*_हेट स्पीच रिपोर्ट: 71 भाषणों के साथ टॉप पर सीएम धामी, बोले- देवभूमि की रक्षा के लिए आवाज उठाना कैसे नफरती?_*

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*_हेट स्पीच रिपोर्ट: 71 भाषणों के साथ टॉप पर सीएम धामी, बोले- देवभूमि की रक्षा के लिए आवाज उठाना कैसे नफरती?_*

देहरादून: ‘कभी आपने मुझे गुस्से में देखा? मैंने किसी पर कभी गुस्सा नहीं किया…अगर गुस्सा आया भी तो अकेले में, लेकिन मुझे ये कहा गया कि मैं सबसे ज्यादा हेट स्पीच देता हूं. आज तक मैंने किसी के साथ कोई हेट किया ही नहीं, तो स्पीच कैसे हेट हो सकती है?’…ये शब्द उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हैं. मंगलवार को देहरादून में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के एक साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम को सीएम धामी संबोधित कर रहे थे. इसी दौरान संबोधन के बीच में ही धामी ने हेट स्पीच को लेकर ये बयान दिया.

दरअसल, अमेरिका के वाशिंगटन डीसी स्थित एक गैर सरकारी संगठन ने भारत में हेट स्पीच को लेकर अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की है. इस रिपोर्ट में कई भारतीय नेताओं के नाम दर्ज हैं. लेकिन सबसे ऊपर शांत और आध्यात्मिक पहचान वाले उत्तराखंड राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नाम है. इसी रिपोर्ट को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ये बयान केवल एक व्यक्तिगत सफाई भर नहीं, बल्कि उस बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा है जो इन दिनों भारत में नफरती भाषणों यानी हेट स्पीच को लेकर चल रही है.

यह पहली बार है जब किसी विदेशी संस्था ने उत्तराखंड के किसी मुख्यमंत्री को इस तरह की सूची में टॉप पर रखा है. उत्तराखंड हमेशा से धार्मिक यात्रा और अपने कल्चर को लेकर चर्चाओं में रहता है. कुछ जानकार इसे उत्तराखंड की राजनीति के लिए सही नहीं मान रहे हैं.

क्या कहती है रिपोर्ट? यह रिपोर्ट अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में स्थित संस्था सेंटर फॉर स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट (CSOH) द्वारा जारी की गई है. संस्था खुद को एक गैर लाभकारी और गैर पक्षपातपूर्ण थिंक टैंक बताती है. जिसका उद्देश्य धर्म, जाति, नस्ल, राष्ट्रीयता, लिंग या किसी भी पहचान के आधार पर की जाने वाली संगठित नफरत को समझना, उसकी रिपोर्ट तैयार करना और उससे निपटने के लिए बड़े स्तर पर सुझाव देना है. यह रिपोर्ट CSOH के ‘द इंडिया हेट लैब’ नामक प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसके तहत भारत में सार्वजनिक मंचों पर दिए गए भाषणों, रैलियों, धार्मिक आयोजनों, राजनीतिक सभाओं और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का गहन अध्ययन किया गया.

रिपोर्ट 2025 हेट स्पीच इवेंट्स इन इंडिया के अनुसार, साल 2025 में भारत में 1,318 नफरती भाषण दर्ज किए गए. रिपोर्ट का दावा है कि यह संख्या 2024 की तुलना में 13 प्रतिशत और 2023 की तुलना में लगभग 97 प्रतिशत अधिक है. रिपोर्ट ये संकेत देती है कि भारत में सार्वजनिक बातचीत की भाषा पिछले कुछ वर्षों में लगातार अधिक आक्रामक विभाजनकारी और उकसाने वाली होती जा रही है.

हेट स्पीच की परिभाषा क्या है: रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी बयान को हेट स्पीच मानने के लिए CSOH ने संयुक्त राष्ट्र की रूपरेखा को आधार बनाया है. इसके अनुसार, ऐसा कोई भी भाषण लेखन या सार्वजनिक व्यवहार जो किसी व्यक्ति या समूह को उसके धर्म, जाति, नस्ल, राष्ट्रीयता, जातीय पहचान, लिंग या किसी अन्य पहचान के आधार पर निशाना बनाता है, उसे अपमानित करता है या उसके खिलाफ भेदभाव, दुश्मनी या हिंसा को बढ़ावा देता है, उसे हेट स्पीच माना गया है. वैसे भारत में अमूमन, इस तरह की भाषा चुनावी रैली और सार्वजानिक मंचों पर नेता, मीडिया में चमकने और वोटरों को लुभाने के लिए करते रहे हैं.

