*_पायलटों को साप्ताहिक अवकाश की नीति में कोई छूट नहीं: डीजीसीए_*
नई दिल्ली: फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) हवाई जहाजों के पायलटों को साप्ताहिक अवकाश देने की नीति में कोई समझौता नहीं हो सकता है. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने ये बातें दिल्ली हाईकोर्ट को बताई. चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार और डीजीसीए को इस मसले पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
सुनवाई के दौरान डीजीसीए की ओर से पेश वकील अंजन गोसांई ने कहा कि पायलटों को साप्ताहिक अवकाश देने की नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है. डीजीसीए ने इसे वापस नहीं लिया है. वकील गोसांई ने कहा कि केवल इंडिगो एयरलाइंस को रात के उड़ानों में यह छूट दी गई है.
हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में हवाई जहाजों की सेवाओं में व्यापक पैमाने पर बाधा के बाद फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) के नियम को निलंबित करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और डीजीसीए को नोटिस जारी किया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डीजीसीए की ओर से पेश वकील अंजन गोसांई से कहा कि वे इस मामले पर निर्देश लेकर आएं.
हाईकोर्ट ने कहा कि FDTL के नियम जरुर लागू होने चाहिए, क्योंकि ये सीधे-सीधे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है. याचिका साबरा रॉय लेंका और दूसरे याचिकाकर्ताओं ने दायर किया है. याचिका में कहा गया है कि डीजीसीए को इस बात का अधिकार नहीं है कि वो फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के नियम को लागू करने से रोके.
याचिका में कहा गया था कि डीजीसीए ने FDTL के नियम 2025 में लागू किए थे. इसके तहत पायलटों के काम के घंटे तय किए गए थे. उनके आराम के घंटे भी तय किए गए थे. फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के नियम अंतर्राष्ट्रीय नियमों के मुताबिक बनाए गए थे. लेकिन जब इस नियम को लागू किया गया तो देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस कंपनी इंडिगो ने इसे ठीक से लागू नहीं किया. जिसके बाद दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर फ्लाईट कैंसिल हुई और यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
यात्रियों को हुई परेशानी के बाद डीजीसीए ने FDTL के नियम को अस्थायी रुप से फरवरी तक निलंबित कर दिया, ताकि तब तक एयरलाइंस कंपनियां व्यवस्था सुधार सकें. याचिका में एयरलाइंस कंपनियों को खुद को लो कॉस्ट यानी कम कीमत वाला कहने से रोकने का दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि एयरक्राफ्ट एक्ट के नियमों में लो कॉस्ट जैसे वर्गीकरण का कोई प्रावधान नहीं है.






