*_15 हजार में BA की डिग्री तो 2 लाख में PHD; लखनऊ में फर्जी डिग्रियां बेचने वाले 3 गिरफ्तार, सैकड़ों लोगों की जाएगी नौकरी_*
लखनऊ : पुलिस ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने छापेमारी कर 3 आरोपियों को पकड़ा है. गैंग 15 हजार में बीए, जबकि 2 लाख रुपये में पीएचडी की डिग्री उपलब्ध करा रहा था. गैंग का सरगना पीएचडी होल्डर है. उसने 1500 लोगों को फर्जी डिग्रियां बेचकर 15 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया.
पुलिस ने पकड़े गए तीनों आरोपियों के पास से देश की 25 नामचीन विश्वविद्यालयों की 900 से अधिक फर्जी डिग्रियां, मोहरें और भारी मात्रा में अन्य उपकरण बरामद किए हैं. अब पुलिस उन लोगों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने इन फर्जी दस्तावेजों के दम पर विभिन्न संस्थानों में नौकरियां हासिल की हैं.
15 हजार से 4 लाख तक में दी जाती थीं डिग्रियां : डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह ने बताया कि गोमतीनगर पुलिस ने तीन आरोपियों अयोध्या निवासी सत्येंद्र द्विवेदी, उन्नाव निवासी अखिलेश कुमार और लखीमपुर खीरी निवासी सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया है. गैंग का मास्टरमाइंड सत्येंद्र है. वह खुद सोशियोलॉजी में PhD है. उसने अपने ज्ञान का इस्तेमाल ठगी का साम्राज्य खड़ा करने में किया. आरोपी छात्रों की जरूरत के हिसाब से फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे.
ये लोग BA-MA की डिग्री 15,000 से लेकर 25000 में, B.Tech/MBA की डिग्री 50,000 से लेकर 1 लाख में, PhD की डिग्री 2 लाख से लेकर 4 लाख तक में बेचा करते थे. गैंग की ओर से अब तक 1500 लोगों को करीब 15 करोड़ रुपये की फर्जी डिग्रियां बेची जा चुकी हैं.
25 विश्वविद्यालयों के लेटर हेड-मोहर का गलत इस्तेमाल : आरोपी स्वामी विवेकानंद सुभारती (मेरठ), कलिंगा छत्तीसगढ़ और साबरमती गुजरात समेत 25 विश्वविद्यालयों के के फर्जी लेटरहेड और मोहरों का गलत इस्तेमाल करते थे. पकड़े गए आरोपियों के पास से 923 डिग्रियां, 15 मोहरें और 6 लैपटॉप बरामद हुए हैं. आरोपी साल 2021 से यह धंधा कर रहे थे. पुलिस अब उन 1500 छात्रों का डेटा तैयार कर रही है जिन्होंने ये फर्जी डिग्रियां खरीदीं. इसके जरिए उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां हासिल कीं. उन पर भी कानूनी गाज गिरनी तय है.







