ी शक्तियां अपने हितों के क्षेत्रों को सुरक्षित करने की कोशिश कर रही हैं. यह बदलता परिदृश्य, जहां आपसी सहयोग कल की तुलना में काफी अलग दिखता है, एक व्यावहारिक वास्तविकता को दर्शाता है. मिल-जुलकर काम करने के तरीके और बातचीत की भावना आज भी अनिवार्य बनी हुई है.”- बोर्गे ब्रेंडे, विश्व आर्थिक मंच (WEF) के अध्यक्ष और सीईओ

 

डिजिटल इंडिया: दुनिया के लिए मिसाल बना UPI

 

एक तरफ जहां रिपोर्ट जोखिमों की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ भारत की डिजिटल कामयाबी की तारीफ भी करती है. 2026 की इस रिपोर्ट में भारत के UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को दुनिया के लिए एक “बेहतरीन मिसाल” माना गया है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने अन्य देशों को यह सलाह दी है कि वे वैश्विक आर्थिक मंदी और कर्ज के संकट से अपनी बैंकिंग प्रणाली को बचाने के लिए भारत के UPI मॉडल को अपनाएं. इसे दुनिया भर में बैंकिंग सिस्टम को मजबूत और सुरक्षित बनाने का सबसे असरदार तरीका बताया गया है.


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