आईजी का बड़ एक्शन, भोटिया पडाव चौकी प्रभारी सस्पेंड
भू-माफिया धनंजय पर शिकंजा, रेंज की पुरानी एसआईटी भंग कर बनाई नई टीम
हल्द्वानी। कुमाऊँ परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक रिद्धिम अग्रवाल ने अपराध और भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए शनिवार को बड़ी कार्रवाई की है। आईजी ने जांच में गंभीर लापरवाही और शिथिलता बरतने के आरोप में भोटिया पड़ाव चौकी प्रभारी अनिल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस सख्त कदम से पुलिस महकमे और भू-माफियाओं के सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है।आईजी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देश पर धनंजय गिरी के खिलाफ चल रहे भूमि एवं निवेश संबंधी मामलों की गहन समीक्षा की गई। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी ने आकर्षक योजनाओं और भूमि सौदों का झांसा देकर भोले-भाले लोगों से 10 करोड़ रुपये से भी अधिक की ठगी की है। आईजी ने स्पष्ट किया कि प्रभाव शाली आरोपियों को किसी भी कीमत पर संरक्षण नहीं मिलेगा। वर्तमान में पुलिस द्वारा गिरी की चल-अचल संपत्तियों की विस्तृत सूची तैयार की जा रही है, ताकि अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर कुर्की व जब्ती की कार्रवाई की जा सके।जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और दबाव मुक्त बनाने के लिए आईजी ने एक और बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। उन्होंने रेंज के जिला कप्तानों द्वारा पूर्व में गठित एसआईटी को भंग कर दिया है। अब भूमि प्रकरण से जुड़े सभी मामलों की जांच सीधे रेंज स्तर की नई एसआईटी द्वारा की जाएगी। आईजी ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी स्तर पर जांच में ढिलाई या आरोपी को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई, तो संबंधित अधिकारी पर सीधी गाज गिरेगी।आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने आम आवाम से भावुक अपील करते हुए कहा कि किसी भी लुभावनी निवेश योजना या भूमि सौदे में पैसा लगाने से पहले उसके हर कानूनी पहलू की जांच-परख अवश्य करें। उन्होंने पीड़ितों को आश्वस्त किया कि पुलिस उनके साथ है और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। इस कार्रवाई को क्षेत्र में कानून का राज स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
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अवैध साम्राज्य ध्वस्त करने का ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार
आईजी रिद्धिम अग्रवाल के कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि धनंजय गिरी का केवल जेल जाना काफी नहीं होगा, बल्कि उसके द्वारा खड़े किए गए अवैध आर्थिक साम्राज्य को भी पूरी तरह जमींदोज किया जाएगा। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने तीन स्तरीय रणनीति तैयार की है। पहले चरण में उन सभी बेनामी संपत्तियों को चिन्हित किया जा रहा है जो दूसरों के नाम पर खरीदी गई हैं। दूसरे चरण में उन सफेदपोशों की पहचान की जा रही है जो पर्दे के पीछे से इस गिरोह को संरक्षण देते रहे हैं। अंत में, गैंगस्टर एक्ट जैसी कठोर धाराओं के तहत संपत्तियों के जब्तीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी ताकि भविष्य में कोई भी जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने का दुस्साहस न कर सके।






