*_कोलकाता गोदाम अग्निकांड: मरने वालों की संख्या 19 पहुंची, मालिक गिरफ्तार_*
कोलकाता: शहर के आनंदपुर इलाके में एक गोदाम में आग लगने की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है. आग बुझने के बाद, गोदाम के अंदर से लापता लोगों के शव बरामद हो रहे हैं. मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है, क्योंकि अभी भी करीब 25-30 लोग लापता बताए जा रहे हैं. पुलिस के मुताबिक, पूर्वी मेदिनीपुर जिले के रहने वाले करीब 13 लोग अभी लापता हैं. गोदाम में राहत-बचाव का काम अभी पूरा नहीं हुआ है.
वहीं, पुलिस ने गोदाम के मालिक गंगाधर दास को गिरफ्तार कर लिया है, जो मंगलवार को हुई घटना के बाद से फरार था.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आग लगने की घटना के तुरंत बाद आरोपी मालिक गंगाधर दास के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई थी. पूर्वी मेदिनीपुर जिले के खेजुरी थाना क्षेत्र के रहने वाले गंगाधर दास चार दशक से अधिक समय से डेकोरेटर्स के बिजनेस से जुड़े हैं. घटना के बाद से खेजुरी में उनके घर पर ताला लगा है. जांच जारी है और सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है.
मंगलवार को घटनास्थल का दौरा करने के बाद कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कहा कि इस घटना के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने लापता लोगों के घर जाकर उनके परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया. पश्चिम बंगाल सरकार अग्निकांड में मारे गए लोगों के परिवारों को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद देगी. यह पैसा मृतकों की पहचान होने के बाद ट्रांसफर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मृतकों की पहचान करने के लिए DNA टेस्ट के लिए बुधवार को कोर्ट से इजाजत मांगी जाएगी.
फायर ब्रिगेड के अधिकारियों के मुताबिक, गोदाम में फायर सेफ्टी के सही तरीके नहीं थे. यह बिना इजाजत के चल रहा था, जिससे भारी नुकसान हुआ और जान-माल का नुकसान हुआ. फायर और इमरजेंसी सर्विसेज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इस यूनिट (गोदाम) के लिए कोई अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है.”पता चला है कि आनंदपुर की उस यूनिट में 150 से 200 मजदूर काम कर रहे थे, जो करीब चार बीघा जमीन पर बनी थी. वहां तेजी से आग पकड़ने वाली चीजों का बहुत ज्यादा स्टॉक था, जिसमें प्लास्टिक के फूल, लकड़ी, कपड़े और फर्नीचर शामिल थे. माना जा रहा है कि इसी वजह से आग तेजी से फैली.फिलहाल बचाव दल धुएं और मलबे के बीच शवों को ढूंढ रहे हैं.
चश्मदीद और जीवित बचे सुशांत बेरा ने कहा, “एक कमरे में करीब 20 लोग थे. सब सो रहे थे. अचानक चीख-पुकार सुनकर मेरी नींद टूटी. मैंने चारों तरफ आग और काला धुआं देखा. मैं बाहर नहीं निकल सका. मुझे अपनी जान बचाने के लिए छत से कूदना पड़ा. स्थिति बहुत डरावनी थी और बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं था.”