किस समुदाय को बनाया गया निशाना: रिपोर्ट के आंकड़े इस लिहाज से बेहद गंभीर हैं कि कुल दर्ज 1,318 हेट स्पीच मामलों में से 98 प्रतिशत मामलों में मुस्लिम और ईसाई, अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया गया. रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय को 1,156 मामलों में सीधे तौर पर लक्ष्य बनाया गया,जबकि ईसाई समुदाय के खिलाफ 162 घटनाएं दर्ज हुईं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईसाई समुदाय के खिलाफ नफरती भाषणों में पिछले वर्ष की तुलना में 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अपने आप में एक नया और चिंताजनक रुझान है.

राज्यवार तस्वीर और उत्तराखंड की स्थिति: अगर, राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक हेट स्पीच की घटनाएं उत्तर प्रदेश (266) में दर्ज की गईं. इसके बाद महाराष्ट्र (193) मध्य प्रदेश (172) और उत्तराखंड (155) का नंबर आता है. राजधानी दिल्ली में 76 ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं. हालांकि, उत्तराखंड का नाम इन शीर्ष राज्यों में शामिल होना इसलिए भी अहम है क्योंकि, शायद ऐसा पहली बार है जब इस राज्य के किसी नेता पर इस तरह की रिपोर्ट आई हो.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी क्यों सबसे ऊपर: रिपोर्ट का सबसे चर्चित हिस्सा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नाम ही है. रिपोर्ट के अनुसार 71 हेट स्पीच मामलों के साथ वो इस सूची में सबसे ऊपर हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 मामलों के साथ 9वें और यति नरसिंहानंद सरस्वती 20 मामलों के साथ 10वें स्थान पर हैं.

 

रिपोर्ट पर क्या बोले सीएम धामी: वहीं, ये रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद एक कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हंसते हुए कहा कि,

 

“अमेरिका की कोई संस्था है. मैं उसके बारे में ज्यादा नहीं जानता, लेकिन मैंने सुना है उन्होंने हेट स्पीच के मामले में मुझे पहले नंबर पर रखा है. अब मैं यह सोच रहा हूं कि मैंने कभी किसी के साथ हेट नहीं किया तो भला स्पीच कैसे हेट हो सकती है.

– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री , उत्तराखंड-

 

मंच से ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने नेताओं से पूछते हैं, “क्या मैंने कभी गुस्सा किया? आपने कभी मुझे गुस्से में देखा?”

 

इसके बाद सीएम धामी ने कहा कि, मुझे कहा गया कि आप अतिक्रमण के खिलाफ बोलते हो, थूक जेहाद के खिलाफ बोलते हो, मैंने कहा है कि हम उत्तराखंड की संस्कृति, उत्तराखंड की धार्मिक आस्था से कोई समझौता नहीं करेंगे. हम यहां के माहौल को बदलने नहीं देंगे. उन्होंने आगे कहा कि, उत्तराखंड की धार्मिक डेमोग्राफी की बात करना हेट स्पीच कैसे हो सकता है? देवभूमि के मूल स्वरूप की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करना हेट स्पीच है क्या? अगर ये हेट स्पीच है तो ठीक है, दीजिए हमें पहला स्थान. आने वाले बच्चों को हम ये सब नहीं देंगे.

 

राजनीतिक विश्लेषकों की चेतावनी: रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर उत्तराखंड जैसे राज्य के मुख्यमंत्री को इतनी आक्रामक बयानबाजी की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है या फिर राज्य की आंतरिक राजनीति में किसी तरह की उठापठक के कारण ध्यान भटकाने की सोच. जानकार कई तरह के सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि ऐसा नहीं है कोई बयान दिया जा रहा है तो वो केंद्रीय नेताओं के सामने नहीं आता है. इन सवालों पर वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी कहते हैं कि ये किसी भी सूरत में सही नहीं है.

 

हमारा राज्य देश को बेहतर हवा, पानी और धर्म का संदेश देता है. लेकिन इस तरह की चर्चा में अगर हम अव्वल आते हैं तो ये राज्य के लिए सही नहीं है. सरकार को चाहिए कि इस पर अपना खंडन दें या विचार करें. क्योंकि हम दो राज्य और दो देशों से लगे हुए राज्य हैं. उत्तराखंड के लोग बेहद सरल और सच्चे होते हैं. भविष्य के लिए यहां की राजनीति की भाषा अगर बदलती है तो ठीक नहीं है.

