सैकड़ों नर्सिंग अभ्यर्थियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री आवास कूच किया।

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सैकड़ों नर्सिंग अभ्यर्थियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री आवास कूच किया।

चालीस दिनों से धरने पर बैठे बेरोजगारों के सब्र का बांध टूटा

देहरादून । उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद अब सड़कों पर उतर आया है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे सैकड़ों नर्सिंग अभ्यर्थियों ने सोमवार को प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री आवास कूच किया। हाथों में पोस्टर-बैनर लिए और सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी और विसंगतियों पर कड़ा रोष प्रकट किया। बता दें कि नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले ये अभ्यर्थी पिछले 40 दिनों से एकता विहार धरना स्थल पर डटे हुए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार और प्रशासन की ओर से उन्हें बार-बार केवल मौिखक आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। इसी से निराश होकर सोमवार को आंदोलित बेरोजगारों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए सड़कों पर मार्च निकाला। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया था। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग पर रोककर समझाने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े रहे। नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर ने भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में 2008 के बाद वर्ष 2020 में भर्ती निकाली गई थी। इसे वरिष्ठता के आधार पर पूरा करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन विसंगतियों के कारण एक बड़ा वर्ग आज भी चयन से वंचित रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगारों के साथ दोहरी नीति अपना रही है। पुंडीर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि आज उनकी मांगों पर कोई ििलखत आदेश या ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलनरत महिला और पुरुष अभ्यर्थी सामूहिक रूप से मुंडन कराकर अपना विरोध दर्ज करेंगे। आंदोलनकारियों का कहना है कि नर्सिंग भर्ती में हो रही देरी से अभ्यर्थियों की उम्र सीमा निकली जा रही है और मानसिक तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरा जाए और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए। समाचार लिखे जाने तक भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रदर्शन जारी था और अभ्यर्थी मुख्यमंत्री से सीधे वार्ता की मांग पर अड़े हुए थे।


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