*_आधार कॉपी आतंकियों के पास मिली, ये कहकर बुजुर्ग को किया DIGITAL ARREST, ₹40 लाख ट्रांसफर करवाए_*

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*_आधार कॉपी आतंकियों के पास मिली, ये कहकर बुजुर्ग को किया DIGITAL ARREST, ₹40 लाख ट्रांसफर करवाए_*

देहरादून: उत्तराखंड पुलिस लगातार लोगों को साइबर ठगों से सावधान रहने को कह रही है, लेकिन इसके बावजूद लोग साइबर ठगों के झांसे में आ जा रहे हैं. साइबर ठग भी आए दिन नई-नई ट्रिक आजमा कर लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर लाखों रुपए ठग रहे हैं. ऐसा ही एक मामला देहरादून से सामने आया है. इस बार तो साइबर ठगों ने रिटायर्ड अफसर को आतंकवादियों के साथ संबंध होने का भय दिखाकर डिजिटल अरेस्ट कर लाखों रुपयों की ठगी कर दी.

 

रिटायर्ड अफसर से साइबर ठगी: दिल्ली की एक बड़ी कंपनी से रिटायर्ड बुजुर्ग को साइबर ठगों ने आतंकियों से संबंध होने का भय दिखाया. जब बुजुर्ग डर गए तो उसके बाद डिजिटल अरेस्ट कर गिरफ्तारी का डर दिखाया. डिजिटल अरेस्टिंग के दौरान बुजुर्ग से लाखों रुपए ठग लिए गए. बुजुर्ग की शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम क्रंट्रोल पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज कर पुलिस मामले की जांच कर रही है.

 

बुजुर्ग से कहा उनके आधार कार्ड की कॉपी आतंकियों के पास मिली है: 68 वर्षीय बुजुर्ग मुकेश पांडे निवासी पंडितवाड़ी देहरादून ने शिकायत दर्ज कराई है कि वो एलएंडटी दिल्ली से रिटायर्ड कर्मचारी हैं. 10 दिसंबर को उन्हें एक फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर का कर्मचारी बताया. उसने कहा कि उनकी आधार कार्ड की एक प्रति आतंकवादियों के पास मिली है. उनके नाम का एक सिम भी उपयोग में लिया जा रहा है. पीड़ित को पुलिस हेडक्वार्टर आने के लिए कहा गया.

 

गिरफ्तारी का भय दिखाकर किया डिजिटल अरेस्ट: उसके बाद मुकेश पांडे को एक अन्य कॉल आई. इस बार कॉल करने वाले ने खुद का नाम प्रेम कुमार गौतम बताते हुए एनआईए का अधिकारी बताया. उसने कहा कि उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुआ है. उन्हें पुणे के डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा. इस डर से पीड़ित घबरा गया. साइबर ठग ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर बातों में उलझा लिया.

 

साइबर ठगों ने रिटायर्ड अफसर से ट्रांसफर करवा लिए 40 लाख रुपए: साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर हर 3 घंटे में लोकेशन मांगी. किसी अन्य व्यक्ति से बात न करने और इस संबंध में किसी को ना बताने की हिदायत दी गई. 13 दिसंबर को एक वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे सिगनल एप डाउनलोड करवाया गया. उनके खिलाफ वारंट दिखाया गया. उसके बाद साइबर ठगों ने पीड़ित के खातों में उपलब्ध धनराशि का सत्यापन करने का बहाना बनाकर 15 दिसंबर को 40 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए. 17 दिसंबर को पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ.

साइबर क्राइम कंट्रोल पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा: साइबर क्राइम कंट्रोल एएसपी कुश मिश्रा ने बताया है कि-साइबर ठग का मामला आया है. पीड़ित की तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. साथ ही पीड़ित के अकाउंट से जिन खातों में रुपए डलवाए गए हैं, उन खातों की भी जांच की जा रही है.

 


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