– आदेश त्यागी, वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार –

 

हालांकि, कुछ जानकार सीएम की बातों से इत्तेफाक भी रखते हैं. उत्तराखंड जानकार नरेंद्र सेठी कहते हैं, रिपोर्ट के बाद खुद सीएम अगर ये बोलते है कि वो धर्म की बात करते रहेंगे और अगर विदेशी एनजीओ को धर्म और आस्था के साथ साथ प्रदेश हित की बात हेट स्पीच लगती है तो लगने दो, वो किसी को अगर टारगेट करते हैं और उनको अगर लगता है कि वो हेट स्पीच है तो लगने देना चाहिए. सेठी कहते हैं कि, मुझे लगता है ये सीएम के काम करने का तरीका है और इसे हम गलत नहीं कह सकते हैं.

 

25 सालों में बदली राजनीति: वहीं, उत्तराखंड राज्य की 25 सालों की बदलती राजनीति पर नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक सुनील दत्त पांडेय कहते हैं कि धामी युवा सीएम हैं और उनकी छवि ऐसी बन गई है. बीते 25 साल में जो भी सीएम रहे हैं उनकी अलग-अलग खूबी रही है. अगर धामी मुस्कुरा कर कोई तीखी और बड़ी बात कह भी देते हैं तो ये बीजेपी का राजनीतिक स्टाइल है और मुझे लगता है की वो उनके प्रशंसकों को पसंद भी आ रहा है.

 

धामी भविष्य की बीजेपी के नेता हैं और वो अपनी एक पहचान बना चुके हैं. आप इस बात से देख लें कि उत्तराखंड के एक या दो नेता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. उनके बयानों को महत्व दिया जाता था. लेकिन अब धामी के बयानों को महत्व दिया जा रहा है.

– सुनील दत्त पांडेय, राजनीतिक विश्लेषक –

 

ये कुछ लोगों की चाल है: उधर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने ऐसी रिपोर्ट को मानने से इनकार करते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति को टारगेट करने को लेकर ये कुछ लोगों की चाल है.

 

“कोई भी बाहर की संस्था कुछ भी कहेगी तो उसे सही नहीं माना जा सकता है. ये कुछ लोगों की चाल है और कुछ नहीं. हमारे यहां हर धर्म का सम्मान होता है. कुछ विदेशी ताकत अगर ऐसा कर भी रही है तो उत्तराखंड और भारत के लोग सब जानते हैं.”

– महेंद्र भट्ट, अध्यक्ष, उत्तराखंड भाजपा –

 

जिहाद वाले नैरेटिव और भाषा का तीखापन: वहीं, सेंटर फॉर स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट (CSOH) की इस रिपोर्ट में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का नाम आने के साथ ही ये भी कहा गया है कि उनके 656 भाषणों में लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद, शिक्षा जिहाद और वोट जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ है.

 

सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा मंच: रिपोर्ट में सोशल मीडिया की भूमिका को बेहद अहम बताया गया है. कुल दर्ज हेट स्पीच मामलों में से 1,278 भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए गए या लाइव प्रसारित किए गए इनमें सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म फेसबुक रहा, जहां 942 वीडियो सबसे पहले अपलोड किए गए. इसके बाद यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स (X) जैसे प्लेटफॉर्म पर वीडियो पोस्ट किए गए हैं.

 

उत्तराखंड ने अपने 25 सालों की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. इतने सालों में राजनीति की भाषा और राजनीति करने का स्टाइल भी बदला है. देवभूमि उत्तराखंड को लंबे समय तक सामाजिक संतुलन, धार्मिक अस्तित्व और सीमित राजनीतिक टकराव का राज्य माना जाता रहा है. यहां की राजनीति अक्सर विकास, आपदा प्रबंधन, पलायन और पर्यावरण जैसे मुद्दों के इर्द गिर्द घूमती रही है. साल 2000 में नित्यानंद स्वामी से शुरू हुआ उत्तराखंड की राजनीति का सफर अब इन 25 सालों में भगत सिंह कोश्यारी, नारायण दत्त तिवारी, भुवन चंद्र खंडूड़ी, रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, हरीश रावत, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और अब वर्तमान 2025 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचा है. इन सालों में उत्तराखंड ने बदलते सीएम के साथ कई नीतियों को बदलते देखा है. वर्तमान में भी उत्तराखंड बदलाव के दौर से गुजर रहा है.


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